
मरुधरा में सूर्यदेव के तीखे तेवर
राजस्थान का सीमावर्ती जिला श्रीगंगानगर इस सप्ताह भीषण गर्मी और जानलेवा लू (Heatwave) की चपेट में है। भारत-पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय सीमा से सटे इस पूरे क्षेत्र में आसमान से आग के अंगारे बरस रहे हैं। सूरज की तपिश और थार के मरुस्थल से उठने वाली गर्म हवाओं (लू) ने मिलकर इस पूरे इलाके को मानो एक सुलगती हुई भट्टी में तब्दील कर दिया है। इस सप्ताह तापमान अपने रिकॉर्ड स्तर को छू चुका है, जिसके कारण आम जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त और बेपटरी हो गया है। सुबह सूरज उगने के चंद घंटों के भीतर ही गर्म हवाएं थपेड़े मारने लगती हैं, जिससे लोगों का घरों से बाहर निकलना दूभर हो गया है।
दोपहर में थम रही हैं शहर की धड़कनें
भीषण गर्मी का सबसे बड़ा असर श्रीगंगानगर के बाजारों और सड़कों पर देखने को मिल रहा है। दोपहर 11 बजे से लेकर शाम 5 बजे तक शहर की मुख्य सड़कें और व्यस्त रहने वाले बाजार पूरी तरह से सूने नजर आते हैं। ऐसा लगता है मानो शहर में अघोषित ‘कर्फ्यू’ लग गया हो। अत्यधिक तापमान के कारण दोपहिया वाहन चालकों का सड़कों पर चलना नामुमकिन सा हो गया है, क्योंकि हवा इतनी गर्म है कि वह त्वचा को झुलसा रही है। स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि दोपहर के समय ग्राहकों की आवाजाही बिल्कुल शून्य हो जाती है, जिससे व्यापार पर भी बेहद विपरीत असर पड़ा है। लोग केवल बहुत जरूरी या आपातकालीन स्थिति होने पर ही पूरी तरह से चेहरा और शरीर ढककर बाहर निकल रहे हैं।
मौसम विभाग का ‘रेड अलर्ट’ और गाइडलाइन
लगातार बढ़ रहे पारे और जानलेवा सूखी गर्मी को देखते हुए मौसम विज्ञान केंद्र ने श्रीगंगानगर और आसपास के सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए लू (Heatwave) का गंभीर अलर्ट जारी किया है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, आने वाले कुछ दिनों तक इस स्थिति से राहत मिलने की कोई उम्मीद नहीं है। मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन ने आम जनता के लिए विशेष स्वास्थ्य एडवायजरी जारी की है:
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दोपहर में बाहर निकलने से बचें: सुबह 11 से शाम 4 बजे के बीच, जब सूरज की किरणें और लू का प्रभाव सबसे तीखा होता है, तब सीधे धूप के संपर्क में आने से बचें।
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हाइड्रेशन है जरूरी: प्यास न लगने पर भी लगातार पानी, ओआरएस (ORS) का घोल, नींबू पानी, छाछ और लस्सी जैसे तरल पदार्थों का सेवन करते रहें।
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सूती और हल्के कपड़े पहनें: बाहर निकलते समय ढीले, हल्के रंग के सूती कपड़े पहनें और सिर को टोपी, अंगोछे या छाते से जरूर ढकें।
अस्पतालों में बढ़े मरीज, पानी-बिजली की किल्लत
इस जानलेवा गर्मी का सीधा असर आम जनता के स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं पर पड़ रहा है। श्रीगंगानगर के राजकीय और निजी अस्पतालों के आपातकालीन वार्डों में उल्टी, दस्त, तेज बुखार, चक्कर आना और डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी) के मरीजों की संख्या में अचानक भारी उछाल आया है। डॉक्टरों ने लोगों को हीट स्ट्रोक (लू लगना) के प्रति बेहद सतर्क रहने की चेतावनी दी है।
इसके साथ ही, भीषण गर्मी के कारण बिजली और पानी की खपत अपने चरम पर पहुंच गई है। अत्यधिक लोड के चलते कई इलाकों में ट्रांसफार्मर फुंकने और अघोषित बिजली कटौती की समस्याएं सामने आ रही हैं, जिसने कूलर और एसी के भरोसे बैठे नागरिकों की दिक्कतों को दोगुना कर दिया है। सीमावर्ती ग्रामीण इलाकों में नहरों में पानी की उपलब्धता और पेयजल आपूर्ति को सुचारू बनाए रखना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) की अपील: “लू को हल्के में न लें, यह जानलेवा हो सकती है। अगर किसी को अचानक तेज बुखार, सिरदर्द या चक्कर आने की शिकायत हो, तो उसे तुरंत ठंडे स्थान पर ले जाएं और नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें। बच्चों और बुजुर्गों का इस मौसम में विशेष ख्याल रखने की आवश्यकता है।”
प्रकृति के इस उग्र रूप के सामने फिलहाल पूरा श्रीगंगानगर बेबस नजर आ रहा है। अब जिलावासियों को केवल आसमान में बादलों की आवाजाही और मानसून पूर्व की बारिश (Pre-Monsoon Rains) का इंतजार है, जो तपती धरती को शांत कर उन्हें इस असहनीय प्रकोप से थोड़ी राहत दिला सके।