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रेल कनेक्टिविटी में बड़ा उछाल: चंबल एक्सप्रेस के श्रीगंगानगर तक विस्तार की तैयारी

श्रीगंगानगर। सरहदी जिले श्रीगंगानगर के निवासियों के लिए रेलवे की ओर से एक बेहद उत्साहजनक खबर सामने आ रही है। लंबे समय से चली आ रही मांग को ध्यान में रखते हुए, रेलवे प्रशासन अब हावड़ा-मथुरा चंबल एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 12177/12178) के मार्ग को विस्तार देकर इसे श्रीगंगानगर तक लाने पर गंभीरता से मंथन कर रहा है। यदि यह प्रस्ताव धरातल पर उतरता है, तो यह उत्तर-पश्चिम राजस्थान की रेल कनेक्टिविटी के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा।

वर्तमान स्थिति और विस्तार का आधार

वर्तमान में चंबल एक्सप्रेस पश्चिम बंगाल के हावड़ा स्टेशन से उत्तर प्रदेश के मथुरा जंक्शन तक चलती है। मथुरा पहुंचने के बाद, यह ट्रेन वहां कई घंटों तक यार्ड में खड़ी रहती है (जिसे तकनीकी भाषा में ‘आइडल रैक’ कहा जाता है)। इसी समय का सदुपयोग करने के लिए उत्तर-पश्चिम रेलवे (NWR) और जनप्रतिनिधियों ने इसे श्रीगंगानगर तक बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार किया है।

संभावित रूट और प्रमुख स्टेशन

प्रस्तावित योजना के अनुसार, यह ट्रेन मथुरा से आगे बढ़कर राजस्थान और हरियाणा के कई महत्वपूर्ण शहरों को जोड़ते हुए श्रीगंगानगर पहुंचेगी। इसका संभावित मार्ग कुछ इस प्रकार हो सकता है:

  • मथुरा से अलवर: राजस्थान के औद्योगिक क्षेत्र को जोड़ना।

  • रेवाड़ी और हिसार: हरियाणा के इन प्रमुख जंक्शन्स के माध्यम से यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी।

  • सादुलपुर और हनुमानगढ़: इन स्टेशनों से होते हुए अंततः ट्रेन श्रीगंगानगर पहुंचेगी।

यात्रियों को होने वाले लाभ

इस विस्तार से क्षेत्र के लोगों को कई तरह के फायदे होंगे:

  1. सीधी हावड़ा कनेक्टिविटी: वर्तमान में श्रीगंगानगर से हावड़ा (कोलकाता) जाने के लिए सीमित विकल्प हैं। चंबल एक्सप्रेस के विस्तार से व्यापारियों, छात्रों और दक्षिण-पूर्व भारत की यात्रा करने वाले परिवारों को सीधी ट्रेन मिल जाएगी।

  2. धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा: मथुरा और वृंदावन जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह ट्रेन किसी वरदान से कम नहीं होगी। अब उन्हें मथुरा जाने के लिए बीच में ट्रेनें बदलने या निजी वाहनों का सहारा लेने की आवश्यकता नहीं होगी।

  3. आर्थिक विकास: हिसार, रेवाड़ी और अलवर जैसे औद्योगिक केंद्रों से सीधा जुड़ाव होने के कारण माल परिवहन और व्यापारिक गतिविधियों में तेजी आएगी।

सांसदों और जनप्रतिनिधियों के प्रयास

इस परियोजना को गति देने में क्षेत्रीय सांसदों की भूमिका अहम रही है। रेलवे बोर्ड की बैठकों में बार-बार यह मुद्दा उठाया गया है कि श्रीगंगानगर जैसे रणनीतिक और कृषि प्रधान जिले को देश के पूर्वी हिस्सों से जोड़ा जाना अनिवार्य है। सांसदों का तर्क है कि ट्रेन के विस्तार से रेलवे के राजस्व में भी भारी बढ़ोतरी होगी क्योंकि इस रूट पर यात्रियों का दबाव हमेशा अधिक रहता है।

आगे की राह

फिलहाल यह प्रस्ताव उत्तर-पश्चिम रेलवे के मुख्यालय में विचाराधीन है। इसके बाद इसे अंतिम मंजूरी के लिए रेलवे बोर्ड, नई दिल्ली भेजा जाएगा। तकनीकी जांच, समय सारिणी (Timetable) का निर्धारण और रैक की उपलब्धता सुनिश्चित होने के बाद ही आधिकारिक घोषणा की जाएगी। क्षेत्र के रेल प्रेमी और दैनिक यात्री इस फैसले का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

निष्कर्ष: चंबल एक्सप्रेस का श्रीगंगानगर तक विस्तार केवल एक ट्रेन का बढ़ना नहीं है, बल्कि यह इस सीमावर्ती क्षेत्र के विकास के नए द्वार खोलने जैसा है। यह न केवल दूरी कम करेगा बल्कि उत्तर और पूर्व भारत के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य करेगा।

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