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मौसम अपडेट: पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने से आंधी और बारिश, गर्मी से मिली आंशिक राहत

जून का महीना आते ही राजस्थान का सीमावर्ती जिला श्रीगंगानगर अमूमन भट्टी की तरह तपने लगता है। सूरज की सीधी किरणें और थार मरुस्थल से उठने वाली गर्म हवाएं (लू) यहाँ के जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर देती हैं। इस साल भी जून के शुरुआती दस दिनों में तापमान लगातार 46 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना हुआ था, जिसने पिछले कई सालों के रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। लोग घरों में कैद होने को मजबूर थे और दोपहर के समय सड़कों पर कर्फ्यू जैसा सन्नाटा पसरा रहता था।

लेकिन, शुक्रवार यानी 12 जून को प्रकृति ने अचानक करवट बदली। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के पूर्वानुमान के अनुसार, क्षेत्र में एक नया पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) सक्रिय हुआ। इस मौसमी प्रणाली के असर से दोपहर बाद आसमान में घने काले बादलों का डेरा जम गया और देखते ही देखते पूरे जिले में तेज धूल भरी आंधी का दौर शुरू हो गया।

धूल भरी आंधी और रिकॉर्ड तोड़ बारिश

दोपहर के समय जब लोग भीषण गर्मी से बेहाल थे, तभी अचानक हवा की दिशा बदली और लगभग 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से अंधड़ (धूल भरी आंधी) चलने लगा। आंधी इतनी तेज थी कि कई जगहों पर दृश्यता (Visibility) घटकर बेहद कम रह गई, जिससे राष्ट्रीय राजमार्ग और शहर की मुख्य सड़कों पर वाहनों की रफ्तार थम गई। वाहन चालकों को दिन में ही हेडलाइट जलानी पड़ी।

आंधी के कुछ ही देर बाद बादलों की गड़गड़ाहट के साथ झमाझम बारिश का दौर शुरू हुआ। श्रीगंगानगर तहसील और आसपास के ग्रामीण इलाकों में मूसलाधार बारिश दर्ज की गई। मौसम केंद्र के आंकड़ों के मुताबिक, जिले के कुछ हिस्सों में रिकॉर्ड 52 मिलीमीटर (mm) तक बारिश दर्ज की गई है। जून के महीने में इस तरह की भारी बारिश को इस सीजन की सबसे बड़ी प्री-मानसून गतिविधि माना जा रहा है। शहर के निचले इलाकों, जैसे कि मुख्य बाजार, कलेक्ट्रेट परिसर और कुछ रिहायशी कॉलोनियों में सड़कों पर पानी जमा हो गया, जिससे नगर परिषद के ड्रेनेज सिस्टम की पोल भी खुल गई।

तापमान में भारी गिरावट, गर्मी से मिली राहत

इस तेज बारिश और आंधी का सबसे सकारात्मक असर तापमान पर पड़ा। पिछले कई दिनों से जो अधिकतम तापमान 46.4 डिग्री सेल्सियस के आसपास मंडरा रहा था, वह अचानक लुढ़क कर 44.6 डिग्री सेल्सियस पर आ गया। न्यूनतम तापमान में भी भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे रात के समय उमस और गर्मी से परेशान लोगों ने चैन की सांस ली।

चिलचिलाती धूप और गर्म थपेड़ों से जूझ रहे गंगानगर वासियों के लिए यह बारिश किसी वरदान से कम नहीं थी। शाम के समय मौसम सुहावना होने पर लोग पार्कों और बाजारों में घूमते नजर आए। बच्चों ने घरों की छतों पर और गलियों में बारिश का जमकर लुत्फ उठाया।

कृषि और आम जनजीवन पर असर

मौसम का यह यू-टर्न आम जनता के लिए राहत लेकर आया है, लेकिन कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को थोड़ा सतर्क रहने की सलाह दी है। कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह बारिश आगामी खरीफ फसलों (जैसे कपास, ग्वार और नरमा) की बुवाई के लिए तो फायदेमंद साबित हो सकती है, क्योंकि इससे मिट्टी में नमी बढ़ेगी।

हालांकि, जिन किसानों ने हाल ही में अपनी फसलों की बिजाई की है या जिनका अनाज मंडियों में खुले में पड़ा है, उन्हें नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसे देखते हुए कृषि उपज मंडी समिति ने किसानों और व्यापारियों को निर्देश जारी किए हैं कि वे अपने अनाज को तिरपाल से ढककर रखें या सुरक्षित शेड के नीचे शिफ्ट करें, ताकि फसलों को भीगने से बचाया जा सके।

15 जून तक के लिए ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी

जयपुर मौसम केंद्र के निदेशक के अनुसार, इस पश्चिमी विक्षोभ का असर अभी खत्म नहीं हुआ है। विभाग ने श्रीगंगानगर सहित बीकानेर संभाग के कई जिलों में 15 जून तक आंधी, तेज हवाओं और हल्की से मध्यम बारिश का दौर जारी रहने की संभावना जताई है। मौसम विभाग ने इसके लिए बकायदा ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया है और आम जनता से अपील की है कि आंधी-तूफान के समय बिजली के खंभों, बड़े पेड़ों और कच्चे मकानों के पास शरण न लें।

निश्चित रूप से, 12 जून को हुई इस भारी बारिश ने श्रीगंगानगर को भीषण हीटवेव (Heatwave) के प्रकोप से बचा लिया है। हालांकि यह राहत अस्थायी है क्योंकि मानसून आने में अभी वक्त है, लेकिन इस प्री-मानसून बौछार ने तपते गंगानगर को कुछ दिनों के लिए ठंडी राहत जरूर दे दी है।

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