
श्रीगंगानगर। आज 22 अप्रैल को पूरी दुनिया के साथ-साथ श्रीगंगानगर जिले में भी ‘विश्व पृथ्वी दिवस’ (Earth Day) उत्साह और संकल्प के साथ मनाया गया। तपते रेगिस्तानी इलाके में पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग और विभिन्न सामाजिक संस्थाओं ने मिलकर जागरूकता के कई बड़े कार्यक्रम आयोजित किए। इस वर्ष की थीम को ध्यान में रखते हुए जिले भर में ‘हमारी पृथ्वी, हमारा भविष्य’ का संदेश प्रसारित किया गया।
पौधारोपण: भविष्य के लिए हरित कवच
सुबह की शुरुआत शहर के विभिन्न सरकारी स्कूलों और सार्वजनिक पार्कों में पौधारोपण के साथ हुई। राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालयों में छात्र-छात्राओं ने न केवल पौधे लगाए, बल्कि उनके बड़े होने तक देखभाल करने की जिम्मेदारी भी ली। शिक्षकों ने विद्यार्थियों को समझाया कि श्रीगंगानगर जैसे इलाके में, जहाँ तापमान 50 डिग्री तक पहुँच जाता है, वहां अधिक से अधिक पेड़ लगाना ही एकमात्र विकल्प है।
नेहरू पार्क और गांधी पार्क में भी सामाजिक संगठनों द्वारा नीम, पीपल और बरगद जैसे छायादार पौधे लगाए गए। इस दौरान ‘एक छात्र-एक पौधा’ अभियान पर जोर दिया गया ताकि आने वाली पीढ़ी पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझ सके।
कलेक्ट्रेट में स्वच्छता की शपथ
मुख्य कार्यक्रम कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित किया गया, जहाँ प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों ने सामूहिक रूप से ‘स्वच्छता और संरक्षण’ की शपथ ली। शपथ के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि पृथ्वी को बचाने की शुरुआत हमारे अपने कार्यस्थल और घर से होती है। अधिकारियों ने अपील की कि बिजली और पानी की बचत को हम अपनी दैनिक आदतों का हिस्सा बनाएं।
युवाओं की हुंकार: ‘प्लास्टिक मुक्त श्रीगंगानगर’ रैली
आज के दिन का मुख्य आकर्षण युवाओं द्वारा निकाली गई एक विशाल जन-जागरूकता रैली रही। शहर के मुख्य मार्गों से गुजरती इस रैली में युवाओं ने हाथों में तख्तियां और बैनर ले रखे थे, जिन पर ‘प्लास्टिक हटाओ, पृथ्वी बचाओ’ जैसे नारे लिखे थे।
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सिंगल यूज़ प्लास्टिक पर प्रहार: रैली के माध्यम से दुकानदारों और ग्राहकों को सिंगल यूज़ प्लास्टिक और पॉलीथीन का उपयोग बंद करने का आग्रह किया गया।
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कपड़े के थैलों का वितरण: कुछ सामाजिक संस्थाओं ने गोल बाजार और सुखाड़िया सर्कल पर आमजन को मुफ्त में कपड़े के थैले बांटे ताकि प्लास्टिक के उपयोग को कम किया जा सके।
बौद्धिक संगोष्ठियाँ और प्रतियोगिताएं
स्कूलों और कॉलेजों में पृथ्वी दिवस के महत्व पर पोस्टर मेकिंग, निबंध लेखन और भाषण प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। वक्ताओं ने ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के खतरों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यदि आज हम सचेत नहीं हुए, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए यह धरती रहने योग्य नहीं बचेगी। विशेषकर श्रीगंगानगर के संदर्भ में घटते भू-जल स्तर पर भी गहरी चिंता व्यक्त की गई।
आमजन को संदेश: छोटे बदलाव, बड़ी जीत
अभियान के अंत में विशेषज्ञों ने आम नागरिकों से कुछ छोटे लेकिन प्रभावी बदलाव करने की अपील की:
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सार्वजनिक स्थानों पर कूड़ा न फेंकें।
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घर के गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग रखें।
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अपने जन्मदिन या विशेष अवसरों पर कम से कम एक पौधा जरूर लगाएं।
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पानी का दुरुपयोग रोकें और वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) को अपनाएं।
निष्कर्ष: श्रीगंगानगर में आयोजित यह जागरूकता अभियान केवल एक दिन का औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि इसने शहरवासियों के भीतर पर्यावरण के प्रति एक नई चेतना का संचार किया है। प्रशासन और जनता के इस साझा प्रयास से उम्मीद जगी है कि हम अपनी ‘धरा’ को फिर से हरा-भरा और प्रदूषण मुक्त बनाने में सफल होंगे।
याद रखें: पृथ्वी हमारे पूर्वजों की विरासत नहीं, बल्कि हमारे बच्चों का कर्ज है जिसे हमें सुरक्षित लौटाना है।