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श्रीगंगानगर एनडीपीएस कोर्ट का कड़ा फैसला: स्मैक तस्करी के दोषी को 2 वर्ष का कठोर कारावास

श्रीगंगानगर। सीमावर्ती जिला श्रीगंगानगर, जो लंबे समय से नशे के खिलाफ एक निर्णायक जंग लड़ रहा है, वहां की न्यायपालिका ने नशा तस्करों को कड़ा संदेश दिया है। स्थानीय विशिष्ट न्यायालय (NDPS प्रकरण) ने स्मैक तस्करी के एक पुराने मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए अभियुक्त को जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया है। न्यायाधीश अजयकुमार भोजक ने मामले की गंभीरता और समाज पर पड़ने वाले इसके नकारात्मक प्रभाव को देखते हुए अभियुक्त को कठोर दंड से दंडित किया है।

क्या था पूरा मामला? (2017 की घटना)

यह कानूनी लड़ाई साल 2017 में शुरू हुई थी। पुलिस को मुखबिर के जरिए सूचना मिली थी कि क्षेत्र में नशीले पदार्थों की अवैध सप्लाई की जा रही है। पुलिस टीम ने जाल बिछाकर तत्परता से कार्रवाई की और अभियुक्त ओम प्रकाश विश्नोई को धर दबोचा। तलाशी के दौरान पुलिस ने अभियुक्त के कब्जे से 60 ग्राम स्मैक बरामद की थी।

स्मैक, जिसे ‘हेरोइन’ का एक अशुद्ध रूप माना जाता है, युवाओं के बीच सबसे घातक नशों में से एक है। इतनी मात्रा में स्मैक का मिलना इस बात का स्पष्ट संकेत था कि अभियुक्त केवल स्वयं सेवन नहीं कर रहा था, बल्कि वह इसकी तस्करी और बिक्री में भी संलिप्त था। पुलिस ने तुरंत एनडीपीएस एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।

अदालती कार्यवाही और सजा का निर्धारण

पिछले सात वर्षों से यह मामला अदालत में विचाराधीन था। अभियोजन पक्ष (सरकारी वकील) ने कोर्ट के समक्ष गवाहों और बरामदगी के ठोस साक्ष्य पेश किए। पुलिस द्वारा की गई जब्ती की प्रक्रिया और एफएसएल (FSL) रिपोर्ट ने यह साबित कर दिया कि बरामद पदार्थ उच्च श्रेणी का मादक द्रव्य था।

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अपनी दलीलें दीं, लेकिन न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों को पर्याप्त माना। न्यायाधीश अजयकुमार भोजक ने फैसला सुनाते हुए कहा कि नशा तस्करी एक ऐसा अपराध है जो आने वाली पीढ़ियों को बर्बाद कर रहा है। अदालत ने अभियुक्त ओम प्रकाश विश्नोई को दोषी करार देते हुए निम्नलिखित सजा सुनाई:

  • 2 वर्ष का कठोर कारावास: अभियुक्त को दो साल तक जेल में कठिन श्रम के साथ सजा काटनी होगी।

  • 20,000 रुपये का जुर्माना: सजा के साथ आर्थिक दंड भी लगाया गया है। जुर्माना राशि जमा न करने की स्थिति में अभियुक्त को अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।


समाज पर नशे का प्रभाव और सख्त सजा की आवश्यकता

श्रीगंगानगर जिला पंजाब और पाकिस्तान की सीमा से सटे होने के कारण नशा तस्करों के लिए एक संवेदनशील इलाका रहा है। ‘चिट्टा’ और ‘स्मैक’ जैसे सिंथेटिक नशों ने यहां के सैकड़ों परिवारों को उजाड़ दिया है। ऐसे में न्यायालय का यह फैसला उन लोगों के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो अवैध लाभ के लिए समाज में जहर घोलने का काम कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि नशा तस्करी के मामलों में सजा की दर (Conviction Rate) बढ़ने से अपराधियों में कानून का भय पैदा होता है। 60 ग्राम स्मैक सुनने में छोटी मात्रा लग सकती है, लेकिन बाजार में इसकी कीमत और इसकी लत से बर्बाद होने वाले जीवन की कोई कीमत नहीं लगाई जा सकती।

पुलिस और प्रशासन की सक्रियता

इस फैसले के बाद स्थानीय पुलिस प्रशासन ने भी संतोष व्यक्त किया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि “ऑपरेशन फ्लश आउट” और नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अन्य अभियानों के तहत तस्करों को पकड़ा जा रहा है। कोर्ट द्वारा दी जा रही ये सजाएं पुलिस के मनोबल को बढ़ाती हैं और जनता का कानून पर विश्वास मजबूत करती हैं।

निष्कर्ष

ओम प्रकाश विश्नोई को मिली यह सजा केवल एक अपराधी को मिला दंड नहीं है, बल्कि उन सभी युवाओं के लिए एक सबक है जो नशे के कारोबार के जाल में फंस रहे हैं। समाज के प्रबुद्ध नागरिकों ने भी इस फैसले का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि श्रीगंगानगर जल्द ही ‘नशा मुक्त’ जिला बनने की दिशा में अग्रसर होगा।

अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि अपराध चाहे कितना भी पुराना क्यों न हो (2017 का मामला), कानून के हाथ लंबे होते हैं और न्याय की प्रक्रिया अंततः अपराधी तक पहुंच ही जाती है।

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