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श्रीगंगानगर बॉर्डर पर ‘तीसरी आंख’ का पहरा: 210 किमी क्षेत्र में बिछाया जा रहा हाईटेक CCTV कैमरों का जाल

श्रीगंगानगर, 3 जनवरी 2026: भारत-पाकिस्तान सीमा पर स्थित राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले में सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। सीमा पार से होने वाली मादक पदार्थों की तस्करी, घुसपैठ और विशेष रूप से ड्रोन चुनौतियों से निपटने के लिए जिले के 210 किलोमीटर लंबे अंतरराष्ट्रीय सीमा क्षेत्र में हाईटेक सीसीटीवी (CCTV) कैमरों का नेटवर्क स्थापित किया जा रहा है।

इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य सीमावर्ती गांवों, पगडंडियों और संवेदनशील चौकियों पर 24 घंटे पैनी नजर रखना है।


क्यों पड़ी हाईटेक निगरानी की जरूरत?

पिछले दो वर्षों में श्रीगंगानगर सीमा पर तस्करी के तौर-तरीकों में भारी बदलाव आया है। पाकिस्तानी तस्कर अब पारंपरिक रास्तों के बजाय चीन निर्मित आधुनिक ड्रोन्स का उपयोग कर रहे हैं। ये ड्रोन अंधेरे और घने कोहरे का फायदा उठाकर भारतीय सीमा के भीतर हेरोइन और हथियारों की खेप गिराकर वापस लौट जाते हैं।

हालांकि बीएसएफ (BSF) के जवान मुस्तैदी से इनका सामना करते हैं, लेकिन 210 किमी के विशाल क्षेत्र के हर कोने पर इंसानी आंख से नजर रखना चुनौतीपूर्ण होता है। इसी कमी को पूरा करने के लिए ‘डिजिटल सर्विलांस’ यानी सीसीटीवी नेटवर्क को आधार बनाया जा रहा है।

परियोजना की मुख्य विशेषताएं

यह केवल साधारण कैमरे नहीं हैं, बल्कि आधुनिक तकनीक से लैस एक पूरी प्रणाली है:

  1. नाइट विजन और थर्मल सेंसर: ये कैमरे घने कोहरे और अंधेरी रातों में भी स्पष्ट फुटेज देने में सक्षम हैं। थर्मल सेंसर की मदद से झाड़ियों या खेतों में छिपे किसी भी संदिग्ध की शारीरिक ऊष्मा (Heat) को पहचानकर अलर्ट भेजा जा सकेगा।

  2. 360 डिग्री कवरेज: संवेदनशील रास्तों और सीमावर्ती गांवों के प्रवेश द्वारों पर पीटीजेड (PTZ) कैमरे लगाए जा रहे हैं, जो चारों दिशाओं में घूमकर निगरानी कर सकते हैं।

  3. ड्रोन डिटेक्शन सहायता: इन कैमरों को इस तरह से एंगल किया गया है कि वे आसमान की गतिविधियों को भी रिकॉर्ड कर सकें, जिससे ड्रोन के आने-जाने के मार्ग (Flight Path) को ट्रैक करना आसान होगा।

  4. कंट्रोल रूम से सीधा जुड़ाव: इन सभी कैमरों का फीड स्थानीय पुलिस थानों, बीएसएफ मुख्यालय और जिला पुलिस मुख्यालय में बनाए गए अत्याधुनिक कंट्रोल रूम से जोड़ा गया है।

सीमावर्ती गांवों की सुरक्षा में इजाफा

इस परियोजना के तहत न केवल जीरो लाइन, बल्कि सीमा से सटे गांवों की मुख्य सड़कों और चौराहों को भी कवर किया जा रहा है। इससे उन स्थानीय तस्करों और ‘गाइड्स’ पर नकेल कसी जा सकेगी जो सीमा पार से आने वाली खेप की डिलीवरी लेने के लिए गांवों के रास्तों का उपयोग करते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में कैमरों के लगने से चोरी और अन्य आपराधिक गतिविधियों में भी कमी आने की उम्मीद है।

सुरक्षा एजेंसियों का विजन

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह ‘स्मार्ट फेंसिंग’ का एक डिजिटल विस्तार है। जब मानवीय गश्त (Patrolling) और तकनीकी निगरानी (CCTV) एक साथ मिलते हैं, तो अपराध की गुंजाइश नगण्य हो जाती है।

जिला प्रशासन और सुरक्षा बलों के अनुसार, इस प्रणाली के पूरी तरह सक्रिय होने के बाद:

  • संदिग्ध वाहनों की पहचान तुरंत हो सकेगी।

  • ड्रोन गिरने की सटीक लोकेशन का पता लगाकर तुरंत सर्च ऑपरेशन शुरू किया जा सकेगा।

  • तस्करी के मामलों में कोर्ट में पेश करने के लिए ठोस डिजिटल साक्ष्य उपलब्ध होंगे।


निष्कर्ष: श्रीगंगानगर की सीमा पर बिछाया जा रहा यह कैमरों का जाल राष्ट्र की सुरक्षा के लिए एक सुरक्षा कवच साबित होगा। आधुनिक तकनीक के समावेश से अब तस्करों के लिए भारतीय सीमा में सेंध लगाना लगभग नामुमकिन हो जाएगा।

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