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श्रीगंगानगर: गेहूं खरीद का महाभियान शुरू, 52 केंद्रों पर 6 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य

श्रीगंगानगर। राजस्थान के ‘अन्न भंडार’ के रूप में विख्यात श्रीगंगानगर जिले में रबी विपणन सीजन 2026-27 के लिए गेहूं की सरकारी खरीद की तैयारियां परवान पर हैं। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने इस वर्ष जिले के किसानों की उपज को सुचारू रूप से खरीदने के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। इस बार न केवल खरीद के लक्ष्य को बढ़ाया गया है, बल्कि किसानों को मिलने वाले आर्थिक लाभ (बोनस) में भी वृद्धि की गई है, जिससे सीमावर्ती क्षेत्र के काश्तकारों में भारी उत्साह देखा जा रहा है।

खरीद का लक्ष्य और बुनियादी ढांचा

खाद्य विभाग ने इस सीजन के लिए श्रीगंगानगर जिले में 6 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। जिले की भौगोलिक स्थिति और उत्पादन क्षमता को देखते हुए प्रशासन ने पूरे जिले में 52 सरकारी खरीद केंद्र स्थापित किए हैं।

इन केंद्रों का चयन इस प्रकार किया गया है कि किसानों को अपनी उपज लेकर लंबी दूरी तय न करनी पड़े। मुख्य मंडियों के अलावा ग्राम सेवा सहकारी समितियों (GSS) और क्रय-विक्रय सहकारी समितियों (KVSS) के स्तर पर भी केंद्र बनाए गए हैं।

पंजीकरण प्रक्रिया और महत्वपूर्ण तिथियां

किसानों को अपनी फसल न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर बेचने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण करवाना अनिवार्य है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि:

  • पंजीकरण की शुरुआत: पंजीकरण पोर्टल खुल चुका है।

  • अंतिम तिथि: किसान 25 जून 2026 तक अपना पंजीकरण करवा सकते हैं।

  • आवश्यक दस्तावेज: पंजीकरण के लिए किसानों को जन आधार कार्ड, गिरदावरी (फसल का विवरण), बैंक पासबुक और मोबाइल नंबर की आवश्यकता होगी।

ई-मित्र केंद्रों या स्वयं के माध्यम से पंजीकरण कराने के बाद, किसानों को उनके मोबाइल पर एक संदेश (SMS) प्राप्त होगा, जिसमें उन्हें अपनी फसल मंडी लाने की निश्चित तारीख और समय (स्लॉट) दिया जाएगा। इससे मंडियों में अनावश्यक भीड़ और जाम की स्थिति से बचा जा सकेगा।

बोनस और एमएसपी: किसानों के लिए आर्थिक प्रोत्साहन

इस वर्ष गेहूं खरीद चर्चा का विषय बनी हुई है, जिसका मुख्य कारण सरकार द्वारा घोषित अतिरिक्त बोनस है। केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के ऊपर राज्य सरकार ने जो बोनस घोषित किया है, उससे किसानों को प्रति क्विंटल अच्छी खासी राशि मिलेगी।

विशेष लाभ: पिछले वर्षों की तुलना में इस बार भुगतान प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाया गया है। ‘प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण’ (DBT) के माध्यम से गेहूं की तुलाई के 48 से 72 घंटों के भीतर राशि सीधे किसान के बैंक खाते में जमा करने का लक्ष्य रखा गया है।

मंडियों में व्यवस्थाएं और चुनौतियां

जिला कलेक्टर और रसद विभाग के अधिकारियों ने निर्देश दिए हैं कि सभी 52 केंद्रों पर मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं। इनमें शामिल हैं:

  1. पेयजल और छाया: चिलचिलाती धूप को देखते हुए किसानों और मजदूरों के लिए ठंडे पानी और छायादार बैठने की व्यवस्था।

  2. बारदाना (बोले): गेहूं की पैकिंग के लिए पर्याप्त मात्रा में नए बारदाने की उपलब्धता सुनिश्चित करना।

  3. सफाई और छनाई: मंडियों में गेहूं की सफाई के लिए पर्याप्त पंखे और छरनों की व्यवस्था।

हालांकि, श्रीगंगानगर में मार्च की शुरुआत से ही तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। ऐसे में फसल के जल्दी पकने की संभावना है, जिससे मंडियों में आवक समय से पहले तेज हो सकती है। विभाग ने इस ‘अर्ली अराइवल’ (जल्द आवक) से निपटने के लिए भी आकस्मिक योजना तैयार की है।

किसानों के लिए संदेश

कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को सलाह दी है कि वे अपनी फसल को पूरी तरह सुखाकर और साफ करके ही मंडियों में लाएं, ताकि नमी (Moisture) के कारण उनकी उपज को रिजेक्ट न किया जाए। मानक नमी सीमा के भीतर होने पर ही सरकारी खरीद सुचारू रूप से हो सकेगी।

निष्कर्ष: श्रीगंगानगर की अर्थव्यवस्था पूरी तरह कृषि पर टिकी है। 6 लाख मीट्रिक टन का यह लक्ष्य न केवल सरकारी गोदामों को भरेगा, बल्कि जिले के हजारों किसान परिवारों की आर्थिक स्थिति को भी सुदृढ़ करेगा। 52 केंद्रों पर सुचारू प्रबंधन इस महाभियान की सफलता की कुंजी होगी।

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