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श्रीगंगानगर: कृषि उद्योग एवं व्यापार मेले का भव्य समापन – आधुनिकता और परंपरा का संगम

श्रीगंगानगर। राजस्थान के अन्नकटोरा कहे जाने वाले जिले श्रीगंगानगर में आधुनिक कृषि तकनीकों और व्यापारिक नवाचारों के उत्सव ‘कृषि उद्योग एवं व्यापार मेला’ का आज शानदार समापन हो गया। पदमपुर बाईपास स्थित मेला ग्राउंड में आयोजित इस तीन दिवसीय आयोजन ने न केवल किसानों को नई दिशा दिखाई, बल्कि शहरवासियों के लिए मनोरंजन और ज्ञान का एक अनूठा केंद्र भी बना रहा। समापन के दिन किसानों और आम जनता की भारी भीड़ ने यह साबित कर दिया कि खेती की नई तकनीकें आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत हैं।


किसानों की भारी भीड़ और उत्साह

मेले के तीसरे और अंतिम दिन सुबह से ही जिले के दूर-दराज के गांवों, जैसे पदमपुर, रायसिंहनगर, सादुलशहर और सूरतगढ़ से किसानों के आने का सिलसिला शुरू हो गया था। इस बार मेले में न केवल बुजुर्ग अनुभवी किसान दिखे, बल्कि युवा किसानों की भागीदारी भी काफी अधिक रही। किसानों ने कृषि वैज्ञानिकों से संवाद कर अपनी फसलों में लगने वाले रोगों और मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की।

मुख्य आकर्षण: ‘हॉट एयर बैलून’ की उड़ान

इस वर्ष मेले का सबसे बड़ा और रोमांचक आकर्षण हॉट एयर बैलून रहा। श्रीगंगानगर के इतिहास में संभवतः यह पहली बार था जब किसी व्यापार मेले में इस तरह की गतिविधि आयोजित की गई। नीले आसमान में तैरते रंग-बिरंगे गुब्बारों ने न केवल बच्चों को आकर्षित किया, बल्कि बड़ों को भी रोमांचित कर दिया। शहरवासियों के लिए यह एक यादगार अनुभव था, जिसने मेले की रौनक में चार चांद लगा दिए। आसमान से मेले और शहर का नजारा देखने के लिए लोगों में होड़ मची रही।

प्रदर्शनी: आधुनिक यंत्र और तकनीक

मेले के मुख्य प्रांगण में आधुनिक कृषि यंत्रों की एक विस्तृत श्रृंखला प्रदर्शित की गई थी। यहाँ प्रदर्शित तकनीकी उपकरणों में मुख्य थे:

  • स्मार्ट कृषि यंत्र: कम लागत में अधिक उत्पादन देने वाले ट्रैक्टर, आधुनिक कंबाइन हार्वेस्टर और लेजर लैंड लेवलर के प्रति किसानों ने विशेष रुचि दिखाई।

  • सोलर ट्यूबवेल और सिंचाई प्रणाली: बिजली की बढ़ती लागत को देखते हुए सोलर पंप और ड्रिप इरिगेशन (बूंद-बूंद सिंचाई) के स्टॉल्स पर सबसे ज्यादा पूछताछ हुई। सरकारी सब्सिडी की जानकारी देने के लिए भी अलग से काउंटर लगाए गए थे।

  • डेयरी और पशुपालन: डेयरी उत्पादों के साथ-साथ उन्नत नस्ल के पशुओं के चारे और स्वास्थ्य से जुड़े उत्पादों की प्रदर्शनी ने पशुपालकों को काफी प्रभावित किया।


व्यापारिक दृष्टिकोण और स्थानीय अर्थव्यवस्था

यह मेला केवल कृषि तक सीमित नहीं था। उद्योग और व्यापार जगत की नामी कंपनियों ने भी यहाँ अपने स्टॉल लगाए थे। स्थानीय हस्तशिल्प से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल सेक्टर की भागीदारी ने इसे एक पूर्ण ‘व्यापार मेले’ का रूप दिया। व्यापारियों के अनुसार, इस तीन दिवसीय आयोजन में करोड़ों रुपये का कारोबार हुआ और कई बड़े व्यापारिक सौदे भी तय हुए।

सांस्कृतिक रंग और खान-पान

मेले के समापन समारोह में स्थानीय कलाकारों द्वारा राजस्थानी लोक गीतों और नृत्य की प्रस्तुतियां दी गईं। खान-पान के क्षेत्र में श्रीगंगानगर के स्थानीय व्यंजनों के साथ-साथ ‘मोटे अनाज’ (Millets) से बने उत्पादों को भी बढ़ावा दिया गया।

निष्कर्ष: भविष्य की राह

समारोह के समापन अवसर पर मुख्य अतिथियों ने प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया। वक्ताओं ने कहा कि ऐसे मेलों का आयोजन किसानों की आय दोगुनी करने और उन्हें बाजार से सीधे जोड़ने में मील का पत्थर साबित होता है।

मेला आयोजकों ने सभी प्रतिभागियों और आगंतुकों का आभार व्यक्त करते हुए अगले वर्ष इसे और भी भव्य स्तर पर आयोजित करने का संकल्प लिया। शाम ढलते-ढलते जब मेले की लाइटें बंद हुईं, तो किसान अपने साथ नई तकनीक का ज्ञान और भविष्य की खेती के प्रति एक नया उत्साह लेकर अपने घरों को लौटे।

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