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श्रीगंगानगर केंद्रीय जेल में बुजुर्ग कैदी की मौत: जेल प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

श्रीगंगानगर की केंद्रीय जेल से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहाँ सजा काट रहे एक बुजुर्ग कैदी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। इस घटना ने एक बार फिर जेलों में कैदियों के स्वास्थ्य प्रबंधन और बुजुर्ग बंदियों को दी जाने वाली चिकित्सा सुविधाओं पर चर्चा छेड़ दी है। प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायिक जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

घटना का विवरण

जेल सूत्रों के अनुसार, मृतक बुजुर्ग कैदी पिछले काफी समय से केंद्रीय जेल में बंद था। बताया जा रहा है कि बुधवार तड़के अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई। उसे सीने में दर्द और सांस लेने में तकलीफ की शिकायत हुई थी। जेल के अंदर मौजूद मेडिकल सेल के कर्मियों ने उसे प्राथमिक उपचार दिया, लेकिन स्थिति में सुधार न होते देख तुरंत जिला अस्पताल (राजकीय जिला चिकित्सालय) ले जाने का निर्णय लिया गया।

अस्पताल पहुँचने पर डॉक्टरों ने गहन जांच की, लेकिन दुर्भाग्यवश उसे मृत घोषित (Brought Dead) कर दिया गया। अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड के चिकित्सकों के अनुसार, प्राथमिक दृष्टि में यह मामला हृदय गति रुकने (Cardiac Arrest) का लग रहा है, लेकिन आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।


पोस्टमार्टम और न्यायिक प्रक्रिया

चूंकि यह मामला न्यायिक अभिरक्षा (Judicial Custody) में मौत का है, इसलिए नियमों के अनुसार इसकी जांच काफी सख्त तरीके से की जा रही है:

  • मेडिकल बोर्ड: मृतक का पोस्टमार्टम मेडिकल बोर्ड के गठन द्वारा किया जाएगा ताकि निष्पक्ष रिपोर्ट सामने आ सके।

  • न्यायिक जांच: जेल में होने वाली किसी भी मौत की जांच मजिस्ट्रेट स्तर पर की जाती है। संबंधित मजिस्ट्रेट जेल का दौरा कर सकते हैं और उस समय ड्यूटी पर तैनात कर्मियों के बयान दर्ज कर सकते हैं।

  • वीडियो ग्राफी: पूरी पोस्टमार्टम प्रक्रिया की वीडियोग्राफी करवाई जा रही है ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार के विवाद या मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों से बचा जा सके।


जेलों में बुजुर्ग कैदियों की स्थिति

यह घटना जेलों में बंद उन कैदियों की स्थिति की ओर इशारा करती है जो उम्रदराज हैं और विभिन्न बीमारियों से जूझ रहे हैं। श्रीगंगानगर में वर्तमान में पड़ रही कड़ाके की ठंड और शीतलहर को भी इस मौत से जोड़कर देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अत्यधिक ठंड में बुजुर्गों को दिल का दौरा पड़ने का खतरा बढ़ जाता है, और जेलों की बैरक में ठंड से बचाव के संसाधन सीमित होते हैं।

परिजनों का पक्ष और आरोप

जैसे ही कैदी की मौत की सूचना उसके परिजनों को दी गई, जेल परिसर और अस्पताल के बाहर शोक और रोष का माहौल देखा गया। परिजनों का अक्सर यह आरोप रहता है कि जेल प्रशासन समय पर इलाज उपलब्ध कराने में कोताही बरतता है। हालांकि, जेल अधीक्षक ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि कैदी को हर संभव चिकित्सा सहायता प्रदान की गई थी।


आगे की कार्रवाई

फिलहाल, पुलिस ने मर्ग दर्ज कर ली है और शव को अस्पताल की मोर्चरी (Moarchary) में रखवाया गया है। पोस्टमार्टम की रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि मौत प्राकृतिक कारणों से हुई या इसमें किसी प्रकार की लापरवाही शामिल थी।

यह घटना जेल प्रशासन के लिए एक सबक है कि सर्दियों के इस मौसम में बीमार और बुजुर्ग कैदियों की निगरानी और स्वास्थ्य जांच को और अधिक सख्त बनाया जाए ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

©️ श्री गंगानगर न्यूज़ ©️