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श्रीगंगानगर का जल संकट: नहरी पानी की मांग को लेकर किसानों ने खोला मोर्चा, आंदोलन की आहट

श्रीगंगानगर, राजस्थान का वह इलाका है जिसका अस्तित्व ही नहरों पर टिका है। यहाँ की मिट्टी सोना तब उगलती है जब उसे हिमालय का पानी मिलता है। लेकिन 28 अप्रैल 2026 की तपती दोपहर में यहाँ के खेतों में हरियाली से ज्यादा ‘हक के पानी’ की गूंज सुनाई दे रही है। सिंचाई के पानी की कमी और रेगुलेशन में कटौती को लेकर जिले के किसान संगठन एक बार फिर लामबंद हो गए हैं, जिससे प्रशासन और सरकार के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।


नहरों का गणित और किसानों की चिंता

श्रीगंगानगर जिला मुख्य रूप से गंगनहर, आईजीएनपी (इंदिरा गांधी नहर परियोजना) और भाखड़ा नहर प्रणाली पर निर्भर है। वर्तमान में रबी की फसल की कटाई के बाद किसान खरीफ की फसलों, विशेषकर नरमा (कपास) और ग्वार की बिजाई की तैयारी में जुटे हैं।

किसानों का आरोप है कि नहर विभाग और सिंचाई विभाग द्वारा तय ‘रेगुलेशन’ के अनुसार उन्हें पानी नहीं मिल रहा है। सिंचाई की बारी (वारबंदी) में देरी और नहरों के टेल (अंतिम छोर) तक पानी न पहुँचने के कारण बुवाई का कीमती समय निकला जा रहा है। किसान नेताओं का कहना है कि यदि बिजाई के समय पानी नहीं मिला, तो पूरे साल की आर्थिकी चौपट हो जाएगी।

विभिन्न चक क्षेत्रों में किसान सभाओं का दौर

आज, 28 अप्रैल को जिले के विभिन्न चक (Chak) क्षेत्रों और ढाणियों में किसान संगठनों द्वारा सभाएं आयोजित की गईं। इन सभाओं का मुख्य केंद्र बिंदु गंगनहर और आईजीएनपी की नहरों में पानी की मात्रा बढ़वाना है।

  • सादुलशहर और श्रीकरणपुर क्षेत्र: यहाँ किसानों ने छोटी-छोटी बैठकें कर रणनीति बनाई है कि यदि पानी का डिस्चार्ज नहीं बढ़ाया गया, तो वे सिंचाई कार्यालयों का घेराव करेंगे।

  • टेल के किसानों का दर्द: नहरों के अंतिम छोर पर स्थित गांवों (जैसे कि हिंदुमलकोट और अनूपगढ़ के सीमावर्ती इलाके) के किसानों की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। यहाँ पानी की पहुंच नगण्य है, जिससे उनके खेतों की मिट्टी सूखकर दरक रही है।

पानी चोरी: एक बड़ा सिरदर्द

नहरी पानी के संकट के बीच ‘पानी चोरी’ एक कड़वा सच बनकर उभरा है। प्रभावशाली लोग और ऊपरी क्षेत्रों के किसान अक्सर साइफन लगाकर या मोघों (आउटलेट्स) के साथ छेड़छाड़ कर पानी चुरा लेते हैं, जिससे नीचे वाले किसानों का हक मारा जाता है।

इस मुद्दे पर प्रशासन अब सख्त रुख अख्तियार करने की तैयारी में है:

  1. पुलिस और सिंचाई विभाग की संयुक्त गश्त: जिला कलक्टर ने निर्देश दिए हैं कि नहरों पर रात के समय गश्त बढ़ाई जाए।

  2. ड्रोन से निगरानी: कुछ संवेदनशील संवेदनशील इलाकों में ड्रोन कैमरों के जरिए पानी चोरी पकड़ने पर विचार किया जा रहा है।

  3. कानूनी कार्रवाई: प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पानी चोरी करते पकड़े जाने पर न केवल जुर्माना लगाया जाएगा, बल्कि संबंधित व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की जाएगी।


किसान संगठनों की प्रमुख मांगें

विभिन्न किसान यूनियनों ने अपनी मांगों का एक चार्टर प्रशासन को सौंपा है, जिसमें निम्नलिखित बिंदु शामिल हैं:

  • गंगनहर में पंजाब से आ रहे पानी के हिस्से को पूरा दिलवाया जाए।

  • नहरों की सफाई और मरम्मत (Bandi) के नाम पर पानी की कटौती बंद हो।

  • प्रत्येक खाले (Watercourse) के अंतिम छोर तक पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।

  • बिजली की कमी के कारण जो किसान ट्यूबवेल पर निर्भर हैं, उन्हें कम से कम 6 घंटे निर्बाध बिजली मिले।

प्रशासनिक दृष्टिकोण और भविष्य की राह

सिंचाई विभाग के अधिकारियों का तर्क है कि पीछे से (मुख्य हेड से) ही पानी की आवक कम है, जिसके कारण रेगुलेशन में बदलाव करना पड़ा है। हालांकि, जिला प्रशासन किसानों के साथ संवाद बनाए हुए है ताकि स्थिति बिगड़ने न पाए।

निष्कर्ष श्रीगंगानगर के लिए नहरी पानी केवल खेती का साधन नहीं, बल्कि जीवन रेखा है। 28 अप्रैल की ये किसान सभाएं इस बात का संकेत हैं कि यदि जल्द ही जलापूर्ति में सुधार नहीं हुआ, तो जिले में बड़ा किसान आंदोलन भड़क सकता है। प्रशासन के लिए चुनौती यह है कि वह सीमित संसाधनों में पानी का न्यायपूर्ण वितरण कैसे सुनिश्चित करता है और पानी माफियाओं पर कितनी लगाम कस पाता है। आने वाले कुछ दिन श्रीगंगानगर की शांति और समृद्धि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होंगे।


विशेष टिप: किसान भाई नहरी पानी की बारी की सटीक जानकारी के लिए अपने क्षेत्र के पटवारी या सिंचाई विभाग के कंट्रोल रूम से संपर्क बनाए रखें।

©️ श्री गंगानगर न्यूज़ ©️