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श्रीगंगानगर का गौरव: कर्तव्य पथ पर चमके रावला के प्रगतिशील किसान दंपति

श्रीगंगानगर। गणतंत्र दिवस 2026 का अवसर श्रीगंगानगर जिले के लिए न केवल राष्ट्रीय पर्व का उल्लास लेकर आया, बल्कि यह गौरव और सम्मान का एक ऐतिहासिक क्षण भी बन गया। जिले के रावला क्षेत्र के छोटे से गांव 4 DOL के एक साधारण किसान परिवार ने देश की राजधानी दिल्ली के कर्तव्य पथ पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर पूरे राजस्थान का मान बढ़ाया है। प्रगतिशील किसान शिवप्रकाश भादू और उनकी धर्मपत्नी इंद्रा देवी को भारत सरकार ने गणतंत्र दिवस परेड में ‘विशेष अतिथि’ (Special Guest) के रूप में आमंत्रित किया था।

जैविक खेती की सफलता की गूंज

शिवप्रकाश भादू और इंद्रा देवी की यह यात्रा केवल दिल्ली तक की दूरी तय करना नहीं है, बल्कि यह सालों की कड़ी मेहनत और मिट्टी के प्रति उनके समर्पण का परिणाम है। जहां आज के दौर में रसायनिक खादों और कीटनाशकों का अंधाधुंध प्रयोग हो रहा है, वहीं इस दंपति ने जैविक खेती (Organic Farming) और प्रकृति आधारित कृषि पद्धतियों को अपनाकर एक मिसाल पेश की है।

कृषि मंत्रालय ने उन्हें उनकी उन नवीन तकनीकों के लिए चुना है, जिनसे न केवल उत्पादन बढ़ा है, बल्कि भूमि की उर्वरता भी सुरक्षित रही है। उन्होंने अपने खेतों में पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान का ऐसा मेल बिठाया कि आज उनके द्वारा उगाए गए उत्पाद शुद्धता की गारंटी माने जाते हैं।

कर्तव्य पथ पर सम्मान: एक सपना सच होने जैसा

26 जनवरी की सुबह, जब देश की सैन्य शक्ति और सांस्कृतिक विरासत कर्तव्य पथ पर प्रदर्शित की जा रही थी, तब विशिष्ट दर्शक दीर्घा में बैठे भादू दंपति के लिए यह भावुक कर देने वाला पल था। उन्हें केंद्र सरकार द्वारा कृषि मंत्रालय के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित करने के लिए विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था।

प्रधानमंत्री और अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में आयोजित इस भव्य समारोह का हिस्सा बनना किसी भी आम नागरिक के लिए एक बड़ा सपना होता है। शिवप्रकाश भादू ने इस अवसर पर खुशी जाहिर करते हुए कहा:

“यह सम्मान केवल हमारा नहीं, बल्कि श्रीगंगानगर के उन सभी मेहनतकश किसानों का है जो दिन-रात पसीना बहाकर देश का पेट भरते हैं। जैविक खेती अपनाकर हम न केवल ज़हर मुक्त भोजन दे रहे हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए ज़मीन भी बचा रहे हैं।”

इंद्रा देवी: महिला सशक्तिकरण की मिसाल

इस आमंत्रण की खास बात यह रही कि इसमें इंद्रा देवी की भूमिका को बराबर का सम्मान दिया गया। ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर महिलाओं का कृषि कार्य में योगदान पर्दे के पीछे रहता है, लेकिन इंद्रा देवी ने सक्रिय रूप से जैविक खाद तैयार करने, बीजों के संरक्षण और विपणन (Marketing) में अपने पति का साथ दिया है। उनकी उपस्थिति देश की करोड़ों ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा है कि मेहनत और सही दिशा हो तो मुकाम दिल्ली के ‘कर्तव्य पथ’ तक ले जा सकता है।

जिले में हर्ष का माहौल

जैसे ही यह समाचार श्रीगंगानगर और विशेषकर रावला क्षेत्र में पहुंचा, वहां जश्न का माहौल बन गया। ग्रामीणों ने इसे जिले की कृषि विरासत की जीत बताया। कृषि विभाग के अधिकारियों का मानना है कि इस तरह के राष्ट्रीय सम्मान से अन्य किसानों में भी जैविक खेती के प्रति उत्साह बढ़ेगा।

निष्कर्ष

शिवप्रकाश भादू और इंद्रा देवी की यह उपलब्धि यह संदेश देती है कि यदि संकल्प दृढ़ हो, तो गांव की पगडंडियों से शुरू हुआ सफर देश के सबसे प्रतिष्ठित मंच तक पहुँच सकता है। राजस्थान का यह ‘अन्नदाता’ अब देश के लिए एक रोल मॉडल बन चुका है।

©️ श्री गंगानगर न्यूज़ ©️