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श्रीगंगानगर पुलिस का ‘ऑपरेशन फ्रीज’: साइबर ठगी और नशे के नेटवर्क पर करारा प्रहार

श्रीगंगानगर। डिजिटल क्रांति के इस दौर में जहां तकनीक ने जीवन आसान बनाया है, वहीं साइबर अपराधियों ने इसे ठगी का नया हथियार बना लिया है। श्रीगंगानगर जिले में बढ़ते साइबर अपराधों और युवाओं को खोखला कर रहे नशे के अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए जिला पुलिस ने एक विशेष अभियान ‘ऑपरेशन फ्रीज’ (Operation Freeze) शुरू किया है। इस अभियान के तहत पुलिस न केवल अपराधियों को सलाखों के पीछे भेज रही है, बल्कि उनके आर्थिक साम्राज्य को भी ‘फ्रीज’ करने की रणनीति पर काम कर रही है।

कंबोडिया कनेक्शन और मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी

‘ऑपरेशन फ्रीज’ को हाल ही में उस समय बड़ी सफलता मिली, जब श्रीगंगानगर पुलिस की साइबर सेल ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संचालित हो रहे एक बड़े ठगी गिरोह का भंडाफोड़ किया। जांच में सामने आया कि इस गिरोह के तार दक्षिण-पूर्व एशियाई देश कंबोडिया से जुड़े हुए थे।

पुलिस ने इस गिरोह के एक मुख्य मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया है, जो विदेशों में बैठे अपने आकाओं के इशारे पर भारत में ठगी के पैसे को ‘रूट’ (Route) करता था। यह गिरोह मुख्य रूप से ‘इन्वेस्टमेंट फ्रॉड’, ‘टास्क बेस्ड स्कैम’ और ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे तरीकों से लोगों की गाढ़ी कमाई लूट रहा था। आरोपी के पास से भारी मात्रा में संदिग्ध डेटा और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए हैं।

स्थानीय संपर्कों पर पुलिस का शिकंजा

गिरफ्तारी के बाद हुई पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पुलिस अब उन स्थानीय संपर्कों (Local Connects) की गहनता से जांच कर रही है जो इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की रीढ़ बने हुए थे।

  • फर्जी सिम कार्ड: जिले के कुछ मोबाइल सिम विक्रेताओं की भूमिका संदिग्ध पाई गई है, जो बिना उचित केवाईसी (KYC) या फर्जी दस्तावेजों के आधार पर थोक में सिम कार्ड उपलब्ध करवा रहे थे। ये सिम कार्ड बाद में साइबर ठगी के लिए इस्तेमाल किए जाते थे।

  • किराए के बैंक खाते (Mule Accounts): ठगी की राशि को सफेद करने के लिए स्थानीय स्तर पर कम पढ़े-लिखे या लालची लोगों के बैंक खातों का उपयोग किया जा रहा था। इन ‘म्यूल अकाउंट्स’ के जरिए पैसा तुरंत कई खातों में घुमाया जाता था और अंत में क्रिप्टो करेंसी के रूप में विदेश भेज दिया जाता था।

पुलिस अधीक्षक (SP) ने स्पष्ट किया है कि फर्जी सिम बेचने वालों और अपने बैंक खाते अपराधियों को किराए पर देने वालों को भी मुख्य अपराधी के समान ही सजा भुगतनी होगी।

नशे के खिलाफ भी ‘फ्रीज’ मोड में पुलिस

‘ऑपरेशन फ्रीज’ केवल साइबर अपराध तक सीमित नहीं है। श्रीगंगानगर की भौगोलिक स्थिति सीमावर्ती होने के कारण यहां नशे की तस्करी एक बड़ी चुनौती है। पुलिस अब तस्करों की चल-अचल संपत्तियों को चिन्हित कर उन्हें जब्त (Freeze) करने की प्रक्रिया शुरू कर रही है। पुलिस का मानना है कि अपराधी को जेल भेजने से ज्यादा प्रभावी उसे आर्थिक रूप से तोड़ना है। नशा तस्करी से अर्जित की गई कोठियों, गाड़ियों और जमीनों को कुर्क करने की तैयारी की जा रही है।

नागरिकों के लिए ‘एडवाइजरी’ और बचाव के तरीके

पुलिस अधीक्षक ने श्रीगंगानगर के नागरिकों से अपील की है कि वे तकनीक का उपयोग सावधानी से करें। साइबर ठगी से बचने के लिए कुछ महत्वपूर्ण बिंदु साझा किए गए हैं:

  1. संदिग्ध लिंक से दूरी: व्हाट्सएप या ईमेल पर आने वाले ‘घर बैठे पैसा कमाएं’ या ‘लॉटरी’ वाले संदिग्ध लिंक पर कभी क्लिक न करें।

  2. अनजान कॉल और वीडियो कॉल: अनजान नंबर से आने वाली वीडियो कॉल उठाने से बचें, क्योंकि यह ‘सेक्सटोर्शन’ (Sextortion) का हिस्सा हो सकती है।

  3. ओटीपी (OTP) साझा न करें: बैंक अधिकारी बनकर कॉल करने वालों को कभी भी अपना ओटीपी या पिन न बताएं।

  4. तुरंत रिपोर्ट करें: यदि ठगी हो जाती है, तो बिना देरी किए 1930 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। शुरुआती 1-2 घंटे (Golden Hour) में शिकायत करने पर पैसे वापस मिलने की संभावना अधिक रहती है।

निष्कर्ष

श्रीगंगानगर पुलिस का ‘ऑपरेशन फ्रीज’ अपराधियों में खौफ पैदा करने और आम जनता में सुरक्षा का भाव जगाने की दिशा में एक ठोस कदम है। तकनीक और पुलिसिंग के तालमेल से ही साइबर सुरक्षित समाज का निर्माण संभव है। पुलिस की इस मुहिम को सफलता तभी मिलेगी जब नागरिक भी जागरूक बनेंगे और ‘लालच’ व ‘डर’ के जाल में फंसने से बचेंगे।

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