
राजस्थान के सीमावर्ती जिले श्रीगंगानगर में आज, 23 जनवरी 2026 को प्रकृति ने करवट बदल ली है। उत्तर भारत में सक्रिय हुए एक शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के प्रभाव से सीमावर्ती बेल्ट में मौसम पूरी तरह बदल गया है। मौसम विभाग (IMD) द्वारा जारी ‘ऑरेंज अलर्ट’ ने प्रशासन और आम जनमानस, विशेषकर किसानों की चिंता बढ़ा दी है।
मौसम की वर्तमान स्थिति और पूर्वानुमान
आज तड़के से ही श्रीगंगानगर के आसमान में घने, काले बादलों का डेरा जमा हुआ है। सूर्यदेव के दर्शन दुर्लभ हो गए हैं और पूरा जिला ठिठुरन भरी हवाओं की चपेट में है। मौसम केंद्र जयपुर के अनुसार:
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तापमान का ग्राफ: आज जिले का न्यूनतम तापमान 7°C दर्ज किया गया है। बादलों की आवाजाही के कारण दिन के तापमान में भी भारी गिरावट आने की संभावना है, जिससे ‘कोल्ड डे’ (Cold Day) जैसी स्थिति बन सकती है।
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बारिश और ओलावृष्टि: अलर्ट के मुताबिक, अगले 24 से 48 घंटों के दौरान श्रीगंगानगर, पदमपुर, रायसिंहनगर, और अनूपगढ़ बेल्ट में हल्की से मध्यम दर्जे की बारिश हो सकती है। सबसे अधिक चिंता का विषय कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में ओलावृष्टि (Hailstorm) की संभावना है।
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हवा की गति: पश्चिमी विक्षोभ के कारण 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ठंडी हवाएं चलने का अनुमान है, जो दृश्यता (Visibility) को भी प्रभावित कर सकती हैं।
किसानों की बढ़ी धड़कनें: रबी की फसलों पर खतरा
श्रीगंगानगर एक कृषि प्रधान जिला है, और वर्तमान में खेत रबी की फसलों (गेहूं, सरसों, चना और किन्नू) से लहलहा रहे हैं। मौसम का यह बदलाव किसानों के लिए मिश्रित संकेत लेकर आया है:
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गेहूं के लिए अमृत: यदि केवल हल्की बूंदाबांदी होती है, तो यह गेहूं की फसल के लिए ‘मावट’ (अमृत) के समान होगी। इससे फसल की रंगत सुधरेगी और दाना मोटा होगा।
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सरसों और किन्नू को नुकसान: सरसों की फसल इस समय पकने की अवस्था में है। तेज हवा और बारिश से सरसों की फलियां गिर सकती हैं। वहीं, ओलावृष्टि किन्नू के बागानों के लिए किसी आपदा से कम नहीं है; ओले गिरने से फल पर दाग पड़ जाते हैं जिससे उसकी बाजार कीमत शून्य हो जाती है।
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ओलावृष्टि का डर: किसान संगठनों का कहना है कि अगर ओले गिरते हैं, तो रबी की 40% से 60% तक की फसल बर्बाद हो सकती है।
प्रशासनिक सतर्कता और आम जन के लिए सलाह
ऑरेंज अलर्ट को देखते हुए जिला प्रशासन ने अलर्ट जारी किया है। आपदा प्रबंधन टीमों को तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।
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स्वास्थ्य संबंधी सावधानी: अचानक तापमान गिरने और नमी बढ़ने से मौसमी बीमारियों (सर्दी-जुकाम, अस्थमा) का खतरा बढ़ गया है। डॉक्टरों ने बुजुर्गों और बच्चों को घर के अंदर रहने की सलाह दी है।
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यातायात सावधानी: बारिश और कोहरे के मेल से सड़कों पर फिसलन बढ़ सकती है। वाहन चालकों को हेडलाइट जलाकर और धीमी गति से चलने का परामर्श दिया गया है।
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बिजली विभाग: तेज हवाओं के कारण बिजली की लाइनों में फॉल्ट आने की संभावना रहती है, इसके लिए डिस्कॉम की टीमें सतर्क मोड पर हैं।
निष्कर्ष
श्रीगंगानगर के लिए आने वाले 24 घंटे काफी महत्वपूर्ण हैं। पश्चिमी विक्षोभ की तीव्रता यह तय करेगी कि यह बारिश मरुधरा के लिए ‘वरदान’ साबित होगी या ओलावृष्टि के रूप में ‘अभिशाप’। किसानों की निगाहें अब आसमान की ओर हैं, वे प्रार्थना कर रहे हैं कि केवल रिमझिम फुहारें पड़ें ताकि उनकी साल भर की मेहनत सुरक्षित रहे।