
श्रीगंगानगर। आज 8 मार्च 2026 को समूचे विश्व के साथ-साथ श्रीगंगानगर जिले में भी अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस ‘नारी शक्ति’ के उत्सव के रूप में मनाया गया। “एक समावेशी दुनिया का निर्माण” के वैश्विक संदेश के साथ, जिला प्रशासन, पुलिस विभाग और विभिन्न सामाजिक संस्थाओं ने मिलकर महिलाओं के सम्मान, उनकी उपलब्धियों और सबसे महत्वपूर्ण, उनकी सुरक्षा को समर्पित कई प्रभावशाली कार्यक्रम आयोजित किए।
पुलिस लाइन में गूंजी महिला शक्ति की गाथा
आज के आयोजनों का मुख्य केंद्र श्रीगंगानगर पुलिस लाइन रहा। यहाँ आयोजित विशेष सम्मान समारोह में जिले की उन महिला पुलिसकर्मियों को सम्मानित किया गया, जिन्होंने कानून व्यवस्था बनाए रखने और अपराध नियंत्रण में अनुकरणीय साहस दिखाया है।
समारोह को संबोधित करते हुए जिला पुलिस अधीक्षक ने कहा कि महिलाएँ अब केवल घरों की चारदीवारी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे सीमावर्ती जिले की सुरक्षा और समाज में न्याय स्थापना की अग्रिम पंक्ति में खड़ी हैं। महिला थाना प्रभारियों और बीट कॉन्स्टेबल्स को उनके विशिष्ट कार्यों, जैसे साइबर क्राइम सुलझाने और महिला उत्पीड़न के मामलों में त्वरित कार्रवाई के लिए प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। इस दौरान महिला पुलिस बैंड की प्रस्तुति ने पूरे माहौल को जोश से भर दिया।
आत्मरक्षा कार्यशाला: ‘अब डरना नहीं, लड़ना है’
महिला दिवस केवल औपचारिक सम्मान तक सीमित न रहे, इसके लिए शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन ने एक ठोस पहल की। शहर के विभिन्न सरकारी स्कूलों और कॉलेजों (जैसे चौधरी बल्लूराम गोदारा राजकीय कन्या महाविद्यालय) में वृहद स्तर पर ‘आत्मरक्षा कार्यशाला’ (Self-Defense Workshop) का आयोजन किया गया।
इन कार्यशालाओं में प्रशिक्षित प्रशिक्षकों ने छात्राओं को सुरक्षा के व्यावहारिक गुर सिखाए। मुख्य आकर्षण निम्नलिखित रहे:
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शारीरिक तकनीक: छात्राओं को सिखाया गया कि किसी अप्रिय स्थिति में अपने पास मौजूद पेन, बैग या दुपट्टे का उपयोग हथियार के रूप में कैसे करें।
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मनोवैज्ञानिक मजबूती: “विजिटर अटैक” की स्थिति में घबराने के बजाय मानसिक रूप से शांत रहकर मुकाबला करने का प्रशिक्षण दिया गया।
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डिजिटल सुरक्षा: कार्यशाला में साइबर विशेषज्ञों ने लड़कियों को सोशल मीडिया सुरक्षा और ‘हेल्पलाइन 1090’ तथा ‘राज कॉप सिटीजन ऐप’ के प्रभावी उपयोग के बारे में जानकारी दी।
सामाजिक और स्वास्थ्य जागरूकता शिविर
महिला दिवस के इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिला अस्पताल (राजकीय चिकित्सालय) में निःशुल्क महिला स्वास्थ्य जांच शिविर लगाया गया। इसमें विशेष रूप से हीमोग्लोबिन की जांच, कैंसर स्क्रीनिंग और पोषण संबंधी परामर्श दिए गए। ग्रामीण क्षेत्रों में ‘आशा सहयोगिनियों’ और ‘एएनएम’ ने घर-घर जाकर महिलाओं को सरकारी योजनाओं, जैसे ‘शुभलक्ष्मी योजना’ और मातृत्व स्वास्थ्य लाभ के बारे में जागरूक किया।
साहित्यिक और सांस्कृतिक छटा
दोपहर के सत्र में नगर परिषद के ऑडिटोरियम में एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुआ। यहाँ स्थानीय कवयित्रियों ने अपनी कविताओं के माध्यम से स्त्री के विविध रूपों—माँ, बहन, बेटी और एक सशक्त नागरिक—का मार्मिक चित्रण किया। मंच पर उन ‘मूक नायिकाओं’ (Unsung Heroes) को भी बुलाया गया, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी अपने परिवार और समाज के लिए स्वरोजगार के नए अवसर पैदा किए।
निष्कर्ष: सम्मान से सशक्तिकरण की ओर
श्रीगंगानगर में आयोजित ये कार्यक्रम इस बात के गवाह बने कि समाज की सोच अब तेजी से बदल रही है। जिला प्रशासन का यह प्रयास कि “महिलाएँ न केवल पूजी जाएं, बल्कि उन्हें सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाया जाए”, धरातल पर उतरता दिखाई दिया। शाम को शहर के प्रमुख चौराहों को गुलाबी रोशनी से सजाया गया, जो नारी शक्ति के प्रति शहर के आदर को दर्शाता है।
आज का दिन केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि एक प्रतिज्ञा की तरह बीता—एक ऐसी प्रतिज्ञा जहाँ हर बेटी बिना किसी डर के पदमपुर की गलियों से लेकर राजधानी के दफ्तरों तक अपनी सफलता के झंडे गाड़ सके।