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श्रीगंगानगर: आबकारी विभाग और शराब ठेकेदारों के बीच ठनी, सोमवार से ‘चक्का जाम’ की चेतावनी

श्रीगंगानगर। राजस्थान के सीमावर्ती जिले श्रीगंगानगर में आबकारी विभाग और शराब ठेकेदारों के बीच लंबे समय से चल रहा विवाद अब सड़कों पर उतरने को तैयार है। जिले के शराब ठेकेदारों ने विभाग की कार्यप्रणाली और सप्लाई चेन में आ रही दिक्कतों को लेकर मोर्चा खोल दिया है। शराब ठेकेदार संघ ने घोषणा की है कि यदि उनकी मांगों पर तुरंत विचार नहीं किया गया, तो सोमवार से जिले भर की शराब की दुकानें अनिश्चितकाल के लिए बंद रखी जाएंगी। इस हड़ताल की चेतावनी ने प्रशासन के हाथ-पांव फुला दिए हैं, क्योंकि इससे न केवल राजस्व का बड़ा नुकसान होगा, बल्कि अवैध शराब की बिक्री बढ़ने का खतरा भी पैदा हो जाएगा।


विवाद की मुख्य जड़: देशी शराब की किल्लत

हड़ताल का सबसे मुख्य कारण देशी शराब की समय पर आपूर्ति (Supply) न होना बताया जा रहा है। ठेकेदारों का आरोप है कि उन्होंने सरकार को निर्धारित लाइसेंस फीस और अग्रिम राशि जमा करवा दी है, लेकिन इसके बावजूद आबकारी डिपो से उन्हें मांग के अनुसार माल नहीं मिल रहा है।

ठेकेदार संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि श्रीगंगानगर में देशी शराब और ‘राजस्थान मेड लिकर’ (RML) की भारी कमी चल रही है। जब दुकानों पर स्टॉक नहीं होता, तो ग्राहक वापस लौट जाते हैं, जिससे ठेकेदारों को भारी वित्तीय नुकसान हो रहा है। इसके बावजूद, विभाग उन पर मासिक कोटा पूरा करने का दबाव बना रहा है। ठेकेदारों का तर्क है कि “जब विभाग माल ही नहीं दे रहा, तो हम कोटा कैसे बेचें?”


ठेकेदारों की प्रमुख मांगें

सोमवार से होने वाली इस प्रस्तावित हड़ताल के पीछे ठेकेदारों ने एक मांग पत्र भी तैयार किया है, जिसमें निम्नलिखित बिंदु शामिल हैं:

  1. नियमित आपूर्ति: आबकारी गोदामों से देशी और अंग्रेजी शराब की निर्बाध सप्लाई सुनिश्चित की जाए।

  2. पेनल्टी में छूट: सप्लाई न मिलने के कारण जो कोटा अधूरा रह गया है, उस पर लगने वाली पेनल्टी को माफ किया जाए।

  3. अवैध बिक्री पर रोक: गांवों और शहरों में ब्रांचों के नाम पर हो रही अवैध शराब की बिक्री पर नकेल कसी जाए, क्योंकि इससे वैध ठेकेदारों की सेल प्रभावित हो रही है।

  4. मार्जिन में सुधार: बढ़ती महंगाई और दुकान के खर्चों को देखते हुए ठेकेदारों के लाभांश (Margin) पर पुनर्विचार हो।


राजस्व का संकट और प्रशासनिक हलचल

श्रीगंगानगर जिला आबकारी विभाग के लिए राजस्व प्राप्ति का एक बड़ा केंद्र है। यदि जिले के सभी ठेके एक साथ बंद होते हैं, तो सरकार को प्रतिदिन करोड़ों रुपये के राजस्व की हानि होगी। इसके अलावा, ठेके बंद होने की स्थिति में हरियाणा और पंजाब से तस्करी कर लाई जाने वाली अवैध शराब का बाजार गर्म होने की आशंका है, जो पुलिस और प्रशासन के लिए कानून-व्यवस्था की चुनौती बन सकती है।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, जिला आबकारी अधिकारी और विभाग के उच्च अधिकारियों ने रविवार शाम को ही ठेकेदार संघ के प्रतिनिधियों के साथ एक आपातकालीन बैठक बुलाई। अधिकारियों का कहना है कि सप्लाई में तकनीकी कारणों और लॉजिस्टिक्स की वजह से कुछ देरी हुई है, जिसे जल्द ही दुरुस्त कर लिया जाएगा। प्रशासन की कोशिश है कि किसी भी तरह से सोमवार की हड़ताल को टाला जाए।


आम जनता और सामाजिक पक्ष

शराब ठेकेदारों की इस संभावित हड़ताल का असर केवल व्यापार तक सीमित नहीं है। जानकारों का मानना है कि यदि ठेके बंद होते हैं, तो नशे के आदी लोग अन्य खतरनाक नशों (जैसे सिंथेटिक ड्रग्स या नशीले कैप्सूल) की ओर रुख कर सकते हैं, जो जिले के लिए पहले से ही एक बड़ी समस्या है। वहीं, सामाजिक कार्यकर्ताओं का एक वर्ग इसे प्रशासन के लिए सख्त कदम उठाने के अवसर के रूप में देख रहा है।


निष्कर्ष: क्या निकलेगा समाधान?

फिलहाल, गेंद आबकारी विभाग के पाले में है। यदि विभाग आज देर रात तक आपूर्ति का ठोस आश्वासन और लिखित भरोसा नहीं देता है, तो सोमवार सुबह से श्रीगंगानगर की सड़कों पर सन्नाटा और शराब की दुकानों पर ताले लटके नजर आ सकते हैं। ठेकेदारों ने साफ कर दिया है कि “कोरे आश्वासनों से दुकानें नहीं खुलेंगी, हमें गोदाम में माल चाहिए।”

अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गतिरोध को कैसे तोड़ता है और क्या कल सुबह जिले के मदिरा प्रेमी खाली हाथ लौटेंगे या विभाग अपनी साख बचाने में कामयाब होगा।


नोट: समाचार लिखे जाने तक आबकारी विभाग और ठेकेदारों के बीच वार्ता जारी थी। अंतिम निर्णय रात 11 बजे तक होने की संभावना है।

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