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श्रीगंगानगर की हवा हुई ‘जहरीली’: AQI में भारी गिरावट, स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने जारी की चेतावनी

श्रीगंगानगर। राजस्थान के सीमावर्ती और कृषि प्रधान जिले श्रीगंगानगर में आज, 16 फरवरी, 2026 को वायु प्रदूषण के स्तर में चिंताजनक वृद्धि दर्ज की गई है। शहर और आस-पास के क्षेत्रों में सुबह से ही आसमान में धुंध (Smog) की एक हल्की चादर छाई रही, जो दोपहर तक बरकरार रही। स्थानीय वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के आंकड़ों के अनुसार, हवा की गुणवत्ता ‘अस्वास्थ्यकर’ (Unhealthy) श्रेणी में पहुँच गई है, जिससे आम जनजीवन और विशेषकर बीमार लोगों के लिए जोखिम बढ़ गया है।


प्रदूषण के मुख्य कारक: PM 2.5 और PM 10 की अधिकता

वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों के अनुसार, आज श्रीगंगानगर का औसत AQI 220 से 280 के बीच दर्ज किया गया। हवा में मुख्य प्रदूषक तत्व PM 2.5 और PM 10 (Particulate Matter) अपनी सुरक्षित सीमा से कई गुना ऊपर पाए गए।

  • PM 2.5 का खतरा: ये अत्यंत सूक्ष्म कण होते हैं जो सांस के जरिए सीधे फेफड़ों और रक्त प्रवाह में प्रवेश कर सकते हैं। इनकी अधिकता हृदय और श्वसन संबंधी रोगों का मुख्य कारण बनती है।

  • PM 10 की स्थिति: धूल और निर्माण कार्यों से निकलने वाले ये मोटे कण गले में खराश और आंखों में जलन पैदा कर रहे हैं।

गिरावट के प्रमुख कारण

विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरावट के पीछे कई स्थानीय और मौसमी कारण जिम्मेदार हैं:

  1. मौसमी बदलाव: वर्तमान में चल रहे पश्चिमी विक्षोभ के कारण हवा की गति धीमी हो गई है, जिससे प्रदूषक कण वातावरण में नीचे ही ठहरे हुए हैं (Inversion Layer)।

  2. कृषि गतिविधियां: जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में फसल अवशेषों के प्रबंधन और सूखी मिट्टी के उड़ने से धूल के कणों में इजाफा हुआ है।

  3. वाहनों का धुआं: शहर में बढ़ते यातायात और पुराने कमर्शियल वाहनों से निकलने वाला उत्सर्जन भी वायु प्रदूषण को बढ़ावा दे रहा है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह: सावधानी ही बचाव

बिगड़ती हवा को देखते हुए जिला स्वास्थ्य विभाग और निजी अस्पतालों के विशेषज्ञों ने ‘हेल्थ एडवाइजरी’ जारी की है। डॉ. आर.के. वर्मा (वरिष्ठ फिजिशियन) के अनुसार:

  • सांस के मरीज: अस्थमा और सीओपीडी (COPD) से पीड़ित मरीजों को घर के अंदर रहने की सलाह दी गई है। बाहर निकलने पर उन्हें सांस लेने में तकलीफ या सीने में जकड़न महसूस हो सकती है।

  • बुजुर्ग और बच्चे: इनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, इसलिए सुबह की सैर (Morning Walk) से फिलहाल परहेज करना चाहिए जब तक कि धूप न निकल आए।

  • मास्क का प्रयोग: यदि बाहर निकलना अनिवार्य हो, तो साधारण कपड़े के मास्क के बजाय N-95 मास्क का उपयोग करें, जो सूक्ष्म कणों को रोकने में सक्षम है।

AQI श्रेणियां और श्रीगंगानगर की स्थिति

आमतौर पर AQI को निम्नलिखित श्रेणियों में बांटा जाता है:

  • 0-50: अच्छी (Good)

  • 51-100: संतोषजनक (Satisfactory)

  • 101-200: मध्यम (Moderate)

  • 201-300: खराब/अस्वास्थ्यकर (Poor/Unhealthy) — वर्तमान स्थिति

  • 301-400: बहुत खराब (Very Poor)

निष्कर्ष और आगामी राहत

आगामी 17 और 18 फरवरी को मौसम विभाग ने बारिश की संभावना जताई है। यदि जिले में मध्यम बारिश होती है, तो यह ‘वॉश-आउट’ प्रभाव (Wash-out effect) पैदा करेगी, जिससे हवा में मौजूद धूल और प्रदूषक कण जमीन पर बैठ जाएंगे और वायु गुणवत्ता में सुधार होगा। तब तक, नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे बाहरी गतिविधियों को सीमित रखें और अपने आस-पास कूड़ा-करकट न जलाएं।

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