
श्रीगंगानगर। राजस्थान के सीमावर्ती जिले श्रीगंगानगर से सटी भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा इन दिनों एक अभेद्य किले में तब्दील हो चुकी है। सीमा पार से होने वाली नापाक हरकतों, विशेषकर ड्रोन के जरिए मादक पदार्थों (हेरोइन) और हथियारों की तस्करी की बढ़ती कोशिशों को देखते हुए जिला प्रशासन और सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने सुरक्षा घेरा और कड़ा कर दिया है। इसी कड़ी में सीमावर्ती इलाकों में ‘नाइट कर्फ्यू’ को सख्ती से लागू किया गया है, ताकि दुश्मन की हर चाल को नाकाम किया जा सके।
ड्रोन: सीमा पार से नई और बड़ी चुनौती
पिछले कुछ महीनों में श्रीगंगानगर और अनूपगढ़ सेक्टर में पाकिस्तानी तस्करों द्वारा ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल काफी बढ़ गया है। अंधेरे का फायदा उठाकर सीमा पार से ड्रोन के जरिए हेरोइन के पैकेट भारतीय सीमा में गिराए जाते हैं, जिन्हें यहाँ मौजूद उनके स्थानीय तस्कर रिसीव करने की कोशिश करते हैं।
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नार्को-टेररिज्म: सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इन मादक पदार्थों की बिक्री से होने वाली कमाई का इस्तेमाल भारत विरोधी गतिविधियों में किया जाता है। इसे देखते हुए बीएसएफ ने ‘एंटी-ड्रोन सिस्टम’ के साथ-साथ जमीनी गश्त को भी दोगुना कर दिया है।
नाइट कर्फ्यू: क्या हैं नियम और पाबंदियाँ?
जिला मजिस्ट्रेट के आदेशानुसार, अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे 5 किलोमीटर के दायरे में आने वाले गांवों और क्षेत्रों में शाम 7:00 बजे से सुबह 6:00 बजे तक नाइट कर्फ्यू प्रभावी है।
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आवाजाही पर रोक: इस दौरान किसी भी व्यक्ति को बिना वैध अनुमति के सीमावर्ती सड़कों या खेतों में घूमने की इजाजत नहीं है।
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खेती और काम: किसानों को अपने खेतों में जाने के लिए निर्धारित समय का पालन करना होता है और सुरक्षा जांच से गुजरना पड़ता है।
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पहचान पत्र अनिवार्य: सीमावर्ती क्षेत्र के निवासियों को अपने साथ हमेशा आधार कार्ड या पहचान पत्र रखना अनिवार्य किया गया है ताकि सत्यापन में देरी न हो।
आज का संयुक्त तलाशी अभियान (Joint Search Operation)
आज, 13 मई को श्रीगंगानगर पुलिस और बीएसएफ के जवानों ने संयुक्त रूप से सीमावर्ती गांवों में एक बड़ा सर्च ऑपरेशन चलाया।
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सघन चेकिंग: जवानों ने खेतों, सुनसान ढाणियों और नहरों के किनारे गहन तलाशी ली। यह अभियान विशेष रूप से उन ‘ड्रॉप जोन’ की पहचान करने के लिए था जहाँ तस्कर सामान गिराने की फिराक में रहते हैं।
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ग्रामीणों से संवाद: सुरक्षा बलों ने स्थानीय ग्रामीणों के साथ बैठकें भी कीं और उन्हें प्रेरित किया कि यदि वे रात में किसी भी उड़ने वाली वस्तु (ड्रोन) की आवाज सुनें या किसी संदिग्ध व्यक्ति को देखें, तो तुरंत 100 नंबर या बीएसएफ की पोस्ट पर सूचना दें।
स्थानीय पुलिस और खुफिया तंत्र का तालमेल
सिर्फ सरहद ही नहीं, बल्कि जिले के भीतरी रास्तों पर भी नाकाबंदी बढ़ा दी गई है। खुफिया एजेंसियां सक्रिय हैं और संदिग्ध मोबाइल नंबरों तथा नेटवर्क पर नजर रखी जा रही है। पुलिस अधीक्षक के अनुसार, तस्करी के नेटवर्क को तोड़ने के लिए स्थानीय मुखबिर तंत्र को भी मजबूत किया गया है। पकड़े गए तस्करों से मिली जानकारी के आधार पर कई संदिग्ध ठिकानों पर दबिश दी जा रही है।
देश की सुरक्षा सर्वोपरि
सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले नागरिकों ने भी सुरक्षा के इन कड़े इंतजामों का समर्थन किया है। हालांकि, कर्फ्यू के कारण कुछ व्यापारिक और कृषि संबंधी असुविधाएं होती हैं, लेकिन राष्ट्र की सुरक्षा और युवाओं को नशे के जाल से बचाने के लिए ग्रामीण प्रशासन का पूरा सहयोग कर रहे हैं।
निष्कर्ष: श्रीगंगानगर की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बीएसएफ के जवानों की मुस्तैदी और नाइट कर्फ्यू का सख्त पहरा यह स्पष्ट संदेश देता है कि भारत अपनी सीमाओं की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा। आसमान से आने वाले ड्रोन हों या जमीन पर छिपे तस्कर, सुरक्षा बलों की पैनी नजर हर खतरे को खत्म करने के लिए तैयार है।
रिपोर्ट: श्रीगंगानगर न्यूज़ डेस्क दिनांक: 13 मई, 2026