
राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले की अंतरराष्ट्रीय सीमा (IB) इन दिनों रणनीतिक और सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील बनी हुई है। पाकिस्तान के साथ लगती 500 किलोमीटर से लंबी सीमा के इस महत्वपूर्ण हिस्से में सीमा सुरक्षा बल (BSF) और स्थानीय पुलिस ने ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपना रखी है। हाल के दिनों में सीमा पार से हुई ड्रोन गतिविधियों ने सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रहने के लिए मजबूर कर दिया है।
1. ड्रोन: तस्करी का नया और घातक हथियार
पिछले कुछ वर्षों में तस्करी के पारंपरिक तरीकों की जगह अब ‘ड्रोन’ ने ले ली है। श्रीगंगानगर के रायसिंहनगर, श्रीकरणपुर और अनूपगढ़ सेक्टरों में पाकिस्तानी तस्करों द्वारा ड्रोन के जरिए नशीले पदार्थों (विशेषकर हेरोइन) और हथियारों की खेप भेजने की घटनाएं बढ़ी हैं।
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ताजा मामला: जनवरी 2026 के पहले सप्ताह में, रावला पुलिस और बीएसएफ ने एक संयुक्त अभियान चलाकर करीब 20 करोड़ रुपये मूल्य की हेरोइन जब्त की, जिसे ड्रोन के जरिए भारतीय सीमा में गिराया गया था। इस मामले में पुलिस ने तीन तस्करों को भी गिरफ्तार किया है।
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खतरा: ड्रोन न केवल तस्करी के लिए बल्कि जासूसी और रेकी के लिए भी इस्तेमाल किए जा रहे हैं। घने कोहरे का फायदा उठाकर ये छोटे यूएवी (UAV) रडार की नजरों से बचकर सीमा लांघने की कोशिश करते हैं।
2. अभेद्य सुरक्षा: हाईटेक सीसीटीवी और सेंसर का जाल
ड्रोन के बढ़ते खतरों से निपटने के लिए बीएसएफ ने अब तकनीकी रूप से खुद को अपग्रेड किया है। सीमा पर निगरानी के लिए अब केवल शारीरिक गश्त (Patrolling) पर निर्भरता नहीं रही:
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स्मार्ट फेंसिंग: श्रीगंगानगर के संवेदनशील पॉइंट्स पर हाई-रेजोल्यूशन सीसीटीवी कैमरों और थर्मल इमेजर का जाल बिछाया गया है। ये कैमरे अंधेरे और घने कोहरे में भी 2-3 किलोमीटर दूर तक की हलचल पकड़ लेते हैं।
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एंटी-ड्रोन सिस्टम: सीमा पर कई जगहों पर अत्याधुनिक एंटी-ड्रोन गन और जैमर्स तैनात किए गए हैं। ये सिस्टम ड्रोन के रेडियो फ्रीक्वेंसी को जाम कर देते हैं या उन्हें मार गिराते हैं।
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ड्रोन फॉरेंसिक लैब: पकड़े गए ड्रोनों की जांच के लिए अब फॉरेंसिक मदद ली जा रही है, जिससे यह पता चलता है कि ड्रोन ने पाकिस्तान में कहां से उड़ान भरी थी और उसके पिछले ‘सॉर्टी’ रिकॉर्ड्स क्या थे।
3. ‘ऑपरेशन अलर्ट’ और स्थानीय सहयोग
भीषण ठंड और शून्य दृश्यता (Zero Visibility) के बीच बीएसएफ के जवान सीमा पर मुस्तैदी से डटे हुए हैं।
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ऑपरेशन सर्द हवा: जनवरी के महीने में गणतंत्र दिवस की सुरक्षा के मद्देनजर ‘ऑपरेशन सर्द हवा’ के तहत सीमा पर जवानों की संख्या दोगुनी कर दी गई है।
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ग्रामीणों की भूमिका: बीएसएफ ने सीमावर्ती गांवों के लोगों के साथ मजबूत नेटवर्क तैयार किया है। ग्रामीणों को ‘विलेज डिफेंस कमिटी’ के माध्यम से प्रशिक्षित किया गया है ताकि वे किसी भी संदिग्ध ड्रोन की आवाज सुनते ही तुरंत सूचना साझा करें।
[Table: सीमा पर सुरक्षा के मुख्य स्तंभ]
| सुरक्षा घटक | विवरण |
| निगरानी | 24/7 थर्मल इमेजर और डे-नाइट कैमरे |
| तकनीक | एंटी-ड्रोन जैमर्स और रडार प्रणाली |
| गश्त | ऊंट, फुट और वाहन गश्त का समन्वय |
| खुफिया तंत्र | ग्रामीणों और खुफिया एजेंसियों से रीयल-टाइम डेटा |
4. प्रशासनिक प्रतिबंध
सुरक्षा कारणों से श्रीगंगानगर जिला प्रशासन ने पूरे जिले में निजी ड्रोन उड़ाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा रखा है। किसी भी शादी-समारोह या व्यावसायिक कार्यक्रम के लिए ड्रोन का उपयोग करना कानूनी अपराध की श्रेणी में आता है और इसके लिए सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति अनिवार्य है।
निष्कर्ष:
श्रीगंगानगर सेक्टर में भारत-पाक सीमा अब सिर्फ कंटीले तारों का घेरा नहीं है, बल्कि यह एक हाई-टेक इलेक्ट्रॉनिक दीवार में बदल चुकी है। ड्रोन की चुनौतियों के बावजूद, बीएसएफ की सतर्कता ने पाकिस्तान के नापाक मंसूबों को बार-बार नाकाम किया है।