
श्रीगंगानगर। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए सरकार द्वारा करोड़ों रुपये का बजट आवंटित किया जाता है, लेकिन धरातल पर भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका एक ताजा उदाहरण मम्मड़खेड़ा गांव में देखने को मिला है। यहाँ ग्रामीण विकास योजनाओं के अंतर्गत बनाई गई एक 600 फीट लंबी इंटरलॉकिंग टाइल्स (सड़क) के निर्माण में भारी अनियमितता पाए जाने के बाद प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। जांच रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि सड़क में इस्तेमाल किए गए सीमेंट ब्लॉक निर्धारित गुणवत्ता मानकों से तीन गुना अधिक कमजोर थे।
कैसे हुआ खुलाशा? ग्रामीणों की सतर्कता ने पकड़ी चोरी
मम्मड़खेड़ा गांव में इस सड़क का निर्माण हाल ही में पूरा किया गया था। निर्माण के कुछ ही दिनों बाद, भारी वाहनों का भार तो दूर, सामान्य आवाजाही से ही टाइल्स टूटने और धंसने लगीं। ग्रामीणों ने जब टाइल्स को उठाकर देखा, तो वे हाथ से मारने पर ही बिखर रही थीं। भ्रष्टाचार की बू आते ही ग्रामीणों ने इसकी शिकायत जिला परिषद और संबंधित विभाग के उच्च अधिकारियों से की। ग्रामीणों का आरोप था कि ठेकेदार ने अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर घटिया सामग्री का उपयोग किया और सरकारी धन का दुरुपयोग किया है।
तकनीकी जांच: मानकों से तीन गुना कमजोर निकले ब्लॉक
शिकायत की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने एक तकनीकी टीम का गठन किया, जिसने मौके पर पहुंचकर सड़क के अलग-अलग हिस्सों से सीमेंट ब्लॉक्स के नमूने (Samples) लिए। प्रयोगशाला में हुई जांच के परिणामों ने सबको हैरान कर दिया।
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निर्धारित मानक: सरकारी नियमानुसार, इंटरलॉकिंग सड़क के लिए इस्तेमाल होने वाले ब्लॉक्स की मजबूती (Compressive Strength) एक निश्चित स्तर पर होनी चाहिए ताकि वे भारी भार सह सकें।
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जांच रिपोर्ट: मम्मड़खेड़ा में लगे ब्लॉक मानकों की तुलना में तीन गुना कम दबाव पर ही टूट गए। इसके अलावा, सड़क के नीचे डाली जाने वाली बेस सामग्री (मिट्टी और कंक्रीट का मिश्रण) की मोटाई भी मापदंडों के अनुसार नहीं पाई गई।
प्रशासनिक कार्रवाई: ठेकेदार और अधिकारियों पर गाज
जांच रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद, जिला प्रशासन और संबंधित विकास विभाग ने तत्काल प्रभाव से कार्रवाई शुरू कर दी है।
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FIR की तैयारी: दोषी ठेकेदार के खिलाफ धोखाधड़ी और सरकारी धन के गबन के आरोपों में मामला दर्ज करने के लिए रिपोर्ट तैयार की गई है। साथ ही, ठेकेदार को ‘ब्लैकलिस्ट’ करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
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जिम्मेदार अधिकारियों पर शिकंजा: निर्माण कार्य की देखरेख करने वाले कनिष्ठ अभियंता (JEN) और सहायक अभियंता (AEN) की भूमिका की भी जांच की जा रही है। विभाग का मानना है कि बिना अधिकारियों की शह या लापरवाही के इतना बड़ा भ्रष्टाचार संभव नहीं था।
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भुगतान पर रोक: इस सड़क निर्माण के लिए होने वाले अंतिम भुगतान (Final Payment) पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है और पूर्व में दिए गए भुगतान की वसूली के निर्देश दिए गए हैं।
भ्रष्टाचार का असर: विकास कार्यों पर सवाल
यह घटना केवल मम्मड़खेड़ा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जिले में चल रहे अन्य विकास कार्यों की पारदर्शिता पर भी सवालिया निशान लगाती है। घटिया निर्माण के कारण न केवल सरकारी खजाने को चूना लगता है, बल्कि सड़क के जल्दी टूट जाने से ग्रामीणों को फिर से उसी कीचड़ और बदहाली का सामना करना पड़ता है, जिससे निजात दिलाने के लिए यह योजना लाई गई थी।
निष्कर्ष और संदेश
मम्मड़खेड़ा के इस मामले में प्रशासन की त्वरित कार्रवाई ने भ्रष्टाचार के खिलाफ एक कड़ा संदेश दिया है। जिला कलेक्टर ने स्पष्ट किया है कि निर्माण कार्यों में “जीरो टॉलरेंस” की नीति अपनाई जाएगी। यदि किसी अन्य गांव में भी इस तरह की लापरवाही पाई जाती है, तो वहां भी इसी तरह की कठोर कार्रवाई की जाएगी। ग्रामीणों ने प्रशासन के इस कदम का स्वागत किया है, लेकिन उनकी मांग है कि सड़क का पुनर्निर्माण ठेकेदार के खर्च पर ही कराया जाए।
नोट: प्रशासन ने जिले के अन्य गांवों के सरपंचों और विकास समितियों को भी सचेत किया है कि वे अपने क्षेत्र में हो रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर पैनी नजर रखें।