
एक परिवार की चिंता और अंतरराष्ट्रीय संकट
राजस्थान के सीमावर्ती जिले श्रीगंगानगर की रिद्धि-सिद्धि कॉलोनी में इन दिनों सन्नाटा और बेचैनी पसरी हुई है। कारण है घर के लाडले और मर्चेंट नेवी में सेकंड ऑफिसर संजय महर का अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा के विवादों के बीच फंस जाना। ओमान की खाड़ी और ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) में उपजे तनाव ने न केवल वैश्विक राजनीति को गरमा दिया है, बल्कि श्रीगंगानगर के एक साधारण परिवार की रातों की नींद भी उड़ा दी है।
क्या है पूरा मामला?
संजय महर मर्चेंट नेवी के तेल टैंकर जहाज ‘एपामाइनोन्डास’ (Epaminondas) पर सेकंड ऑफिसर के पद पर तैनात हैं। जानकारी के अनुसार, यह जहाज अपनी नियमित यात्रा पर था जब इसे ईरानी नौसेना या उससे जुड़े सुरक्षा बलों द्वारा रोक लिया गया। ईरान और पश्चिमी देशों के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के चलते ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ एक खतरनाक क्षेत्र बन चुका है। संजय का जहाज इसी सामरिक रूप से महत्वपूर्ण जलडमरूमध्य में फंसा हुआ है।
परिजनों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से उनसे संपर्क करना कठिन हो गया है। हालांकि, जहाज पर मौजूद चालक दल के सुरक्षित होने की खबरें आ रही हैं, लेकिन कूटनीतिक गतिरोध के कारण उनकी रिहाई में देरी हो रही है।
स्थानीय स्तर पर राजनीतिक सक्रियता
संजय महर के फंसे होने की खबर जैसे ही श्रीगंगानगर पहुंची, स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधि सक्रिय हो गए। श्रीगंगानगर के विधायक जयदीप बिहानी ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत हस्तक्षेप किया है।
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प्रधानमंत्री को पत्र: विधायक बिहानी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर को पत्र लिखकर मामले की जानकारी दी है। उन्होंने आग्रह किया है कि भारत सरकार ईरान सरकार के साथ कूटनीतिक बातचीत (Diplomatic Channels) का उपयोग करे ताकि संजय और उनके साथियों की जल्द और सुरक्षित घर वापसी सुनिश्चित हो सके।
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मुख्यमंत्री से अपील: उन्होंने राजस्थान के मुख्यमंत्री को भी पत्र लिखकर परिवार को संबल प्रदान करने और केंद्र सरकार पर दबाव बनाने का अनुरोध किया है।
‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ का महत्व और खतरा
दुनिया भर के कुल कच्चे तेल की आपूर्ति का लगभग 20% हिस्सा इसी संकरे समुद्री रास्ते से गुजरता है। ईरान और अन्य देशों के बीच अक्सर यहां जहाजों को जब्त करने या रोके जाने की घटनाएं होती रहती हैं। संजय महर जिस जहाज पर हैं, वह इसी अंतरराष्ट्रीय शक्ति प्रदर्शन (Power Play) का शिकार हो गया है।
परिवार की स्थिति: दुआओं का दौर
संजय के माता-पिता और पत्नी का बुरा हाल है। रिद्धि-सिद्धि कॉलोनी स्थित उनके निवास पर पड़ोसियों और रिश्तेदारों का तांता लगा हुआ है। संजय के पिता का कहना है, “हमारा बेटा देश की सेवा और आर्थिक प्रगति के लिए समंदर की लहरों से लड़ रहा था, हमें यकीन है कि भारत सरकार उसे और उसके साथियों को सुरक्षित वापस लाएगी।”
निष्कर्ष: कूटनीति पर टिकी निगाहें
यह मामला अब केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय नियमों और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा का बन गया है। श्रीगंगानगर की जनता और संजय का परिवार अब केवल दिल्ली की ओर देख रहा है, जहां विदेश मंत्रालय इस गुत्थी को सुलझाने में जुटा है।
संकट की इस घड़ी में पूरा जिला संजय महर की सलामती की दुआ कर रहा है। उम्मीद है कि भारत की मजबूत विदेश नीति के प्रभाव से जल्द ही संजय राजस्थान की मिट्टी पर सुरक्षित कदम रखेंगे।
अपडेट: विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, तेहरान (ईरान) में भारतीय दूतावास जहाज के मालिकों और स्थानीय अधिकारियों के संपर्क में है। जल्द ही कोई सकारात्मक खबर आने की उम्मीद है।