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श्रीगंगानगर: अन्न के कटोरे में गेहूं की सरकारी खरीद का आगाज

श्रीगंगानगर। राजस्थान के ‘अन्न का कटोरा’ कहे जाने वाले सीमावर्ती जिले श्रीगंगानगर में आज 10 मार्च 2026 से गेहूं की सरकारी खरीद की औपचारिक शुरुआत हो गई है। जिले की अनाज मंडियों में सुबह से ही ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। इस वर्ष रबी सीजन की इस प्रमुख फसल की खरीद को लेकर किसानों में खासा उत्साह है, क्योंकि सरकार ने खरीद प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और सुगम बनाने के दावे किए हैं।

समर्थन मूल्य और बोनस का गणित

इस वर्ष केंद्र सरकार द्वारा गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) घोषित किया गया था, जिसमें राज्य सरकार द्वारा अतिरिक्त बोनस भी जोड़ा गया है। कुल मिलाकर किसानों को 2585 रुपये प्रति क्विंटल का भाव मिलेगा।

  • न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP): $2425$ रुपये प्रति क्विंटल

  • राज्य सरकार बोनस: $160$ रुपये प्रति क्विंटल

  • कुल भुगतान: $2585$ रुपये प्रति क्विंटल

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह मूल्य पिछले वर्ष की तुलना में किसानों की लागत को देखते हुए एक राहत भरा कदम है। जिले के लगभग 1.5 लाख से अधिक किसानों के इस सरकारी खरीद प्रक्रिया से सीधे लाभान्वित होने की उम्मीद है।


प्रशासनिक तैयारियां और पुख्ता प्रबंध

श्रीगंगानगर जिला प्रशासन और भारतीय खाद्य निगम (FCI) ने मिलकर जिले के विभिन्न उपखंडों—जैसे पदमपुर, रायसिंहनगर, अनूपगढ़ (नवनिर्मित जिला होने के बावजूद साझा समन्वय), सूरतगढ़ और सादुलशहर—की मंडियों में खरीद केंद्र स्थापित किए हैं।

प्रमुख व्यवस्थाएं:

  1. ऑनलाइन पंजीकरण: इस बार भी खरीद ‘राज-सहकारी’ पोर्टल के माध्यम से की जा रही है। किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए गिरदावरी और जन-आधार कार्ड के जरिए पहले से स्लॉट बुक करना अनिवार्य किया गया है।

  2. बारदाने की उपलब्धता: मंडियों में खाली बोरियों (बारदाने) की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की गई है ताकि तुलाई में कोई देरी न हो।

  3. पेयजल और छाया: मार्च की बढ़ती गर्मी को देखते हुए प्रशासन ने मंडियों में किसानों और मजदूरों के लिए ठंडे पानी और छाया की विशेष व्यवस्था की है।

गुणवत्ता मानक (Fair Average Quality – FAQ)

भारतीय खाद्य निगम (FCI) के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि खरीद FAQ (Fair Average Quality) मानकों के आधार पर ही की जाएगी। गेहूं में नमी की मात्रा 12% से अधिक नहीं होनी चाहिए। मंडियों में नमी मापने वाली मशीनें (Moisture Meters) लगाई गई हैं। किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपनी फसल को अच्छी तरह सुखाकर और साफ करके लाएं ताकि उन्हें मौके पर ही ‘पास’ कर दिया जाए।


भुगतान की प्रक्रिया: ‘डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर’

किसानों की सबसे बड़ी चिंता भुगतान को लेकर रहती है। जिला कलेक्टर ने आश्वस्त किया है कि फसल की तुलाई के बाद 48 से 72 घंटों के भीतर भुगतान सीधे किसान के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिया जाएगा। बिचौलियों की भूमिका खत्म करने के लिए इस बार बायोमेट्रिक सत्यापन को और अधिक कड़ा किया गया है।

मंडी का माहौल और किसानों की प्रतिक्रिया

आज सुबह नई धान मंडी में पहली ढेरी की पूजा-अर्चना के साथ खरीद शुरू हुई। स्थानीय किसान राम सिंह ने बताया, “इस बार मौसम ने साथ दिया है और पैदावार अच्छी है। सरकारी भाव बाजार भाव (प्राइवेट) की तुलना में बेहतर है, इसलिए हम सरकारी केंद्र पर ही फसल बेच रहे हैं।”

हालांकि, कुछ मंडियों में मजदूरों की कमी और बारदाने की सिलाई मशीनों की मरम्मत को लेकर छोटे-मोटे विवाद भी सामने आए, जिन्हें मंडी सचिवों ने मौके पर ही सुलझा लिया।

चुनौतियां और आगामी रणनीति

श्रीगंगानगर में गेहूं की आवक अगले 15 दिनों में अपने चरम (Peak) पर होगी। प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती मंडियों में ट्रैफिक जाम और अनाज के भंडारण (Storage) की होगी। यदि मौसम में अचानक बदलाव आता है और बारिश होती है, तो खुले में पड़े अनाज को बचाने के लिए तिरपाल और ढके हुए प्लेटफॉर्म्स की कमी खल सकती है। इसके लिए ‘वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन’ को अलर्ट पर रखा गया है।


निष्कर्ष

श्रीगंगानगर में गेहूं की सरकारी खरीद केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि जिले की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। $2585$ रुपये प्रति क्विंटल का भाव ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई जान फूंकेगा। यदि प्रशासन अपने वादे के मुताबिक समय पर भुगतान और पारदर्शी खरीद सुनिश्चित करता है, तो यह सीजन जिले के किसानों के लिए खुशहाली लेकर आएगा।

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