
श्रीगंगानगर। राजस्थान के सीमावर्ती और कृषि प्रधान जिले श्रीगंगानगर में खेती-किसानी को नई दिशा देने के लिए कृषि विभाग ने कमर कस ली है। 4 अप्रैल को विभाग के उच्च अधिकारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें 6 अप्रैल से शुरू होने वाले विशेष जागरूकता अभियान ‘आपणों खेत–आपणी खाद’ की विस्तृत रूपरेखा तैयार की गई। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य न केवल मृदा स्वास्थ्य (Soil Health) का संरक्षण करना है, बल्कि आगामी खरीफ सीजन के लिए जिले के किसानों को आत्मनिर्भर बनाना भी है।
अभियान का मुख्य उद्देश्य: आत्मनिर्भर किसान, स्वस्थ धरा
श्रीगंगानगर की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से खेती पर टिकी है। अत्यधिक रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के प्रयोग से यहाँ की जमीन की उर्वरक शक्ति धीरे-धीरे कम हो रही है। इसी समस्या को देखते हुए ‘आपणों खेत–आपणी खाद’ अभियान की शुरुआत की जा रही है।
इस अभियान के तहत किसानों को निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं पर जागरूक किया जाएगा:
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मृदा परीक्षण (Soil Testing): किसानों को अपने खेत की मिट्टी की जांच करवाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा ताकि वे जान सकें कि उनकी जमीन को वास्तव में किस पोषक तत्व की कमी है।
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जैविक खाद का उपयोग: अभियान का नाम ही दर्शाता है कि किसानों को अपने खेत में ही खाद तैयार करने (जैसे- वर्मी कंपोस्ट, गोबर की खाद) के लिए प्रेरित किया जाएगा।
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संतुलित उर्वरक प्रयोग: नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश के असंतुलित उपयोग को कम कर लागत घटाने पर जोर दिया जाएगा।
खरीफ सीजन के लिए उर्वरक प्रबंधन
बैठक में आगामी खरीफ सीजन (नरमा-कपास, ग्वार और धान) को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। श्रीगंगानगर में अक्सर खाद की किल्लत की खबरें आती रहती हैं, जिससे किसानों को काफी परेशानी होती है। इसे रोकने के लिए प्रशासन ने पहले ही सुरक्षा चक्र तैयार कर लिया है।
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पर्याप्त स्टॉक का आश्वासन: कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि यूरिया और डीएपी (DAP) का पर्याप्त स्टॉक जिलों के गोदामों में सुनिश्चित किया जा रहा है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे सहकारी समितियों और निजी डीलरों के पास उपलब्ध खाद की नियमित निगरानी करें।
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कालाबाजारी पर रोक: विभाग ने चेतावनी दी है कि खाद की कालाबाजारी या टैगिंग (खाद के साथ अन्य उत्पाद जबरन बेचना) करने वाले डीलरों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और उनके लाइसेंस रद्द किए जाएंगे।
किसानों के लिए कृषि विभाग का ‘एक्शन प्लान’
6 अप्रैल से शुरू होने वाले इस अभियान के दौरान कृषि पर्यवेक्षक और सहायक कृषि अधिकारी गांव-गांव जाकर चौपालों का आयोजन करेंगे। इन चौपालों में किसानों को ‘सॉइल हेल्थ कार्ड’ के महत्व के बारे में बताया जाएगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि श्रीगंगानगर के कुछ हिस्सों में जमीन की लवणता (Salinity) बढ़ रही है। ‘आपणों खेत–आपणी खाद’ अभियान के जरिए किसानों को हरी खाद (जैसे ढैंचा) उगाने की सलाह दी जाएगी, जो मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा को प्राकृतिक रूप से बढ़ाती है और जमीन के स्वास्थ्य में सुधार करती है।
मौसम अलर्ट और सावधानी
अभियान की रूपरेखा तैयार करते समय मौसम के मिजाज को भी ध्यान में रखा गया है। 4 अप्रैल को जारी परामर्श में विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे आने वाले दिनों में संभावित हल्की धूल भरी आंधी और छिटपुट बारिश को देखते हुए अपनी कटी हुई फसलों (जैसे गेहूं और सरसों) को सुरक्षित स्थानों पर रखें। साथ ही, खरीफ की बिजाई के लिए खेतों की तैयारी करते समय नमी के संरक्षण पर ध्यान दें।
निष्कर्ष
‘आपणों खेत–आपणी खाद’ महज एक सरकारी अभियान नहीं, बल्कि श्रीगंगानगर की खेती को सस्टेनेबल (स्थायी) बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यदि किसान इस अभियान से जुड़कर मिट्टी के स्वास्थ्य पर ध्यान देते हैं और रसायनों पर निर्भरता कम करते हैं, तो न केवल उनकी खेती की लागत कम होगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी यह उपजाऊ जमीन सुरक्षित रह सकेगी।
प्रशासन की इस पहल का किसान संगठनों ने भी स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि इस बार खाद के वितरण में पारदर्शिता बनी रहेगी। अब सबकी नजरें 6 अप्रैल को इस अभियान के जमीनी क्रियान्वयन पर टिकी हैं।