
श्रीगंगानगर, 1 अप्रैल 2026: राजस्थान के सीमावर्ती जिले श्रीगंगानगर में पुलिस ने नशे के सौदागरों के खिलाफ एक बेहद निर्णायक और बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सक्रिय ड्रग तस्करी नेटवर्क को एक और करारा झटका देते हुए पुलिस ने 12 किलो हेरोइन की तस्करी के मुख्य आरोपी गुरविंदर सिंह उर्फ टिंकू को गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी न केवल एक अपराधी को सलाखों के पीछे ले गई है, बल्कि इसने सीमा पार से होने वाली ‘ड्रोन डिलीवरी’ के पूरे सिस्टम और उसके वितरण नेटवर्क को भी ध्वस्त कर दिया है।
कार्रवाई की पृष्ठभूमि: एक तार से जुड़ा दूसरा सिरा
इस बड़ी सफलता की नींव 26 मार्च 2026 को रखी गई थी, जब पुलिस ने एक अलग ऑपरेशन के दौरान 11 किलो हेरोइन बरामद की थी। उस मामले में पकड़े गए आरोपियों से जब गहन पूछताछ की गई, तो उन्होंने तस्करी के एक ऐसे सिंडिकेट का खुलासा किया जो पिछले कई महीनों से सक्रिय था।
पूछताछ के दौरान यह चौंकाने वाली जानकारी सामने आई कि इसी गिरोह ने फरवरी 2026 में पाकिस्तान से ड्रोन के माध्यम से श्रीगंगानगर बॉर्डर पर आई 12 किलो हेरोइन को न केवल रिसीव किया था, बल्कि उसे सुरक्षित रूप से पंजाब के बड़े सप्लायर्स तक पहुँचा भी दिया था। इसी कड़ी को जोड़ते हुए पुलिस ने मुख्य कड़ी, गुरविंदर सिंह उर्फ टिंकू, तक पहुँचने में सफलता हासिल की।
कैसे काम करता था यह नेटवर्क?
पुलिस जांच में सामने आया है कि सीमा पार (पाकिस्तान) में बैठे तस्कर भारतीय क्षेत्र में अपने संपर्कों को लोकेशन साझा करते थे।
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ड्रोन डिलीवरी: रात के अंधेरे में अत्याधुनिक ड्रोन्स का उपयोग कर हेरोइन के पैकेट भारतीय सीमा के भीतर खेतों में गिरा दिए जाते थे।
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लोकल रिसीवर: गुरविंदर सिंह जैसे स्थानीय गुर्गे उन पैकेटों को इकट्ठा करने के लिए ‘गाइड’ और ‘पिक-अप’ का काम करते थे।
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सुरक्षित ट्रांसपोर्ट: बॉर्डर से पंजाब तक ले जाने के लिए विशेष रूप से मॉडिफाई की गई गाड़ियों का उपयोग किया जाता था, ताकि नाकाबंदी के दौरान पुलिस की नजरों से बचा जा सके।
गुरविंदर सिंह उर्फ टिंकू: नेटवर्क का मुख्य मोहरा
गुरविंदर सिंह इस पूरे ऑपरेशन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था। पुलिस के अनुसार, वह पंजाब का रहने वाला है और श्रीगंगानगर बॉर्डर के इलाकों की उसे सटीक भौगोलिक जानकारी थी। फरवरी की 12 किलो हेरोइन की खेप को पंजाब के नशा तस्करों तक पहुँचाने में उसकी भूमिका ‘मास्टरमाइंड’ जैसी थी। उसकी गिरफ्तारी से अब यह पता लगाने में आसानी होगी कि पंजाब में यह जहर किन-किन इलाकों में और किन लोगों को सप्लाई किया जा रहा था।
सुरक्षा एजेंसियों की बढ़ती चिंता और तैयारी
श्रीगंगानगर और आसपास के इलाकों में हाल के दिनों में ड्रोन गतिविधियों में तेजी आई है। पुलिस अधीक्षक (SP) ने प्रेस वार्ता में बताया कि तस्कर अब तकनीकी रूप से अधिक सक्षम हो रहे हैं। हालांकि, पुलिस और सीमा सुरक्षा बल (BSF) के बीच बेहतर समन्वय ने इनके मंसूबों को नाकाम किया है।
“यह गिरफ्तारी केवल एक अपराधी की पकड़ नहीं है, बल्कि उस पूरे रूट की पहचान है जिसका उपयोग देश की युवा पीढ़ी को बर्बाद करने के लिए किया जा रहा था। हम अब इस नेटवर्क के वित्तीय लेन-देन (Money Trail) की जांच कर रहे हैं।” – स्थानीय पुलिस अधिकारी
निष्कर्ष और आगामी कदम
इस 12 किलो हेरोइन मामले के खुलासे के बाद पुलिस अब उन सफेदपोश चेहरों की तलाश कर रही है जो इन तस्करों को रसद और स्थानीय मदद मुहैया कराते हैं। पंजाब पुलिस के साथ भी सूचनाएं साझा की गई हैं ताकि वहां के रिसीवर्स को भी दबोचा जा सके।
श्रीगंगानगर पुलिस की इस सतर्कता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सीमा पार से आने वाले हर ड्रोन पर सुरक्षा एजेंसियों की पैनी नजर है। आने वाले दिनों में इस मामले में कई और बड़ी गिरफ्तारियां होने की संभावना है, जो अंतरराष्ट्रीय ड्रग कार्टेल की कमर तोड़ देंगी।