
राजस्थान में नशे के खिलाफ चल रहे अब तक के सबसे बड़े अभियानों में से एक ने श्रीगंगानगर जिले को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। बाड़मेर में राजस्थान पुलिस और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की संयुक्त कार्रवाई में 85 करोड़ रुपये मूल्य की सिंथेटिक ड्रग्स बनाने वाली फैक्ट्री का खुलासा हुआ है। इस पूरे अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट के तार श्रीगंगानगर के शातिर अपराधी मोताराम जाट से जुड़े होने के बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं।
बाड़मेर में कार्रवाई और श्रीगंगानगर का लिंक
हाल ही में बाड़मेर के एक सुदूर इलाके में चल रही अवैध ड्रग फैक्ट्री पर छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में कच्चा माल और तैयार ‘मेफेड्रोन’ (MD) ड्रग बरामद की गई थी। जांच के दौरान गिरफ्तार किए गए आरोपियों से पूछताछ में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ कि इस पूरे ऑपरेशन की प्लानिंग और फंडिंग का मुख्य सूत्रधार श्रीगंगानगर का निवासी मोताराम जाट है।
मोताराम जाट कोई नया नाम नहीं है; वह श्रीगंगानगर पुलिस की ‘मोस्ट वांटेड’ सूची में शामिल है और लंबे समय से मादक पदार्थों की तस्करी के कई मामलों में वांछित है।
मास्टरमाइंड मोताराम जाट: तस्करी का नया ‘किंगपिन’
जांच एजेंसियों के अनुसार, मोताराम जाट ने पंजाब और हरियाणा के सीमावर्ती क्षेत्रों में अपना मजबूत नेटवर्क बना रखा है।
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नेटवर्क का विस्तार: मोताराम केवल तस्करी ही नहीं कर रहा था, बल्कि अब वह ड्रग्स के ‘उत्पादन’ (Manufacturing) में भी उतर चुका था। उसने बाड़मेर जैसे रेगिस्तानी इलाकों को इसलिए चुना ताकि पुलिस की नजरों से बचकर फैक्ट्री का संचालन किया जा सके।
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तकनीकी शातिरता: वह पुलिस से बचने के लिए लगातार अपने ठिकाने और सिम कार्ड बदलता रहता है। सूत्रों के मुताबिक, वह हाई-टेक कम्युनिकेशन ऐप्स का इस्तेमाल करता है जिससे उसकी लोकेशन ट्रेस करना चुनौतीपूर्ण हो गया है।
श्रीगंगानगर में छापेमारी और पुलिस की सक्रियता
आज, 20 दिसंबर 2025 को श्रीगंगानगर पुलिस की विशेष टीमों (DST) और एसओजी (SOG) ने जिले के विभिन्न ठिकानों पर दबिश दी।
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पैतृक गांव और संदिग्ध ठिकाने: पुलिस ने मोताराम के पैतृक गांव और उसके करीबियों के घरों की तलाशी ली है।
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संपत्तियों की जांच: प्रशासन अब उसकी अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों का ब्योरा जुटा रहा है, ताकि उन पर ‘फ्रीजिंग’ की कार्रवाई की जा सके।
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सीमा पर चौकसी: श्रीगंगानगर के भारत-पाक सीमा से सटे होने के कारण, पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या इस ड्रग सिंडिकेट का कोई संबंध सीमा पार बैठे तस्करों या ड्रोन के जरिए होने वाली सप्लाई से तो नहीं है।
नशे की गिरफ्त में सीमावर्ती क्षेत्र
यह मामला श्रीगंगानगर जिले के लिए एक बड़ी चेतावनी है। पिछले कुछ वर्षों में, जिले में ‘चिट्टा’ (सिंथेटिक ड्रग्स) का चलन तेजी से बढ़ा है। बाड़मेर की फैक्ट्री से तैयार माल की एक बड़ी खेप श्रीगंगानगर और पंजाब के युवाओं तक पहुंचाई जानी थी। इस फैक्ट्री के पकड़े जाने से एक बड़े सप्लाई चेन को करारा झटका लगा है।
प्रशासनिक रुख
श्रीगंगानगर पुलिस अधीक्षक के अनुसार, “मोताराम जाट की गिरफ्तारी के लिए टीमें पड़ोसी राज्यों में भी भेजी गई हैं। ड्रग्स के खिलाफ हमारी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति है और जो कोई भी इस चेन का हिस्सा है, उसे बख्शा नहीं जाएगा।” पुलिस ने आम जनता से भी अपील की है कि यदि मोताराम या किसी भी संदिग्ध ड्रग गतिविधि की जानकारी मिले, तो तुरंत सूचित करें।