
श्रीगंगानगर। सीमावर्ती और मरुस्थलीय जिला श्रीगंगानगर पिछले काफी समय से सूरज के तीखे तेवरों और जानलेवा लू (Heatwave) की मार झेल रहा था। आसमान से बरसती आग और 47 डिग्री सेल्सियस के पार जा चुके रिकॉर्ड तोड़ पारे ने आम जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया था। दोपहर के समय सड़कें सूनी हो जाती थीं और लोग घरों में कैद होने को मजबूर थे। लेकिन 16 जून को मौसम ने अचानक करवट बदली, जिससे गंगानगर वासियों को इस भीषण ‘समर टॉर्चर’ से काफी हद तक राहत मिली है। पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के सक्रिय होने के कारण शहर के तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे पिछले कई दिनों से जारी भीषण हीटवेव का दौर फिलहाल थम गया है।
47°C से गिरकर 41°C पर आया पारा
मंगलवार, 16 जून को श्रीगंगानगर का अधिकतम तापमान 41°C रिकॉर्ड किया गया, जो पिछले दिनों के मुकाबले करीब 5 से 6 डिग्री कम है। वहीं, रात और सुबह के समय मौसम में घुली ठंडक के कारण न्यूनतम तापमान भी गिरकर 28°C के आसपास पहुंच गया है। हालांकि 41 डिग्री तापमान भी कम नहीं होता, लेकिन पिछले दिनों पड़े 47.5 डिग्री से अधिक के झुलसाने वाले टॉर्चर के सामने यह तापमान स्थानीय लोगों के लिए किसी बड़ी राहत से कम नहीं है। सुबह से ही आसमान में हल्के बादलों की आवाजाही और धूल भरी तेज ठंडी हवाओं के चलने से हवा में घुली तपन काफी कम महसूस की गई।
पश्चिमी विक्षोभ और धूल भरी आंधियों का असर
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस राहत की मुख्य वजह उत्तर-पश्चिमी भारत में एक नया पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) सक्रिय होना है। इस मौसमी तंत्र के प्रभाव से पाकिस्तान की ओर से आने वाली ठंडी और नमी युक्त हवाओं ने राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों में प्रवेश किया। इसके प्रभाव से मंगलवार सुबह से ही श्रीगंगानगर और आसपास के ग्रामीण अंचलों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से धूल भरी तेज हवाएं और आंधियां चलने लगीं। इन तेज हवाओं ने वायुमंडल में जमी हीट को काफी हद तक कम कर दिया, जिससे सूरज की किरणें सीधे जमीन तक नहीं पहुंच पाईं और लोगों को चुभती गर्मी से निजात मिली।
आम जनजीवन और बाजारों में लौटी रौनक
तापमान में आई इस गिरावट का सीधा असर श्रीगंगानगर के जनजीवन पर देखने को मिला। पिछले कई दिनों से जो बाजार दोपहर 12 बजे ही पूरी तरह वीरान हो जाते थे, वहां मंगलवार को थोड़ी चहल-पहल देखी गई। लोग जरूरी कामकाज के लिए दोपहर में भी बाहर निकलते नजर आए। वाहन चालकों को भी झुलसाने वाली लू के थपेड़ों से राहत मिली। पार्कों और सार्वजनिक स्थानों पर शाम के समय लोगों की भारी भीड़ उमड़ी, जहां लोगों ने ठंडी हवाओं का लुत्फ उठाया।
फसलों के लिए कैसा है यह मौसम?
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि तापमान में आई यह गिरावट इस समय खेतों में खड़ी नरमा-कपास और ग्वार की अगेती फसलों के लिए काफी फायदेमंद है। अत्यधिक तापमान (47°C+) के कारण पौधे झुलस रहे थे और उन्हें अतिरिक्त सिंचाई की जरूरत पड़ रही थी। पारा 41 डिग्री पर आने से पौधों को पनपने का मौका मिलेगा। हालांकि, विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि अगर तेज आंधी चलती है, तो खेतों में सिंचाई का काम थोड़ा रोक दें ताकि तेज हवाओं से फसलें आड़ी न गिरें।
मौसम विभाग का आगामी पूर्वानुमान: आंधी और बूंदाबांदी के आसार
मौसम केंद्र जयपुर के अनुसार, श्रीगंगानगर और आसपास के इलाकों में इस पश्चिमी विक्षोभ का असर अगले 1 से 2 दिनों तक और देखा जा सकता है। मौसम विभाग ने आगामी 24 से 48 घंटों के लिए चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि:
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इलाके में धूल भरी तेज आंधियां (Dust Storm) चलने का सिलसिला जारी रहेगा।
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कुछ संवेदनशील और ग्रामीण क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ हल्की बूंदाबांदी या मेघगर्जन की प्रबल संभावना बनी हुई है।
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इस दौरान अधिकतम तापमान 40 से 42 डिग्री के बीच ही बने रहने के आसार हैं, जिससे आने वाले कुछ दिनों तक दोबारा गंभीर हीटवेव (Severe Heatwave) की स्थिति बनने की उम्मीद नहीं है।
भले ही यह राहत कुछ दिनों की हो, लेकिन मानसून के आगमन से पहले श्रीगंगानगर के लोगों के लिए मौसम का यह बदला हुआ मिजाज एक बड़ी संजीवनी साबित हो रहा है।