
राजस्थान के सीमावर्ती जिले श्रीगंगानगर की सादुलशहर पंचायत समिति के अंतर्गत आने वाले ग्राम बुधरवाली में इन दिनों सफाई व्यवस्था के नाम पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। ग्राम पंचायत में कार्यरत सफाई कर्मचारियों के वेतन में कथित हेराफेरी और उनके आर्थिक शोषण को लेकर ग्रामीण राजनीति गरमा गई है। अखिल भारतीय किसान सभा ने इस मामले में सीधे तौर पर ठेकेदार और पंचायत प्रशासन की मिलीभगत की आशंका जताई है।
क्या है पूरा विवाद?
मामले का खुलासा तब हुआ जब अखिल भारतीय किसान सभा के जिला उपाध्यक्ष कौर सिंह सिद्धू ने सफाई कर्मचारियों से बातचीत के आधार पर सार्वजनिक बयान जारी किया। सिद्धू के अनुसार, ग्राम पंचायत बुधरवाली में सफाई कार्य का जिम्मा एक निजी ठेकेदार को दिया गया है। अनुबंध के मुताबिक, ग्राम पंचायत द्वारा प्रति सफाई कर्मचारी 7,000 रुपये प्रतिमाह की दर से भुगतान किया जा रहा है।
हालांकि, जमीनी हकीकत इसके उलट पाई गई। आरोप है कि ठेकेदार द्वारा सफाई कर्मचारियों के बैंक खातों या नकद भुगतान के माध्यम से केवल 6,000 रुपये ही दिए जा रहे हैं। प्रति कर्मचारी 1,000 रुपये की यह कटौती न केवल श्रम नियमों का उल्लंघन है, बल्कि उन गरीब मजदूरों के अधिकारों पर भी कुठाराघात है जो दिन-रात गांव की स्वच्छता सुनिश्चित करते हैं।
शोषण के गंभीर आरोप
कौर सिंह सिद्धू ने इस स्थिति पर कड़ा रोष जताते हुए कहा कि यह सीधे तौर पर “मजदूरों की जेब पर डाका” है। उन्होंने कहा:
“एक तरफ सरकार न्यूनतम मजदूरी और श्रमिक कल्याण की बात करती है, वहीं दूसरी ओर ग्राम पंचायतों में ठेकेदारी प्रथा के माध्यम से गरीब मजदूरों का शोषण किया जा रहा है। 7,000 रुपये के बजट में से 1,000 रुपये की कटौती करना अवैध है। आखिर यह पैसा किसकी जेब में जा रहा है?”
किसान सभा का आरोप है कि इस पूरे खेल में केवल ठेकेदार ही नहीं, बल्कि पंचायत स्तर के कुछ जिम्मेदार अधिकारी भी मौन रहकर इस भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहे हैं।
नियमों की अनदेखी और सुरक्षा का अभाव
सफाई कर्मचारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उन्हें न केवल वेतन कम मिल रहा है, बल्कि सफाई कार्य के दौरान सुरक्षा उपकरणों (जैसे दस्ताने, मास्क और जूते) की भी कमी है। ठेका शर्तों के अनुसार ये सुविधाएं देना अनिवार्य होता है, लेकिन लाभ कमाने के चक्कर में ठेकेदार इन बुनियादी जरूरतों को नजरअंदाज कर रहा है।
प्रशासन से जांच की मांग
अखिल भारतीय किसान सभा ने इस मामले में जिला प्रशासन और पंचायत समिति सादुलशहर के विकास अधिकारी (BDO) से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। सिद्धू ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस मामले की उच्च स्तरीय जांच नहीं की गई और सफाई कर्मचारियों को उनका पूरा हक (बकाया सहित) नहीं मिला, तो संगठन मजदूरों के साथ मिलकर ग्राम पंचायत कार्यालय के समक्ष विरोध प्रदर्शन और धरना देने के लिए मजबूर होगा।
मुख्य मांगें:
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ठेकेदार द्वारा अब तक की गई कटौती की रिकवरी कर मजदूरों को भुगतान किया जाए।
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ग्राम पंचायत और ठेकेदार के बीच हुए अनुबंध की पारदर्शिता के साथ जांच हो।
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सफाई कर्मचारियों को सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी सुनिश्चित की जाए।
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ठेका प्रथा में व्याप्त भ्रष्टाचार को रोकने के लिए सीधे भुगतान की व्यवस्था पर विचार किया जाए।
निष्कर्ष
बुधरवाली का यह मामला श्रीगंगानगर जिले की अन्य पंचायतों के लिए भी एक चेतावनी है, जहाँ ठेकेदारी प्रथा के तहत काम हो रहा है। विकास और स्वच्छता के दावों के बीच, समाज के सबसे निचले तबके का यह शोषण प्रशासनिक सुस्ती और निगरानी के अभाव को दर्शाता है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस पर क्या कार्रवाई करता है और क्या उन सफाईकर्मियों को न्याय मिलता है जो गांव की गंदगी साफ करते हुए खुद भ्रष्टाचार की गंदगी का शिकार हो रहे हैं।