7 फरवरी, 2026 को भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका ने एक अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Deal) पर हस्ताक्षर कर अपने आर्थिक संबंधों को एक नई ऊंचाई पर पहुँचा दिया है। यह समझौता न केवल दोनों देशों के द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देगा, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) में भारत की स्थिति को भी मजबूत करेगा।
समझौते के मुख्य बिंदु
इस समझौते का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा अमेरिका द्वारा भारतीय सामानों पर लगाए गए 25% अतिरिक्त शुल्क (Additional Tariffs) को हटाना है। यह शुल्क पिछले कुछ समय से भारतीय इस्पात (Steel) और एल्युमीनियम निर्यातकों के लिए एक बड़ी बाधा बना हुआ था।
मुख्य बदलाव निम्नलिखित हैं:
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भारतीय निर्यातकों को राहत: अतिरिक्त शुल्क हटने से भारतीय स्टील और एल्युमीनियम उद्योग को अमेरिकी बाजार में सीधे प्रतिस्पर्धा करने का मौका मिलेगा। इससे भारतीय निर्यात में सालाना लगभग $2-3 बिलियन की वृद्धि होने का अनुमान है।
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अमेरिकी कृषि और औद्योगिक उत्पादों पर रियायत: जवाब में, भारत ने भी अमेरिकी कृषि उत्पादों (जैसे बादाम, अखरोट और सेब) और कुछ उच्च-तकनीकी औद्योगिक मशीनरी पर आयात शुल्क (Import Duty) कम करने पर सहमति जताई है।
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MSME क्षेत्र को बढ़ावा: वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, यह समझौता भारत के लघु और मध्यम उद्योगों (MSMEs) के लिए अमेरिकी बाजार के दरवाजे खोलेगा, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
वाणिज्य मंत्री का दृष्टिकोण: ‘समान और संतुलित’
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने इस सौदे को ‘समान और संतुलित’ करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह समझौता भारत के घरेलू हितों की रक्षा करते हुए किया गया है। भारत ने अपने संवेदनशील डेयरी और पोल्ट्री क्षेत्रों को फिलहाल इस रियायत से बाहर रखा है ताकि स्थानीय किसानों के हितों को नुकसान न पहुँचे।
यह समझौता भारत की ‘मेक इन इंडिया’ पहल को भी बल देता है। जब भारतीय निर्माताओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कम करों का सामना करना पड़ेगा, तो देश में विनिर्माण की गति और तेज होगी।
भू-राजनीतिक और आर्थिक महत्व
यह समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, इसके गहरे भू-राजनीतिक मायने भी हैं:
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चीन पर निर्भरता कम करना: अमेरिका और भारत दोनों ही वैश्विक व्यापार में चीन पर अपनी निर्भरता कम करना चाहते हैं। यह समझौता ‘फ्रेंड-शोरिंग’ (Friend-shoring) की दिशा में एक बड़ा कदम है, जहाँ मित्र राष्ट्र आपस में व्यापारिक संबंधों को प्राथमिकता देते हैं।
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रणनीतिक साझेदारी: रक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्र के बाद अब व्यापार में भी दोनों देश एक-दूसरे के सबसे बड़े भागीदार बनने की ओर अग्रसर हैं।
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पूर्ण FTA की ओर कदम: विशेषज्ञ इसे भविष्य में होने वाले पूर्ण मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement – FTA) के लिए एक ‘बिल्डिंग ब्लॉक’ मान रहे हैं।
निष्कर्ष
निष्कर्षतः, 7 फरवरी का यह दिन भारत की आर्थिक कूटनीति की एक बड़ी जीत है। जहाँ एक ओर भारतीय निर्यातकों को वैश्विक बाजार में बढ़त मिलेगी, वहीं दूसरी ओर उपभोक्ताओं को अमेरिकी तकनीक और उत्पाद प्रतिस्पर्धी कीमतों पर मिल सकेंगे। यह समझौता अगले दशक में भारत को $5 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनाने के सपने को साकार करने में एक उत्प्रेरक (Catalyst) का काम करेगा।