
यह घटना श्रीगंगानगर जिले के रावला मंडी थाना अंतर्गत सखी गांव की है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह पूरी साजिश अवैध संबंधों और धोखे की बुनियाद पर रची गई थी। मृतक की पत्नी सतविंदर कौर के प्रेम संबंध गांव के ही एक युवक राजविंदर सिंह के साथ थे। इन संबंधों के बारे में जब पति को पता चला, तो घर में कलह रहने लगी। अपने रास्ते का कांटा हटाने के लिए पत्नी ने प्रेमी के साथ मिलकर खौफनाक साजिश रची।
साजिश और हत्याकांड का विवरण
करीब साढ़े पांच साल पहले, एक सुनियोजित योजना के तहत सतविंदर कौर और राजविंदर सिंह ने मिलकर पति की हत्या कर दी। हत्या के बाद साक्ष्यों को मिटाने के उद्देश्य से उन्होंने शव को पास की एक पानी की डिग्गी (हौज) में फेंक दिया, ताकि इसे एक दुर्घटना या आत्महत्या का रूप दिया जा सके।
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शव की बरामदगी: जब मृतक लापता हुआ और बाद में उसका शव डिग्गी से बरामद हुआ, तो शुरुआत में मामला संदिग्ध लगा।
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पुलिस जांच: रावला मंडी पुलिस ने बारीकी से जांच शुरू की। कॉल डिटेल्स, संदिग्धों की गतिविधियों और स्थानीय मुखबिरों से मिली जानकारी ने पुलिस का शक पत्नी सतविंदर कौर की ओर मोड़ दिया। कड़ाई से पूछताछ करने पर पूरी साजिश का पर्दाफाश हो गया।
अदालत का कड़ा फैसला
इस मामले की सुनवाई श्रीगंगानगर की संबंधित अदालत में चली। अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष ठोस गवाह और वैज्ञानिक साक्ष्य पेश किए।
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ठोस साक्ष्य: डीएनए रिपोर्ट, मोबाइल लोकेशन और चश्मदीदों के बयानों ने यह साबित कर दिया कि हत्या के समय दोनों आरोपी घटनास्थल पर मौजूद थे।
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उम्रकैद की सजा: अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद माना कि यह एक क्रूर और सुनियोजित हत्या थी। न्यायाधीश ने सतविंदर कौर और राजविंदर सिंह को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 (हत्या) और 201 (साक्ष्य मिटाना) के तहत दोषी पाया।
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आर्थिक दंड: उम्रकैद के साथ-साथ अदालत ने दोनों दोषियों पर आर्थिक जुर्माना भी लगाया है, जिसे अदा न करने पर उन्हें अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
समाज के लिए एक सबक
अदालत के इस फैसले ने समाज में एक कड़ा संदेश दिया है। अनैतिक संबंधों और क्षणिक सुख के लिए अपने ही जीवनसाथी की जान लेना कितना बड़ा अपराध है, यह इस फैसले से स्पष्ट होता है। सखी गांव के निवासियों ने इस फैसले का स्वागत किया है, क्योंकि साढ़े पांच साल से पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद लगाए बैठा था।
“कानून की चक्की धीरे जरूर चलती है, लेकिन वह बहुत बारीक पीसती है। साढ़े पांच साल बाद मिला यह न्याय पीड़ित के परिवार के लिए मानसिक शांति लेकर आया है।”
निष्कर्ष: श्रीगंगानगर जिले में अपराध की बढ़ती घटनाओं के बीच पुलिस और न्यायपालिका की यह सक्रियता अपराधियों के मनोबल को तोड़ने का काम करेगी। पति-पत्नी के पवित्र रिश्ते को कलंकित करने वाले इन दोषियों को अब अपनी शेष जिंदगी जेल की सलाखों के पीछे बितानी होगी।