
श्रीगंगानगर। कृषि प्रधान जिले श्रीगंगानगर और इसके प्रमुख व्यावसायिक केंद्र सूरतगढ़ की कृषि उपज मंडियों में इन दिनों रबी सीजन की फसलों की आवक और खरीद-फरोख्त का दौर पूरे शबाब पर है। भीषण गर्मी और तेज धूप के बावजूद अन्नदाता अपनी महीनों की मेहनत को समेटकर मंडियों में पहुंच रहा है। आज की ताजा मंडी रिपोर्ट के अनुसार, मंडियों में जौ (Barley) सहित अन्य रबी फसलों की आवक सामान्य और स्थिर बनी हुई है। बाजार में मांग और आपूर्ति के संतुलन के बीच फसलों के दाम किसानों को संबल दे रहे हैं, वहीं प्रशासनिक स्तर पर भी खरीद और उठान व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
मंडियों में जौ (Barley) की आवक सामान्य, भाव में स्थिरता
श्रीगंगानगर और सूरतगढ़ की अनाज मंडियों में आज के व्यापारिक सत्र के दौरान जौ की आवक में स्थिरता देखी गई। इलाके के प्रगतिशील किसानों द्वारा लाई जा रही जौ की गुणवत्ता इस बार काफी अच्छी है, जिसके कारण व्यापारियों और स्थानीय मिल मालिकों में खरीदारी को लेकर अच्छा उत्साह है।
आज की मंडी समीक्षा के अनुसार, व्यापारिक सत्र में जौ का हाजिर भाव ₹2,370 प्रति क्विंटल के आसपास दर्ज किया गया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार जौ की वैश्विक और घरेलू मांग मजबूत होने के कारण इसके दामों में बहुत ज्यादा गिरावट की संभावना नहीं है। ₹2,370 का यह स्तर किसानों के लिए लागत के मुकाबले एक संतोषजनक और लाभकारी मूल्य साबित हो रहा है, जिससे मंडी पहुंचे किसानों के चेहरों पर राहत साफ देखी जा सकती है।
गेहूं की सरकारी खरीद और उठान पर विशेष ध्यान
जौ के साथ-साथ रबी की मुख्य फसल गेहूं की आवक भी मंडियों में समानांतर रूप से चल रही है। न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं की सरकारी खरीद को सुचारू रूप से चलाने के लिए जिला प्रशासन बेहद गंभीर है। इस समय सबसे बड़ी चुनौती मंडियों में आने वाले गेहूं की तुलाई और उसके बाद गोदामों तक उसके उठान (Transportation) की है, ताकि मंडियों में अनावश्यक जाम न लगे और नई आने वाली फसल के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध रहे।
इसी सिलसिले में कृषि विभाग के उच्च अधिकारी, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की टीमें और मंडी समिति के पदाधिकारी लगातार श्रीगंगानगर और सूरतगढ़ की मंडियों का औचक निरीक्षण कर रहे हैं। निरीक्षण के दौरान अधिकारी सीधे किसानों, हम्मालों (मजदूरों) और आढ़तियों (व्यापारियों) से संवाद कर रहे हैं ताकि जमीनी स्तर की समस्याओं को तुरंत दूर किया जा सके।
किसानों की सुविधा के लिए किए गए विशेष प्रबंध
भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों को देखते हुए मंडी समितियों ने किसान भाइयों की सुविधा और स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। कृषि अधिकारियों ने निरीक्षण के दौरान मंडी परिसरों में निम्नलिखित व्यवस्थाओं को अनिवार्य रूप से लागू करवाया है:
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पेयजल और छाया की व्यवस्था: मंडियों के प्रत्येक शेड और ब्लॉक में ठंडे और साफ पीने के पानी के प्याऊ चालू रखे गए हैं। किसानों और ट्रैक्टर-ट्रॉली चालकों के बैठने के लिए छायादार स्थानों की व्यवस्था की गई है।
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पारदर्शी तुलाई: बारदाने (बोले) की उपलब्धता और धर्मकांटों व इलेक्ट्रॉनिक तौल कांटों की शुद्धता की नियमित जांच की जा रही है ताकि किसानों को उनकी उपज का पूरा वजन मिले।
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त्वरित भुगतान (Online Payment): सरकारी खरीद के तहत बेचे गए गेहूं का भुगतान सीधे और तय समय सीमा के भीतर किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर करने की प्रक्रिया की सख्त निगरानी की जा रही है।
कृषि अधिकारियों का संदेश: बेफिक्र होकर आएं किसान
निरीक्षण के दौरान कृषि अधिकारियों ने आढ़तियों और खरीद एजेंसियों (जैसे FCI और तिलक राज संघ) को कड़े निर्देश दिए हैं कि गेहूं की ढेरी लगते ही उसकी सैंपलिंग और तुलाई की प्रक्रिया में बिल्कुल भी देरी न की जाए। यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई गई, तो संबंधित एजेंसी या आढ़ती के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारियों ने किसानों से भी अपील की है कि वे अपनी फसल को अच्छी तरह से सुखाकर और साफ करके ही मंडी में लाएं, ताकि उन्हें अपनी उपज का अधिकतम मूल्य मिल सके और नमी (Moisture) के कारण सरकारी खरीद में किसी तरह की तकनीकी अड़चन न आए। प्रशासन का पूरा ध्यान इस बात पर है कि तड़पती धूप में अपनी फसल लेकर आने वाले किसी भी किसान को मंडी परिसर में एक घंटे भी अतिरिक्त परेशान न होना पड़े।