
श्रीगंगानगर। राजस्थान के सीमावर्ती जिले श्रीगंगानगर में नाबालिग लड़की के साथ हुए सनसनीखेज शोषण और मानव तस्करी के मामले के बाद प्रशासन पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गया है। इस संवेदनशील और हृदयविदारक घटना ने जहां पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय होटलों और लॉज में चल रहे अनैतिक एवं अवैध धंधों की पोल भी खोल कर रख दी है। घटना से सबक लेते हुए श्रीगंगानगर जिला प्रशासन, पुलिस और नगर परिषद की संयुक्त टीमों ने पूरे जिले में एक व्यापक और सख्त जांच अभियान (क्रैकडाउन) शुरू कर दिया है, जिसके तहत बिना वैध दस्तावेजों के धड़ल्ले से चल रहे होटलों पर कानूनी शिकंजा कसा जा रहा है।
शुरुआती जांच में चौंकाने वाला खुलासा: 150 में से सिर्फ 40 के पास लाइसेंस
नाबालिग कांड के तुरंत बाद जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक के कड़े रुख के बाद स्थानीय प्रशासन ने शहर और आस-पास के क्षेत्रों में संचालित होटलों की कुण्डली खंगालनी शुरू की। स्थानीय स्तर पर की गई शुरुआती जांच और सर्वे में जो आंकड़े सामने आए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले और प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करने वाले हैं।
जांच टीमों की रिपोर्ट के अनुसार, श्रीगंगानगर जिले और शहर के मुख्य व्यावसायिक व रिहायशी इलाकों में 150 से अधिक होटल और गेस्ट हाउस संचालित हो रहे हैं। लेकिन सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इनमें से केवल 40 होटलों के पास ही वैध दस्तावेज, सराय एक्ट का पंजीकरण, या नगर परिषद और पर्यटन विभाग की आवश्यक एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) है।
बाकी के 110 से अधिक होटल और लॉज पूरी तरह से अवैध रूप से, बिना किसी सरकारी अनुमति या लाइसेंस के चल रहे हैं। ये आंकड़े साफ दर्शाते हैं कि शहर के बीचों-बीच नियमों को ताक पर रखकर एक बहुत बड़ा अवैध नेटवर्क खड़ा हो चुका था, जो सुरक्षा के लिहाज से बेहद खतरनाक है।
अपराध और अनैतिक गतिविधियों के अड्डे बने अवैध होटल
प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि बिना पंजीकरण और बिना किसी सरकारी नियंत्रण के चल रहे ये होटल अपराधियों, तस्करों और अनैतिक गतिविधियों में संलिप्त लोगों के लिए सबसे सुरक्षित पनाहगाह बन चुके हैं। वैध दस्तावेज न होने के कारण इन होटलों के मालिक या प्रबंधक यहां रुकने वाले ग्राहकों (गेस्ट) का कोई सही रिकॉर्ड या आईडी (पहचान पत्र) नहीं रखते।
सीसीटीवी कैमरों की अनुपस्थिति या खराब स्थिति, और बिना पुलिस वेरिफिकेशन (सत्यापन) के स्टाफ को नौकरी पर रखना इन जगहों पर आम बात हो चुकी है। यही वजह है कि हाल ही में हुई नाबालिग मानव तस्करी जैसी जघन्य वारदातों को इन बंद कमरों के पीछे आसानी से अंजाम दे दिया गया, और स्थानीय प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लगी।
सीलिंग और कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू: अपराधियों में हड़कंप
इस गंभीर लापरवाही और सुरक्षा चूक को देखते हुए प्रशासन ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। जिला प्रशासन द्वारा गठित विशेष जांच टीमों ने चिन्हित किए गए अवैध होटलों को नोटिस जारी करना शुरू कर दिया है।
बिना लाइसेंस, बिना फायर सेफ्टी (अग्निशमन सुरक्षा मानकों), और बिना कमर्शियल रूपांतरण के चल रहे होटलों को सील करने की प्रक्रिया (सीलिंग ड्राइव) युद्ध स्तर पर शुरू कर दी गई है। इसके साथ ही, उन होटल मालिकों और संचालकों के खिलाफ भी सख्त कानूनी मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं जो लंबे समय से सरकार को राजस्व का चूना लगा रहे थे और अवैध रूप से व्यवसाय चला रहे थे।
प्रशासन की इस चौतरफा और सख्त कार्रवाई से पूरे जिले के होटल कारोबारियों और अवैध रूप से लॉज चलाने वाले भू-माफियाओं में हड़कंप मचा हुआ है। पुलिस और प्रशासन ने साफ कर दिया है कि सुरक्षा मानकों और नियमों में किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। यदि किसी भी होटल में भविष्य में कोई भी संदिग्ध या गैर-कानूनी गतिविधि पाई गई, तो सीधे तौर पर उसके मालिक को जिम्मेदार मानकर सख्त से सख्त जेल की सजा और संपत्ति ध्वस्तीकरण (बुलडोजर एक्शन) की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।