
राजस्थान के ‘अन्न कटोरे’ के रूप में विख्यात श्रीगंगानगर और सूरतगढ़ क्षेत्र के किसानों के लिए रबी सीजन की सबसे बड़ी और सुखद खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने कृषि और कृषक कल्याण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए गेहूं की सरकारी खरीद पर 150 रुपये प्रति क्विंटल अतिरिक्त बोनस देने की घोषणा की है। इस फैसले के बाद, अब गेहूं का प्रभावी समर्थन मूल्य बढ़कर 2735 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है।
28 फरवरी 2026 को जारी इस अधिसूचना ने जिले के लाखों किसानों के चेहरे पर मुस्कान ला दी है, जो पिछले कुछ समय से लागत बढ़ने और अनिश्चित मौसम के कारण चिंतित थे।
नया मूल्य गणित: एमएसपी और बोनस का संगम
केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में राज्य सरकार के बोनस को जोड़ने के बाद यह नई दर प्रभावी हुई है।
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केंद्र सरकार का एमएसपी: 2585 रुपये प्रति क्विंटल
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राज्य सरकार का अतिरिक्त बोनस: 150 रुपये प्रति क्विंटल
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कुल प्रभावी खरीद दर: 2735 रुपये प्रति क्विंटल
यह मूल्य वृद्धि न केवल किसानों की आय में इजाफा करेगी, बल्कि खुले बाजार (Open Market) में भी कीमतों को स्थिर रखने में मदद करेगी। जानकारों का मानना है कि इस आकर्षक दर के कारण किसान निजी व्यापारियों के बजाय सरकारी केंद्रों पर फसल बेचना अधिक पसंद करेंगे।
10 मार्च से शुरू होगी सरकारी खरीद: प्रशासन की तैयारियां
श्रीगंगानगर और सूरतगढ़ की अनाज मंडियों में 10 मार्च 2026 से खरीद प्रक्रिया विधिवत शुरू हो जाएगी। इस बार फसल की बम्पर पैदावार की उम्मीद को देखते हुए मंडी प्रशासन और भारतीय खाद्य निगम (FCI) ने युद्ध स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं:
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बारदाने की उपलब्धता: गेहूं भरने के लिए जूट की बोरियों (बारदाने) की कोई कमी न हो, इसके लिए अग्रिम स्टॉक मंगवा लिया गया है। प्रशासन ने करीब 50 लाख से अधिक बोरियों का प्रबंध किया है।
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तौल कांटों का सत्यापन: खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सभी धर्मकांटों और इलेक्ट्रॉनिक तौल मशीनों का सत्यापन किया जा रहा है, ताकि किसानों को उनके पसीने की एक-एक बूंद का सही मोल मिल सके।
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पंजीकरण और गिरदावरी: किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए ‘राज-सहकार’ पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण कराना अनिवार्य है। इसके लिए गिरदावरी (फसल का रिकॉर्ड) की प्रक्रिया को भी सरल बनाया गया है।
सूरतगढ़ और श्रीगंगानगर की मंडियों में विशेष व्यवस्था
चूंकि श्रीगंगानगर और सूरतगढ़ की मंडियां एशिया की बड़ी मंडियों में शुमार हैं, इसलिए यहाँ भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं:
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छाया और पानी: मार्च के अंत तक गर्मी बढ़ने की संभावना को देखते हुए मंडियों में किसानों के लिए ठंडे पानी और बैठने के लिए शेड की मरम्मत की गई है।
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पेमेंट सिस्टम: सरकार ने इस बार दावा किया है कि खरीद के 48 से 72 घंटों के भीतर भुगतान सीधे किसान के बैंक खाते (DBT) में कर दिया जाएगा। इससे किसानों को अगली फसल की तैयारी के लिए नकदी की समस्या नहीं होगी।
किसानों और विशेषज्ञों की राय
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि 2735 रुपये का भाव इस सीजन के लिए बहुत प्रतिस्पर्धी है। सूरतगढ़ के प्रगतिशील किसानों का कहना है कि डीजल, खाद और बीज के बढ़ते दामों के बीच 150 रुपये का बोनस एक बड़ी राहत है। इससे किसानों की क्रय शक्ति बढ़ेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
“राज्य सरकार का यह फैसला किसानों को आर्थिक संबल प्रदान करेगा। हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि 10 मार्च को जब किसान मंडी आए, तो उसे किसी भी प्रकार की असुविधा न हो और उसकी उपज का भुगतान समय पर मिले।” – मंडी सचिव, श्रीगंगानगर
सावधानी: किसानों के लिए सलाह
प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे अपनी गेहूं की फसल को अच्छी तरह सुखाकर और साफ करके ही मंडी लाएं। गेहूं में नमी (Moisture) की मात्रा निर्धारित मानकों (12% से कम) के अनुसार होनी चाहिए, ताकि खरीद में कोई तकनीकी अड़चन न आए।
निष्कर्ष
गेहूं की नई दरें और बोनस श्रीगंगानगर जिले की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था के लिए एक ‘बूस्टर डोज’ की तरह है। 10 मार्च से शुरू होने वाला यह ‘पीला सोना’ (गेहूं) का महाकुंभ न केवल किसानों के घरों में समृद्धि लाएगा, बल्कि मंडियों में भी रौनक लौटाएगा।