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श्रीगंगानगर अनाज मंडी: नर्मे और ग्वार के भावों में हलचल, क्या किसानों को मिलेगा उनकी मेहनत का सही मोल?

राजस्थान का ‘अन्न कटोरा’ कहा जाने वाला श्रीगंगानगर जिला इन दिनों कृषि गतिविधियों का केंद्र बना हुआ है। मार्च का महीना शुरू होते ही मंडियों में फसलों की आवक और कीमतों को लेकर गहमागहमी तेज हो गई है। आज, 5 मार्च को श्रीगंगानगर की मुख्य अनाज मंडी में जिंसों की कीमतों में उतार-चढ़ाव का दौर जारी रहा, जिसने किसानों और व्यापारियों दोनों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।


नर्मे और कपास की स्थिति: सुस्ती या सुधार?

श्रीगंगानगर क्षेत्र की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली नर्मे (Cotton) की फसल इस बार चर्चा का विषय बनी हुई है। मंडी से प्राप्त जानकारी के अनुसार, आज नर्मे के भावों में मामूली गिरावट और स्थिरता के बीच का रुख देखा गया। जहाँ पिछले सप्ताह कीमतें कुछ मजबूत थीं, वहीं आज वैश्विक बाजारों के संकेतों और स्थानीय मांग में कमी के कारण भावों में हल्का दबाव नजर आया।

वर्तमान में, अच्छी गुणवत्ता वाले नर्मे के भाव 7,200 रुपये से 7,800 रुपये प्रति क्विंटल के बीच दर्ज किए गए हैं। हालांकि, किसान इस भाव से पूरी तरह संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं। कई किसानों ने अपनी उपज को रोक रखा है, क्योंकि उन्हें उम्मीद है कि आने वाले दिनों में जब मिलों की मांग बढ़ेगी, तो भाव 8,000 रुपये के स्तर को पार कर सकते हैं।

ग्वार के भावों में तेजी की आहट

ग्वार के मामले में स्थिति थोड़ी अलग और उत्साहजनक नजर आ रही है। ग्वार की आवक मंडी में निरंतर बनी हुई है और आज इसके भावों में सकारात्मक रुझान देखा गया। ग्वार गम की अंतरराष्ट्रीय मांग में सुधार की खबरों ने स्थानीय स्तर पर व्यापारियों को सक्रिय कर दिया है। आज ग्वार के भाव 5,200 रुपये से 5,650 रुपये प्रति क्विंटल के दायरे में रहे। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि ग्वार एक ऐसी कमोडिटी है जिसमें सट्टेबाजी और मांग का सीधा असर बहुत जल्दी दिखता है, इसलिए मार्च के अंत तक इसमें और सुधार की प्रबल संभावना है।


किसानों की दुविधा और बाजार विशेषज्ञों की राय

मंडी में अपनी ट्रॉली लेकर पहुंचे किसानों के चेहरे पर मिश्रित भाव हैं। कुछ किसान लागत निकालने के लिए मौजूदा भावों पर फसल बेच रहे हैं, जबकि बड़े काश्तकार ‘वेट एंड वॉच’ की नीति अपना रहे हैं।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार:

  1. वैश्विक प्रभाव: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोयाबीन और अन्य तेलहन फसलों के उतार-चढ़ाव का असर स्थानीय मंडी पर पड़ रहा है।

  2. आगामी मांग: कपड़ा उद्योगों से नर्मे की मांग मार्च के दूसरे पखवाड़े में बढ़ने की उम्मीद है।

  3. होली का प्रभाव: त्योहारों के सीजन के कारण मजदूरों की कमी और परिवहन की उपलब्धता भी कीमतों को प्रभावित कर सकती है।

मंडी प्रशासन और सुविधाएं

श्रीगंगानगर मंडी समिति ने किसानों की सुविधा के लिए पुख्ता इंतजाम किए हैं। आवक बढ़ने के बावजूद तुलाई और भुगतान की प्रक्रिया को सुचारू रखने के प्रयास किए जा रहे हैं। प्रशासन ने किसानों को सलाह दी है कि वे अपनी फसल को पूरी तरह सुखाकर और साफ-सुथरा करके मंडी लाएं, ताकि उन्हें ‘टॉप क्वालिटी’ के दाम मिल सकें। नमी वाली फसलों के दाम अक्सर कम लगाए जाते हैं, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान होता है।

निष्कर्ष

श्रीगंगानगर की अनाज मंडी में 5 मार्च का दिन बाजार की अनिश्चितता और भविष्य की उम्मीदों के बीच बीता। जहाँ नर्मे ने थोड़ा निराश किया, वहीं ग्वार ने उम्मीद की किरण जगाई है। कृषि प्रधान जिला होने के कारण यहाँ के बाजार की रौनक सीधे तौर पर किसानों की जेब से जुड़ी है। यदि आने वाले दिनों में मौसम अनुकूल रहता है और अंतरराष्ट्रीय बाजार स्थिर होते हैं, तो निश्चित रूप से श्रीगंगानगर के किसानों के लिए यह सीजन मुनाफे वाला साबित होगा।

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