
श्रीगंगानगर। राजस्थान का ‘अन्न कटोरा’ कहा जाने वाला श्रीगंगानगर एक बार फिर किसान आंदोलन का केंद्र बनने जा रहा है। आज 22 फरवरी 2026 को जिले के विभिन्न किसान संगठनों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच हलचल तेज रही। केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में अमेरिका के साथ किए गए ‘भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते’ (Trade Deal) के विरोध में और स्थानीय सिंचाई संकट के समाधान के लिए किसानों ने एक साथ मोर्चा खोल दिया है।
9 मार्च की महारैली: राहुल गांधी और खरगे भरेंगे हुंकार
कांग्रेस पार्टी ने इस ट्रेड डील को “ट्रैप डील” (Trap Deal) करार देते हुए देशव्यापी विरोध का बिगुल फूंका है। इसी कड़ी में 9 मार्च 2026 को श्रीगंगानगर की नई धान मंडी में एक विशाल ‘किसान सम्मेलन’ आयोजित किया जा रहा है।
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प्रमुख अतिथि: इस रैली में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के शामिल होने की पूरी संभावना है।
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उद्देश्य: रैली का मुख्य उद्देश्य किसानों को इस व्यापार समझौते के संभावित नुकसानों के बारे में जागरूक करना है। कांग्रेस का आरोप है कि इस समझौते से अमेरिका से सस्ता अनाज और कृषि उत्पाद भारत में आएंगे, जिससे स्थानीय किसानों की फसलों (विशेषकर कपास, मक्का और सोयाबीन) के दाम गिर जाएंगे।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील: विवाद की मुख्य जड़
किसानों और विपक्षी दलों का तर्क है कि मोदी सरकार ने इस समझौते के माध्यम से भारतीय कृषि क्षेत्र को अमेरिकी दबाव में डाल दिया है।
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सस्ते आयात का डर: किसानों को डर है कि अमेरिका से मिलने वाली भारी सब्सिडी वाले कृषि उत्पाद भारतीय बाजारों में भर जाएंगे, जिससे यहाँ के किसानों को अपनी लागत निकालना भी मुश्किल हो जाएगा।
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कपास और फलों पर संकट: श्रीगंगानगर बेल्ट में कपास और किन्नू की बड़ी पैदावार होती है। जानकारों का कहना है कि ट्रेड डील के कारण विदेशी फलों और कपास की आवक बढ़ने से स्थानीय बाजार पूरी तरह प्रभावित हो सकता है।
स्थानीय मुद्दा: सिंचाई पानी और फिरोजपुर फीडर का संकट
जहाँ एक ओर अंतरराष्ट्रीय नीतियों का विरोध हो रहा है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर किसान सिंचाई पानी की कमी को लेकर भी सड़कों पर हैं।
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नहरबंदी और विरोध: फिरोजपुर फीडर की नहरबंदी के 30 दिन से अधिक बीत जाने के बाद भी वैकल्पिक पानी नहीं मिलने से किसान आक्रोशित हैं।
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चक्काजाम: हाल ही में किसानों ने सीसी हैड और फूसेवाला टोल प्लाजा पर जाम लगाकर प्रशासन को चेतावनी दी है। किसानों की मांग है कि गंगनहर में 2500 क्यूसेक पानी सुनिश्चित किया जाए ताकि रबी की फसल (विशेषकर गेहूं) को बचाया जा सके, जो वर्तमान में गर्मी बढ़ने के कारण संवेदनशील चरण में है।
दिल्ली कूच और संयुक्त रणनीति
संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) और अन्य स्थानीय संगठनों ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगों पर गौर नहीं किया गया, तो वे एक बार फिर दिल्ली की सीमाओं की ओर कूच करेंगे। कांग्रेस की 9 मार्च की रैली इसी बढ़ते जनाक्रोश को एक राजनीतिक मंच प्रदान करने की कोशिश है।
“यह लड़ाई केवल खेत की नहीं, बल्कि किसान के अस्तित्व की है। विदेशी व्यापार समझौते हमारे खेतों को बर्बाद कर देंगे और स्थानीय प्रशासन हमें पानी नहीं दे रहा।” — एक स्थानीय किसान नेता का वक्तव्य
निष्कर्ष
श्रीगंगानगर में 9 मार्च की रैली केवल एक राजनीतिक आयोजन नहीं, बल्कि क्षेत्र के किसानों के भविष्य की दिशा तय करने वाला दिन साबित हो सकती है। प्रशासन और पुलिस विभाग भी इस बड़ी रैली और संभावित विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए सुरक्षा और कानून व्यवस्था की समीक्षा में जुट गए हैं।