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रेलवे ट्रैक और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए ट्रेनों के पहियों की बदली दिशा: श्रीगंगानगर-पंजाब-हरियाणा रूट प्रभावित

श्रीगंगानगर।

भारतीय रेलवे को आधुनिक और अधिक सुरक्षित बनाने के सफर में कई बार यात्रियों को थोड़ी-बहुत असुविधा का सामना करना पड़ता है, लेकिन यह असुविधा आने वाले कल के एक बेहतरीन और रफ्तार से भरे सफर की नींव होती है। कुछ ऐसा ही इन दिनों उत्तर-पश्चिम रेलवे (NWR) के अधिकार क्षेत्र में देखने को मिल रहा है। चूरू-आसलु-दूधवा खारा स्टेशनों के बीच बड़े स्तर पर चल रहे बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) के विकास और तकनीकी सुधार कार्यों के चलते मई महीने में रेल यातायात काफी हद तक प्रभावित हुआ है।

इस महत्वपूर्ण ट्रैक अपग्रेडेशन के कारण सीमावर्ती जिले श्रीगंगानगर से होकर गुजरने वाली और पड़ोसी राज्यों पंजाब व हरियाणा की तरफ जाने वाली कई प्रमुख ट्रेनों के रूट को डायवर्ट (मार्ग परिवर्तित) किया गया है, जबकि कुछ महत्वपूर्ण ट्रेनों को री-शेड्यूल (समय में बदलाव) किया गया है।

क्यों जरूरी था यह ब्लॉक और तकनीकी कार्य?

रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, चूरू-आसलु-दूधवा खारा रेल खंड पर लंबे समय से ट्रैक के दोहरीकरण (Double Distance Track), इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग और नॉन-इंटरलाकिंग जैसे जटिल तकनीकी कार्यों की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। इस रूट पर ट्रेनों के बढ़ते दबाव को देखते हुए सुरक्षा मानकों को पुख्ता करना और बुनियादी ढांचे को मजबूत करना बेहद अनिवार्य था।

रेलवे प्रशासन का बयान: “यह तकनीकी कार्य भविष्य में ट्रेनों की गति बढ़ाने, लेटलतीफी को खत्म करने और रेल यात्रा को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के लिए किया जा रहा है। इस दौरान यात्रियों को होने वाली अस्थाई असुविधा के लिए हमें खेद है, लेकिन यह काम राष्ट्र और यात्रियों के हित में ही है।”

कौन-कौन से रूट और ट्रेनें हुई हैं प्रभावित?

श्रीगंगानगर से पंजाब, हरियाणा और दिल्ली की तरफ कनेक्टिविटी देने वाली रेल लाइनें इस काम की वजह से सीधे तौर पर प्रभावित हुई हैं। मुख्य बदलाव कुछ इस प्रकार देखे जा रहे हैं:

  1. ट्रेनों का मार्ग परिवर्तन (Diversion): श्रीगंगानगर से खुलकर चूरू के रास्ते जयपुर, दिल्ली या दक्षिण भारत की तरफ जाने वाली कुछ लंबी दूरी की ट्रेनों को अस्थाई रूप से हनुमानगढ़, सादुलपुर या हिसार के रास्ते चलाया जा रहा है। इसके अलावा पंजाब से आने वाली कुछ ट्रेनें भी बदले हुए रूट से अपनी मंजिल तय कर रही हैं।

  2. री-शेड्यूलिंग (समय में बदलाव): जो ट्रेनें पूरी तरह रद्द नहीं की जा सकती थीं, उनके प्रस्थान समय में आंशिक बदलाव किया गया है। कई ट्रेनों को श्रीगंगानगर या उनके प्रारंभिक स्टेशनों से अपने निर्धारित समय से 1 से 3 घंटे की देरी से रवाना किया जा रहा है ताकि ट्रैक पर चल रहे काम के दौरान ट्रेनों का टकराव न हो।

  3. आंशिक रद्दीकरण (Short Termination): कुछ पैसेंजर और एक्सप्रेस ट्रेनों को उनके अंतिम स्टेशन तक न ले जाकर, बीच के स्टेशनों पर ही शॉर्ट-टर्मिनेट किया जा रहा है, जिससे दैनिक यात्रियों (डेली कम्यूटर्स) को अपनी यात्रा की योजना नए सिरे से बनानी पड़ रही है।

यात्रियों की परेशानी और रेलवे का सपोर्ट सिस्टम

अचानक हुए इस बदलाव के कारण उन यात्रियों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है जिन्होंने गर्मियों की छुट्टियों (Summer Vacations) के मद्देनजर महीनों पहले अपनी टिकट बुक करवा ली थी। श्रीगंगानगर से व्यापार, इलाज या पढ़ाई के सिलसिले में पंजाब और हरियाणा जाने वाले लोग अब बसों या निजी वाहनों का सहारा लेने को मजबूर हैं।

हालांकि, उत्तर-पश्चिम रेलवे ने यात्रियों की मदद के लिए पुख्ता इंतजाम किए हैं:

  • हेल्पलाइन और पूछताछ काउंटर: श्रीगंगानगर सहित प्रभावित होने वाले सभी प्रमुख स्टेशनों पर अतिरिक्त पूछताछ काउंटर खोले गए हैं।

  • एसएमएस अलर्ट: जिन यात्रियों के टिकट पहले से बुक थे, उनके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबरों पर रूट डायवर्जन और समय में बदलाव की सूचना लगातार भेजी जा रही है।

  • सोशल मीडिया अपडेट्स: रेलवे अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल के जरिए हर छोटे-बड़े बदलाव की लाइव जानकारी साझा कर रहा है।

भविष्य में क्या होगा फायदा?

भले ही मई का यह महीना श्रीगंगानगर के रेल यात्रियों के लिए थोड़ा चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा हो, लेकिन इस तकनीकी कार्य के पूरा होते ही इस रूट पर ट्रेनों की लेटलतीफी हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी। ट्रैक की क्षमता बढ़ने से भविष्य में श्रीगंगानगर को नई एक्सप्रेस और सुपरफास्ट ट्रेनों की सौगात मिल सकेगी, जिससे पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के बीच का सफर और अधिक सुगम, तेज और सुरक्षित हो जाएगा। प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे घर से निकलने से पहले रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट या एनटीईएस (NTES) ऐप पर अपनी ट्रेन का करंट स्टेटस जरूर चेक कर लें।

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