
श्रीगंगानगर: मंगलवार को जिला परिषद के सभागार में आयोजित साधारण सभा की बैठक किसी युद्ध के मैदान से कम नहीं रही। बैठक का एजेंडा तो विकास कार्यों की समीक्षा था, लेकिन यह सत्र पूरी तरह से अधिकारियों की कार्यशैली और ग्रामीण क्षेत्रों में व्याप्त बदहाली की भेंट चढ़ गया। जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए जन प्रतिनिधियों ने मनरेगा, सिंचाई पानी और बिजली की समस्याओं को लेकर सरकारी अफसरों को कटघरे में खड़ा कर दिया।
बंता सिंह का तीखा प्रहार: “कागजों में विकास, जमीन पर प्यास”
बैठक में हंगामे की शुरुआत उस वक्त हुई जब जोन नंबर तीन के सदस्य बंता सिंह ने क्षेत्र की समस्याओं का मुद्दा उठाया। उन्होंने अधिकारियों पर आरोप लगाया कि ग्रामीण इलाकों में पीने के पानी और सिंचाई के पानी का संकट गहराता जा रहा है, लेकिन विभाग केवल फाइलों में समाधान दिखा रहा है।
बंता सिंह ने कड़े लहजे में कहा, “जनता हमें वोट देकर भेजती है ताकि हम उनकी प्यास बुझा सकें, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही के कारण हम उन्हें जवाब देने की स्थिति में नहीं हैं।” उन्होंने प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि सात दिनों के भीतर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वे ग्रामीणों के साथ मिलकर कलेक्ट्रेट का घेराव करेंगे।
मनरेगा में भ्रष्टाचार और भुगतान का मुद्दा
बैठक में मनरेगा (MGNREGA) का मुद्दा भी प्रमुखता से छाया रहा। सदस्यों ने शिकायत की कि:
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भुगतान में देरी: कई गांवों में मजदूरों को महीनों से मजदूरी नहीं मिली है, जिससे गरीब परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
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फर्जी मस्टरोल: आरोप लगाया गया कि धरातल पर काम कम हो रहा है और कागजों में फर्जी हाजिरी भरकर बजट का बंदरबांट किया जा रहा है।
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नई स्वीकृतियां: नए विकास कार्यों की स्वीकृति देने में जानबूझकर देरी की जा रही है, जिससे विकास की गति धीमी पड़ गई है।
बिजली कटौती और कृषि संकट
श्रीगंगानगर एक कृषि प्रधान जिला है, ऐसे में बिजली की अघोषित कटौती पर भी जनप्रतिनिधियों ने गहरा रोष व्यक्त किया। सदस्यों ने कहा कि रबी की फसल के इस महत्वपूर्ण समय में किसानों को पर्याप्त बिजली नहीं मिल रही है। ट्रांसफार्मर जलने पर उन्हें बदलने में हफ्तों का समय लग रहा है, जिससे फसलें बर्बाद हो रही हैं। बिजली विभाग के अधीक्षण अभियंता को सदन में इन सवालों का संतोषजनक जवाब देते नहीं बना।
अधिकारियों को कड़ी फटकार और निर्देश
सदन की अध्यक्षता कर रहे जिला प्रमुख और जिला कलेक्टर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित विभागों के अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि:
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पेयजल आपूर्ति: जहां पाइपलाइन में समस्या है, वहां टैंकरों के माध्यम से तुरंत पानी पहुंचाया जाए।
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मनरेगा जांच: मनरेगा में भ्रष्टाचार की शिकायतों की जांच के लिए एक विशेष कमेटी गठित की जाएगी।
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जवाबदेही: जो अधिकारी बैठक में बिना तैयारी के आए थे या जिनके पास आंकड़ों का अभाव था, उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए।
निष्कर्ष: जनता की उम्मीदों का दबाव
आज की बैठक ने यह स्पष्ट कर दिया कि ग्रामीण क्षेत्रों में जन प्रतिनिधियों पर जनता का भारी दबाव है। श्रीगंगानगर जैसे संवेदनशील जिले में, जहां सिंचाई और पानी जीवन की मुख्य धारा हैं, वहां प्रशासन की जरा सी ढिलाई बड़े जनांदोलन का रूप ले सकती है। अब देखना यह होगा कि इस ‘गरमा-गरम’ बैठक के बाद धरातल पर क्या बदलाव आते हैं।