
श्रीगंगानगर, 10 फरवरी 2026: श्रीगंगानगर जिले के सार्वजनिक परिवहन तंत्र के लिए आज एक बड़ी और सुखद खबर सामने आई है। राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम (RSRTC) के बेड़े में किए जा रहे बड़े विस्तार के तहत, श्रीगंगानगर डिपो को 7 नई रोडवेज बसें आवंटित की गई हैं। यह कदम न केवल शहर के यात्रियों के लिए राहत भरा है, बल्कि उन दूर-दराज के ग्रामीण और सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए भी मील का पत्थर साबित होगा जो लंबे समय से बेहतर परिवहन सुविधाओं की मांग कर रहे थे।
प्रदेशव्यापी बेड़े का विस्तार: श्रीगंगानगर को मिला हिस्सा
राजस्थान सरकार और रोडवेज प्रशासन ने प्रदेश भर में पुरानी हो चुकी बसों को बदलने और यात्रियों के बढ़ते दबाव को कम करने के लिए 445 नई बसें खरीदने का निर्णय लिया था। इसी योजना के पहले चरण के वितरण में श्रीगंगानगर डिपो को यह 7 नई बसें प्राप्त हुई हैं।
ये बसें अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस हैं। इनमें यात्रियों की सुरक्षा के लिए पैनिक बटन, बेहतर सस्पेंशन और आरामदायक सीटों का प्रावधान किया गया है। इंजन की बात करें तो ये बसें BS-VI मानकों पर आधारित हैं, जिससे प्रदूषण भी कम होगा—जो श्रीगंगानगर जैसे वर्तमान में प्रदूषण झेल रहे शहर के लिए एक अच्छी खबर है।
सीमावर्ती और ग्रामीण क्षेत्रों को मिलेगी प्राथमिकता
श्रीगंगानगर जिला अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण बहुत विस्तृत है। पाकिस्तान सीमा से सटे गांवों और दूर-दराज के कृषि क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए रोडवेज बसें ही आवागमन का सबसे मुख्य और सस्ता साधन हैं।
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पुराने रूटों का जीर्णोद्धार: नई बसें आने से उन रूटों पर बसों की संख्या बढ़ाई जाएगी जहाँ वर्तमान में बसें कंडम (पुरानी) होने के कारण अक्सर खराब हो जाती थीं।
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छात्रों और दैनिक यात्रियों को लाभ: शिक्षण संस्थानों और कार्यालयों के लिए आने-जाने वाले छात्रों और कर्मचारियों को अब समय पर बसें उपलब्ध हो सकेंगी।
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कनेक्टिविटी: अनूपगढ़, रायसिंहनगर, पदमपुर और सादुलशहर जैसे इलाकों को जिला मुख्यालय से जोड़ने वाले मार्गों पर फेरों की संख्या बढ़ने की संभावना है।
डिपो की कार्यक्षमता में होगा सुधार
श्रीगंगानगर डिपो पिछले काफी समय से बसों की कमी और पुरानी बसों के रखरखाव की समस्या से जूझ रहा था। कई बसें अपनी निर्धारित किलोमीटर की सीमा पूरी कर चुकी थीं, जिससे वे बार-बार बीच रास्ते में ही जवाब दे जाती थीं। इन 7 नई बसों के आने से:
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मेंटेनेंस का खर्च कम होगा: नई बसों के आने से पुरानी और खस्ताहाल बसों को बेड़े से बाहर किया जा सकेगा, जिससे मरम्मत पर होने वाला भारी खर्च बचेगा।
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राजस्व में वृद्धि: समय पर संचालन और बेहतर सुविधा मिलने से यात्री निजी बसों की तुलना में रोडवेज को प्राथमिकता देंगे, जिससे रोडवेज के राजस्व में बढ़ोतरी होगी।
कब से शुरू होगा संचालन?
रोडवेज प्रबंधन के अनुसार, बसों का आवंटन हो चुका है और वर्तमान में इनके पंजीकरण (Registration) और रूट निर्धारण की प्रक्रिया चल रही है। उम्मीद जताई जा रही है कि अगले एक सप्ताह के भीतर ये बसें सड़कों पर दौड़ती नजर आएंगी। स्थानीय विधायक और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा इन बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किए जाने की योजना है।
निष्कर्ष
परिवहन किसी भी जिले की अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा होता है। श्रीगंगानगर जैसे कृषि प्रधान और सीमावर्ती जिले के लिए 7 नई बसों का मिलना एक सकारात्मक शुरुआत है। हालांकि, जिले के आकार को देखते हुए यह संख्या कम लग सकती है, लेकिन यह भविष्य में होने वाले बड़े सुधारों की दिशा में एक ठोस कदम है।