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शिक्षा मंत्री मदन दिलावर का श्रीगंगानगर दौरा: सरकारी स्कूल के औचक निरीक्षण में खुली व्यवस्थाओं की पोल

श्रीगंगानगर: राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर अपने कड़े तेवरों और औचक निरीक्षणों के लिए जाने जाते हैं। इसी क्रम में आज, 23 अप्रैल 2026 को, जब वे सीमावर्ती जिले श्रीगंगानगर के दौरे पर रहे, तो उन्होंने सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच के बड़े अंतर को उजागर कर दिया। शिक्षा मंत्री ने राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय 3H का औचक निरीक्षण किया, जहाँ की शैक्षणिक स्थिति देखकर वे दंग रह गए।

औचक निरीक्षण और मौके पर हड़कंप

बिना किसी पूर्व सूचना के जब शिक्षा मंत्री का काफिला विद्यालय के मुख्य द्वार पर रुका, तो स्कूल प्रशासन और शिक्षकों में हड़कंप मच गया। मंत्री सीधे कक्षाओं में दाखिल हुए और रजिस्टर चेक करने के साथ-साथ साफ-सफाई और मिड-डे मील की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। हालांकि, असली चुनौती तब सामने आई जब मंत्री ने छात्रों के साथ संवाद करना शुरू किया।

जब 7वीं की छात्रा नहीं दे पाई बुनियादी सवालों के जवाब

निरीक्षण के दौरान शिक्षा मंत्री मदन दिलावर कक्षा 7वीं में पहुँचे। उन्होंने शिक्षा की गुणवत्ता को परखने के लिए एक छात्रा से कुछ बुनियादी सवाल पूछे। मंत्री ने गणित के साधारण सवाल और भारतीय संविधान से जुड़े कुछ मौलिक प्रश्न किए।

  • गणित के सवाल: जब छात्रा से पहाड़े और साधारण जोड़-घटाव के बारे में पूछा गया, तो वह काफी असहज दिखी और सही उत्तर नहीं दे पाई।

  • सामान्य ज्ञान और संविधान: संविधान दिवस और देश के बुनियादी नागरिक कर्तव्यों से जुड़े सवालों पर भी छात्रा मौन रही।

एक 7वीं कक्षा की छात्रा, जिसे कम से कम बुनियादी अंकगणित और देश के गौरवशाली संविधान की जानकारी होनी चाहिए, उसकी इस स्थिति ने मंत्री को काफी विचलित कर दिया। उन्होंने पाया कि छात्रा की ही नहीं, बल्कि कक्षा के अन्य कई बच्चों की स्थिति भी कमोबेश ऐसी ही थी।

अधिकारियों और शिक्षकों पर भड़के मंत्री

बच्चों के शैक्षिक स्तर में इतनी बड़ी गिरावट देख मंत्री मदन दिलावर का पारा चढ़ गया। उन्होंने मौके पर मौजूद संस्था प्रधान और संबंधित शिक्षकों को जमकर फटकार लगाई। उन्होंने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, “सरकार शिक्षकों को भारी-भरकम वेतन केवल समय बिताने के लिए नहीं देती। अगर 7वीं कक्षा का बच्चा बुनियादी गणित नहीं जानता, तो यह सिस्टम की सबसे बड़ी विफलता है।”

मंत्री ने जिले के उच्च शिक्षा अधिकारियों को भी फोन पर क्लास लगाई और स्पष्ट किया कि भविष्य में ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने निर्देश दिए कि जो शिक्षक बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे रहे हैं, उनकी सूची बनाई जाए और उनके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।

“सुधार करें वरना घर बैठें” – मंत्री की दो टूक

मदन दिलावर ने निरीक्षण के बाद पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि राज्य सरकार शिक्षा के क्षेत्र में करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन यदि आउटपुट शून्य है, तो यह जनता के पैसे की बर्बादी है। उन्होंने ‘सुधार या विदाई’ (Reform or Perish) का संदेश देते हुए कहा कि स्कूलों में केवल उपस्थिति दर्ज करना पर्याप्त नहीं है, बच्चों के सीखने के स्तर (Learning Outcome) में सुधार होना अनिवार्य है।

उन्होंने विद्यालय प्रशासन को निम्नलिखित निर्देश दिए:

  1. कमजोर बच्चों के लिए अतिरिक्त कक्षाएं: जिन बच्चों का स्तर कक्षा के अनुरूप नहीं है, उनके लिए ‘रेमेडियल टीचिंग’ शुरू की जाए।

  2. नियमित मॉनिटरिंग: बीईईओ (BEEO) और डीईओ (DEO) को हर महीने स्कूलों का रैंडम निरीक्षण करने और रिपोर्ट भेजने के आदेश दिए गए।

  3. जवाबदेही तय करना: यदि अगली बार निरीक्षण में सुधार नहीं पाया गया, तो प्रधानाध्यापक और विषय अध्यापकों की वेतन वृद्धि रोकने जैसी सख्त कार्रवाई की जाएगी।

निष्कर्ष: शिक्षा प्रणाली के लिए एक चेतावनी

श्रीगंगानगर के विद्यालय 3H में हुआ यह वाकया राजस्थान के समस्त सरकारी स्कूलों के लिए एक चेतावनी है। मंत्री का यह कड़ा रुख दर्शाता है कि सरकार अब केवल कागजी आंकड़ों पर नहीं, बल्कि वास्तविक गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित कर रही है। अब देखना यह होगा कि शिक्षा मंत्री की इस फटकार के बाद श्रीगंगानगर और प्रदेश के अन्य जिलों में शिक्षा के स्तर में कितना सुधार आता है।

अभिभावकों ने मंत्री के इस कदम का स्वागत किया है, लेकिन साथ ही बुनियादी सुविधाओं और शिक्षकों की कमी जैसी समस्याओं को भी दूर करने की मांग की है।

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