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श्रीगंगानगर जिला अस्पताल में हड़कंप: जांच के नाम पर अवैध वसूली के आरोपों से स्वास्थ्य विभाग की साख पर सवाल

श्रीगंगानगर। सरहदी जिले के सबसे बड़े राजकीय चिकित्सालय (जिला अस्पताल) से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने मानवता और सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आज, 9 फरवरी 2026 को अस्पताल परिसर में उस समय भारी हंगामा देखने को मिला जब कई मरीजों और उनके परिजनों ने अस्पताल के कुछ कर्मचारियों पर ‘जांच और इलाज’ के नाम पर अवैध वसूली करने के गंभीर आरोप लगाए।


निशुल्क सेवाओं के बदले ‘अतिरिक्त सुविधा शुल्क’ का खेल

राजस्थान सरकार द्वारा सरकारी अस्पतालों में अधिकांश जांचें और दवाइयां निशुल्क (Free) घोषित की गई हैं। इसके बावजूद, श्रीगंगानगर जिला अस्पताल के लैब और वार्डों से लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही थीं कि वहां तैनात कुछ निचले स्तर के कर्मचारी और संविदा कर्मी मरीजों से जल्दी रिपोर्ट देने या बेड उपलब्ध कराने के नाम पर 200 से 500 रुपये तक की अवैध मांग कर रहे हैं।

आज सुबह एक पीड़ित परिजन ने हिम्मत दिखाते हुए अस्पताल प्रशासन के समक्ष विरोध दर्ज कराया। परिजन का आरोप था कि एक्सरे और ब्लड टेस्ट की रिपोर्ट के लिए उससे ‘सुविधा शुल्क’ मांगा गया, जबकि नियमानुसार यह पूरी तरह मुफ्त है। देखते ही देखते अन्य मरीज भी एकत्र हो गए और अस्पताल के मुख्य द्वार पर नारेबाजी शुरू कर दी।

मरीजों की व्यथा: “मजबूरी का फायदा उठा रहे कर्मचारी”

अस्पताल में भर्ती मरीजों के तीमारदारों का कहना है कि दूर-दराज के गांवों से आने वाले गरीब लोग नियमों से अनभिज्ञ होते हैं। कर्मचारी इसी अज्ञानता का फायदा उठाते हैं। परिजनों ने बताया कि:

  • जांच मशीनों के खराब होने का बहाना बनाकर उन्हें परेशान किया जाता है।

  • पैसे देने पर वही जांच तुरंत कर दी जाती है।

  • वार्डों में सफाई और चादर बदलने जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए भी ‘टिप’ के नाम पर जबरन वसूली की जा रही है।

प्रशासनिक हरकत: जांच के आदेश और सख्त चेतावनी

मामले के तूल पकड़ते ही स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और अस्पताल अधीक्षक हरकत में आए। शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने तत्काल एक जांच कमेटी का गठन कर दिया है।

अस्पताल अधीक्षक ने मीडिया से बात करते हुए कहा:

“राजकीय सेवाओं में भ्रष्टाचार को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हमने सीसीटीवी फुटेज खंगालने और चिन्हित कर्मचारियों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्यवाही के निर्देश दिए हैं। यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो संविदा कर्मियों को तुरंत सेवामुक्त किया जाएगा और स्थाई कर्मियों के खिलाफ चार्जशीट जारी की जाएगी।”

भविष्य के लिए उठाए गए कदम

इस घटना के बाद अस्पताल प्रशासन ने भ्रष्टाचार को रोकने के लिए कुछ कड़े कदम उठाने का निर्णय लिया है:

  1. हेल्पलाइन नंबर: अस्पताल के प्रत्येक वार्ड और लैब के बाहर एक शिकायत नंबर चस्पा किया जाएगा।

  2. विजिलेंस टीम: अस्पताल परिसर में सादा वर्दी में गार्ड्स और अधिकारी तैनात रहेंगे जो संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखेंगे।

  3. जागरूकता बोर्ड: मरीजों को उनके अधिकारों और निशुल्क सेवाओं के बारे में बताने के लिए बड़े-बड़े सूचना बोर्ड लगाए जाएंगे।


निष्कर्ष

स्वास्थ्य सेवा को ईश्वर की सेवा माना जाता है, लेकिन कुछ भ्रष्ट तत्वों की वजह से पूरे विभाग की छवि धूमिल होती है। श्रीगंगानगर के जिला अस्पताल में हुई यह घटना प्रशासन के लिए एक वेक-अप कॉल है। अब देखना यह है कि जांच कमेटी कितनी जल्दी दोषियों को सजा दिला पाती है ताकि गरीब मरीजों का सरकारी तंत्र पर विश्वास बना रहे।

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