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श्रीगंगानगर: नशे की दलदल में एक और चिराग बुझा, ओवरडोज ने ली 25 वर्षीय युवक की जान

श्रीगंगानगर। सीमावर्ती जिले श्रीगंगानगर में नशे का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। पुलिस और प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे तमाम जागरूकता अभियानों और सख्ती के बावजूद, ‘सफेद जहर’ युवाओं की जिंदगी लील रहा है। ताजा मामला शहर के कोतवाली थाना क्षेत्र का है, जहाँ मात्र 25 वर्ष के एक युवक की नशे की ओवरडोज के कारण मौत हो गई। इस घटना ने एक बार फिर जिले में नशे की भयावह स्थिति और परिवारों के उजड़ते सपनों की तरफ ध्यान खींचा है।

घटना का पूरा विवरण

मृतक की पहचान अजय छाबड़ा (25) के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, शनिवार की रात अजय की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। परिजनों ने जब उसे अचेत और गंभीर हालत में देखा, तो उनके हाथ-पांव फूल गए। आनन-फानन में परिजन उसे लेकर जिला राजकीय अस्पताल के आपातकालीन वार्ड पहुंचे।

अस्पताल पहुँचने पर डॉक्टरों ने तुरंत उसका उपचार शुरू किया, लेकिन युवक के शरीर में हलचल न के बराबर थी। गहन जांच के बाद डॉक्टरों ने उसे ‘ब्रॉट डेड’ (अस्पताल लाने से पहले ही मृत) घोषित कर दिया। डॉक्टरों के अनुसार, प्राथमिक दृष्टि में मौत का कारण नशीले पदार्थ की अत्यधिक मात्रा (ओवरडोज) शरीर में जाना प्रतीत हो रहा है।

परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल

आज सुबह जब पुलिस की मौजूदगी में शव का पोस्टमार्टम किया गया, तो अस्पताल परिसर में गमगीन माहौल था। अजय की मौत की खबर सुनते ही उसके घर में कोहराम मच गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। एक जवान बेटे को खोने का गम पिता के चेहरों पर साफ देखा जा सकता था। स्थानीय लोगों का कहना है कि अजय एक होनहार युवक था, लेकिन वह कब और कैसे नशे के सौदागरों के जाल में फंस गया, इसका अंदाजा परिवार को समय रहते नहीं लग सका।

कोतवाली पुलिस की कार्रवाई

कोतवाली थाना पुलिस ने मर्ग दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शव का पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया गया है। विसरा रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि युवक ने किस विशिष्ट नशीले पदार्थ का सेवन किया था। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि युवक को नशा सप्लाई करने वाले ‘सप्लायर’ कौन थे और शहर में किन ठिकानों से उसे यह जहर उपलब्ध हुआ था।

श्रीगंगानगर में नशे की गंभीर स्थिति

श्रीगंगानगर जिला लंबे समय से नशे की तस्करी की समस्या से जूझ रहा है। पंजाब की सीमा से सटे होने के कारण यहाँ सिंथेटिक ड्रग्स (जैसे चिट्टा), नशीले कैप्सूल और इंजेक्शन की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

  1. सफेद जहर (चिट्टा) का बढ़ता प्रभाव: युवाओं में हेरोइन के मिलावटी रूप ‘चिट्टा’ का चलन तेजी से बढ़ा है। यह नशा न केवल महंगा है बल्कि शरीर के अंगों को बहुत कम समय में फेल कर देता है।

  2. अभियानों के बावजूद आपूर्ति: पुलिस अक्सर ‘ऑपरेशन फ्लश आउट’ जैसे अभियान चलाती है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि गलियों और मोहल्लों में छोटे तस्कर सक्रिय हैं जो युवाओं को टारगेट करते हैं।

  3. सामाजिक चिंता: अजय की मौत केवल एक व्यक्ति की मौत नहीं है, बल्कि यह उस समाज के लिए चेतावनी है जहाँ हर दूसरा परिवार अपने बच्चे को इस लत से बचाने के लिए डरा हुआ है।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

चिकित्सकों और मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि नशे की ओवरडोज होने पर व्यक्ति का श्वसन तंत्र (Respiratory System) धीमा हो जाता है, जिससे मस्तिष्क को ऑक्सीजन मिलना बंद हो जाती है। श्रीगंगानगर जैसे क्षेत्रों में जहाँ नशे की शुद्धता का कोई पैमाना नहीं है, तस्कर अक्सर अधिक लाभ कमाने के लिए ड्रग्स में खतरनाक रसायनों की मिलावट करते हैं, जो पहली या दूसरी बार के सेवन में ही घातक साबित हो सकते हैं।

निष्कर्ष और अपील

अजय छाबड़ा की मौत ने फिर से यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर कब तक श्रीगंगानगर की गलियां इसी तरह युवाओं की अर्थियों को देखती रहेंगी? पुलिस प्रशासन अपनी तरफ से कार्रवाई कर रहा है, लेकिन अब समय आ गया है कि समाज और अभिभावक भी सतर्क हों। यदि आपके आसपास कोई युवक संदिग्ध अवस्था में दिखता है या नशे की गिरफ्त में है, तो उसे अपराधी मानने के बजाय एक बीमार व्यक्ति समझकर तुरंत नशामुक्ति केंद्र या विशेषज्ञों की मदद लेनी चाहिए।

प्रशासन को भी चाहिए कि केवल नशेड़ियों पर नहीं, बल्कि उन ‘बड़ी मछलियों’ और तस्करों पर नकेल कसी जाए जो मौत का यह सामान खुलेआम बेच रहे हैं। अजय की मौत समाज के माथे पर एक और कलंक है, जिसे मिटाने के लिए सामूहिक प्रयासों की जरूरत है।

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