
श्रीगंगानगर: राजस्थान के सीमावर्ती और कृषि प्रधान जिले श्रीगंगानगर के किसानों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। राज्य सरकार ने ‘मुख्यमंत्री कृषक साथी योजना’ के अंतर्गत संचालित तारबंदी योजना में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए नई व्यवस्था लागू कर दी है। आज, 11 मई 2026 को कृषि विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि अब आवेदन प्रक्रिया से लेकर सब्सिडी (अनुदान) के वितरण तक की प्रणाली को और अधिक पारदर्शी और सरल बना दिया गया है।
क्या है तारबंदी योजना और इसकी आवश्यकता?
श्रीगंगानगर जिला अपनी नहरों और उपजाऊ भूमि के लिए जाना जाता है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यहाँ के किसान आवारा पशुओं और नीलगायों (रोजड़े) की समस्या से बेहद परेशान रहे हैं। रात भर जागकर फसलों की रखवाली करना किसानों की मजबूरी बन गई थी। कटीले तारों से खेतों की घेराबंदी (Fencing) करना काफी खर्चीला काम है, जिसे देखते हुए सरकार ने इस योजना के माध्यम से किसानों को आर्थिक मदद देने का निर्णय लिया है।
नई व्यवस्था के मुख्य बदलाव: क्या बदला है?
राज्य सरकार द्वारा जारी नई गाइडलाइंस के अनुसार, योजना को अब और भी “किसान-अनुकूल” बनाया गया है:
1. सामूहिक और व्यक्तिगत पात्रता में ढील: पहले तारबंदी योजना का लाभ लेने के लिए न्यूनतम भूमि की सीमा काफी सख्त थी। अब नई व्यवस्था के तहत छोटे और सीमांत किसानों को प्राथमिकता दी जा रही है। यदि किसी किसान के पास कम भूमि है, तो वह अपने पड़ोसी किसानों के साथ मिलकर ‘समूह’ (Group) में आवेदन कर सकता है। समूह के लिए न्यूनतम भूमि की सीमा को अब और व्यावहारिक बना दिया गया है।
2. सब्सिडी (अनुदान) की राशि में वृद्धि: सरकार ने लागत के अनुपात में सब्सिडी की सीमा को संशोधित किया है। सामान्य श्रेणी के किसानों को अब लागत का 50% (अधिकतम 40,000 रुपये) तक का अनुदान दिया जा रहा है। वहीं, लघु एवं सीमांत किसानों के लिए यह राशि 60% (अधिकतम 48,000 रुपये) तक रखी गई है।
3. ‘पहले आओ-पहले पाओ’ का आधार: नई व्यवस्था के तहत आवेदनों का निस्तारण ‘पहले आओ-पहले पाओ’ (First Come, First Serve) के आधार पर किया जा रहा है। इससे उन किसानों को लाभ मिलेगा जो अपनी फसलों को बचाने के लिए तत्पर हैं और जिनके पास आवश्यक दस्तावेज तैयार हैं।
आवेदन के लिए आवश्यक दस्तावेज और पात्रता
श्रीगंगानगर कृषि विभाग के अनुसार, इच्छुक किसानों को निम्नलिखित पात्रता और दस्तावेज पूरे करने होंगे:
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भूमि स्वामित्व: किसान के पास कम से कम 1.5 हेक्टेयर कृषि भूमि एक ही स्थान पर होनी चाहिए (सामूहिक आवेदन की स्थिति में छूट संभव)।
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दस्तावेज: आधार कार्ड, जन आधार कार्ड, बैंक खाते की पासबुक की फोटोकॉपी, और जमाबंदी (नकल) जो 6 महीने से पुरानी न हो।
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शपथ पत्र: किसान को यह शपथ पत्र देना होगा कि उसने पहले कभी इस योजना का लाभ नहीं लिया है।
डिजिटल प्रक्रिया: ‘राज किसान साथी’ पोर्टल
अब किसानों को दफ्तरों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं है। नई व्यवस्था के तहत सारा काम ऑनलाइन कर दिया गया है। किसान नजदीकी ई-मित्र केंद्र पर जाकर या स्वयं ‘राज किसान साथी’ पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के बाद कृषि पर्यवेक्षक (Agri-Supervisor) द्वारा खेत का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) किया जाएगा, जिसके बाद अनुदान राशि सीधे किसान के बैंक खाते (DBT) में ट्रांसफर कर दी जाएगी।
श्रीगंगानगर के किसानों पर प्रभाव
श्रीगंगानगर जिले में गेहूँ, नरमा (कपास) और किन्नू के बागान बड़ी मात्रा में हैं। आवारा पशु अक्सर इन फसलों को भारी नुकसान पहुँचाते हैं। स्थानीय किसानों का कहना है कि तारबंदी होने से न केवल उनकी फसल सुरक्षित होगी, बल्कि उनकी रात की नींद भी सुकून भरी होगी।
कृषि अधिकारियों की अपील: जिला कृषि उपनिदेशक ने किसानों से अपील की है कि वे किसी भी बिचौलिए के झांसे में न आएं और सीधे पोर्टल के माध्यम से आवेदन करें। उन्होंने बताया कि इस बार जिले के लिए विशेष बजट आवंटित किया गया है ताकि अधिक से अधिक किसानों को लाभान्वित किया जा सके।
निष्कर्ष: राजस्थान सरकार की यह नई तारबंदी व्यवस्था श्रीगंगानगर के किसानों के लिए एक रक्षा कवच की तरह है। समय पर आवेदन और पारदर्शी प्रक्रिया से न केवल उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि किसान का आर्थिक बोझ भी कम होगा। यदि आप भी एक किसान हैं, तो तुरंत अपने दस्तावेजों की जांच करें और इस योजना का लाभ उठाएं।