
श्रीगंगानगर जिले के रायसिंहनगर क्षेत्र स्थित भोमपुरा गौशाला से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया है। पिछले कुछ ही दिनों के भीतर इस गौशाला में 100 से अधिक गायों की रहस्यमयी परिस्थितियों में मौत हो गई है। इतनी बड़ी संख्या में गौवंश की हानि ने न केवल पशु प्रेमियों को आहत किया है, बल्कि प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
घटना का घटनाक्रम और मौत के कारण
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गौशाला में गायों की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी और देखते ही देखते मौतों का आंकड़ा 100 के पार पहुंच गया। हालांकि मौत के सटीक कारणों की पुष्टि अभी विस्तृत जांच रिपोर्ट के बाद ही हो पाएगी, लेकिन शुरुआती कयासों में दूषित चारा या जहरीला पानी मुख्य कारण माना जा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि गौशाला में चारे के रख-रखाव में भारी लापरवाही बरती गई, जिससे वह फफूंदयुक्त या जहरीला हो गया था। भीषण ठंड और पर्याप्त छप्पर (आश्रय) न होना भी एक गौण कारण बताया जा रहा है।
प्रशासनिक हरकत और मेडिकल टीम की तैनाती
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन और पशुपालन विभाग ने आनन-फानन में मेडिकल टीमों को भोमपुरा भेजा है। डॉक्टरों की टीम ने मृत गायों का पोस्टमार्टम किया है और विसरा (नमूने) जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं। साथ ही, बीमार गायों के इलाज के लिए गौशाला में ही एक अस्थाई अस्पताल जैसा सेटअप तैयार किया गया है ताकि शेष गौवंश को बचाया जा सके।
इस्तीफा और राजनीतिक उबाल
इस बड़ी त्रासदी की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए गौशाला अध्यक्ष ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपने इस्तीफे में संसाधनों की कमी और प्रशासन से समय पर मदद न मिलने का जिक्र किया है। वहीं दूसरी ओर, इस घटना ने अब राजनीतिक रूप ले लिया है:
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ग्रामीणों का आक्रोश: स्थानीय ग्रामीणों और गौ-भक्तों ने गौशाला के बाहर प्रदर्शन किया और दोषी अधिकारियों व प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
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विपक्ष के तेवर: विपक्षी दलों ने राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन को घेरते हुए इसे ‘प्रबंधन की हत्या’ करार दिया है। नेताओं का आरोप है कि गौ-संरक्षण के नाम पर मिलने वाले बजट का सही उपयोग नहीं हो रहा है।
गौशालाओं की स्थिति पर उठे सवाल
भोमपुरा की इस घटना ने राजस्थान की अन्य गौशालाओं की सुरक्षा और वहां मिलने वाले चारे-पानी की गुणवत्ता पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। सर्दियों के मौसम में जब गौवंश को अतिरिक्त देखभाल की आवश्यकता होती है, ऐसी लापरवाही व्यवस्था की पोल खोलती है।
आगे की राह
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि 48 घंटों के भीतर मौतों के सही कारणों का खुलासा नहीं किया गया और दोषियों पर एफआईआर दर्ज नहीं हुई, तो वे चक्का जाम करेंगे। प्रशासन अब स्थिति को शांत करने और गौशाला में स्वच्छता व नए चारे की व्यवस्था करने में जुटा है।