
श्रीगंगानगर। सरहदी जिले श्रीगंगानगर में आज 13 जनवरी 2026 को किसान आंदोलन की एक नई इबारत लिखी जा रही है। अपनी मांगों को लेकर हजारों की संख्या में किसान कलेक्ट्रेट के सामने डटे हुए हैं। कड़ाके की ठंड और शीतलहर के बावजूद किसानों का जोश कम नहीं हुआ है। ट्रालियों और तंबुओं के साथ शुरू हुआ यह अनिश्चितकालीन महापड़ाव अब एक बड़े जन-आंदोलन का रूप लेता जा रहा है।
प्रमुख मांगें: पानी और बीमा क्लेम का पेच
किसानों के इस महापड़ाव के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े मुद्दे हैं जो लंबे समय से अनसुलझे हैं:
-
सिंचाई के पानी का संकट: श्रीगंगानगर की अर्थव्यवस्था पूरी तरह नहरों पर टिकी है। किसानों का आरोप है कि रबी की फसलों (गेहूं, सरसों) के मुख्य सीजन में उन्हें सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है। टेल (अंतिम छोर) तक पानी न पहुँचने के कारण फसलें सूखने की कगार पर हैं। किसान नहरी पानी की बारी (Wari) में सुधार और सिंचाई के हिस्से का पूरा पानी मांग रहे हैं।
-
फसल बीमा क्लेम में देरी: पिछले सीजन में खराब हुई फसलों का बीमा क्लेम अभी तक कई किसानों के खातों में नहीं पहुँचा है। बीमा कंपनियों की मनमानी और प्रशासनिक उदासीनता के खिलाफ किसानों में भारी आक्रोश है। उनकी मांग है कि बकाया क्लेम का भुगतान तुरंत ब्याज सहित किया जाए।
कलेक्ट्रेट परिसर बना ‘मिनी गांव’
हजारों किसानों के जुटने से कलेक्ट्रेट रोड का नजारा पूरी तरह बदल गया है। किसानों ने अपनी ट्रैक्टर-ट्रालियों को ही अपना आशियाना बना लिया है। सड़क के किनारे लंगर चल रहे हैं और चूल्हे सुलग रहे हैं। किसान नेताओं का कहना है कि यह लड़ाई आर-पार की है; वे राशन-पानी साथ लेकर आए हैं और मांगे पूरी होने तक घर वापस नहीं लौटेंगे।
“हम सीमा के पहरेदार भी हैं और देश के अन्नदाता भी। अगर प्रशासन हमारे हक का पानी और बीमा क्लेम नहीं दे सकता, तो हम यहीं सर्दी में रातें काटने को तैयार हैं।” — एक प्रदर्शनकारी किसान नेता
प्रशासनिक सतर्कता और सुरक्षा के इंतजाम
भारी भीड़ और संवेदनशीलता को देखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास के क्षेत्रों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। आरएसी (RAC) की टुकड़ियां भी बुलाई गई हैं। पुलिस अधीक्षक स्वयं स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं ताकि शांति व्यवस्था बनी रहे। प्रदर्शन के कारण कलेक्ट्रेट की ओर जाने वाले कई रास्तों को डायवर्ट किया गया है, जिससे आम जनता को भी आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
वार्ता का दौर और गतिरोध
जिला कलेक्टर और सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ किसान संगठनों की अब तक कई दौर की वार्ता हो चुकी है, लेकिन अभी तक कोई ठोस सहमति नहीं बन पाई है। प्रशासन का तर्क है कि ऊपर से ही पानी की आवक कम है, जबकि किसान इसे कुप्रबंधन बता रहे हैं।
आगे क्या?
जैसे-जैसे दिन ढल रहा है, आस-पास के गांवों से और अधिक किसानों के पहुंचने की संभावना है। यदि आज शाम तक सरकार की ओर से कोई सकारात्मक संदेश नहीं आता है, तो किसान संगठन आंदोलन को और उग्र करने की चेतावनी दे चुके हैं, जिसमें नेशनल हाईवे जाम करना भी शामिल हो सकता है।
श्रीगंगानगर की सर्द रातों में कलेक्ट्रेट के बाहर जलते अलाव और गूंजते नारे इस बात के गवाह हैं कि अन्नदाता अब रुकने वाला नहीं है।