
होली का त्योहार नजदीक आते ही राजस्थान के सीमावर्ती शहर श्रीगंगानगर के बाजारों में फागुनी बयार बहने लगी है। शहर के प्रमुख व्यापारिक केंद्रों जैसे गोल बाजार, पुरानी मंडी और मुख्य सड़कों पर सजी रंग-बिरंगी दुकानों ने उत्सव का माहौल बना दिया है। इस बार की होली पिछले सालों की तुलना में कुछ खास होने वाली है, क्योंकि बाजार में ‘टेक्नोलॉजी’ और ‘ट्रेडिशन’ का एक अनोखा संगम देखने को मिल रहा है।
बाजारों में छाई रौनक: ‘डिस्को गुलाल’ बना आकर्षण का केंद्र
इस साल होली के सामान में सबसे ज्यादा चर्चा ‘डिस्को गुलाल’ की हो रही है। युवाओं और बच्चों के बीच यह गुलाल पहली पसंद बना हुआ है। दुकानदारों के अनुसार, डिस्को गुलाल साधारण गुलाल से अलग है; इसमें एक विशेष प्रकार की चमक (glitter) और नियॉन शेड्स का इस्तेमाल किया गया है, जो रोशनी पड़ने पर चमकते हैं।
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खासियत: यह गुलाल त्वचा पर हल्का रहता है और शाम के समय होने वाली होली पार्टियों या ‘रेन डांस’ आयोजनों के लिए इसे विशेष रूप से तैयार किया गया है।
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डिमांड: युवाओं का कहना है कि सोशल मीडिया पर रील और फोटो शूट के लिए यह चमकीला गुलाल बेहतरीन विजुअल इफेक्ट देता है, इसलिए इसकी मांग आसमान छू रही है।
रंग बरसाने वाले पटाखे: बिना शोर का धमाका
पटाखों का क्रेज आमतौर पर दीपावली पर देखा जाता है, लेकिन इस बार होली के लिए विशेष ‘कलर स्मोक’ (Color Smoke) और ‘रंग बरसाने वाले पटाखों’ ने बाजार पर कब्जा कर लिया है।
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कलर फॉग गन: इन गन्स से हवा में रंगीन धुआं निकलता है, जो वातावरण को पूरी तरह गुलाबी, नीला या पीला बना देता है।
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रंगीन अनार: ये अनार जलने पर रोशनी के साथ-साथ सूखे रंगों की फुहार छोड़ते हैं, जो देखने में बेहद आकर्षक लगते हैं।
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पिचकारी बम: छोटे बच्चों के लिए ऐसे खिलौने आए हैं जो दिखने में पटाखे जैसे हैं लेकिन चलाने पर उनमें से अबीर और गुलाल की बौछार होती है।
हर्बल और ऑर्गेनिक रंगों की ओर बढ़ता रुझान
जहां एक तरफ फैंसी और डिस्को गुलाल की धूम है, वहीं श्रीगंगानगर के जागरूक नागरिक अपनी त्वचा और स्वास्थ्य को लेकर भी सतर्क दिख रहे हैं। बाजार में हर्बल और फूलों से बने रंगों का स्टॉक भी बड़े पैमाने पर उपलब्ध है।
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नेचुरल इंग्रेडिएंट्स: हल्दी, गुलाब, पलाश और गेंदे के फूलों से तैयार किए गए रंगों की मांग उन परिवारों में अधिक है जहां छोटे बच्चे या बुजुर्ग हैं।
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सुरक्षित होली: दुकानदार बताते हैं कि लोग अब पक्के केमिकल वाले रंगों के बजाय ऐसे गुलाल मांग रहे हैं जो एक ही बार धोने पर साफ हो जाएं और त्वचा पर जलन न करें।
दुकानदारों के खिले चेहरे
पिछले कुछ दिनों में ग्राहकों की बढ़ती संख्या को देखकर स्थानीय व्यापारियों के चेहरे खिले हुए हैं। गोल बाजार के एक प्रमुख विक्रेता ने बताया, “इस बार लोग केवल रंग ही नहीं, बल्कि होली एक्सेसरीज जैसे—मजेदार चश्मे, विग्स, और राजस्थानी पगड़ियों की भी खूब खरीदारी कर रहे हैं। बाजार में रौनक वापस लौटी है और उम्मीद है कि आने वाले दो-तीन दिनों में बिक्री और बढ़ेगी।”
सुरक्षा और सावधानी का संदेश
प्रशासन और स्थानीय सामाजिक संस्थाएं भी इस दौरान सक्रिय हैं। बाजारों में भीड़ को देखते हुए पुलिस की गश्त बढ़ाई गई है, वहीं लोगों से अपील की जा रही है कि वे ‘इको-फ्रेंडली’ होली मनाएं। पानी की बचत करने और केवल सुरक्षित रंगों का उपयोग करने का संदेश भी लाउडस्पीकरों के जरिए दिया जा रहा है।
कुल मिलाकर, इस बार श्रीगंगानगर की होली आधुनिकता के रंग में रंगी नजर आ रही है। डिस्को गुलाल की चमक और पारंपरिक पकवानों की खुशबू के बीच शहर एक यादगार उत्सव मनाने को तैयार है।
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