
श्रीगंगानगर: राजस्थान का सीमावर्ती जिला श्रीगंगानगर इन दिनों आग उगल रहा है। अप्रैल के महीने में ही पारा $43^\circ\text{C}$ के पार जा चुका है, जिसने पिछले कई सालों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। इस भीषण गर्मी और आसमान से बरसती आग का सबसे बुरा असर स्कूली बच्चों पर पड़ रहा है। लगातार बढ़ते तापमान और ‘लू’ (Heatwave) के घातक प्रकोप को देखते हुए अब जिला प्रशासन स्कूलों के समय में बड़े बदलाव करने पर गंभीरता से विचार कर रहा है।
भीषण गर्मी और बच्चों की सेहत पर खतरा
श्रीगंगानगर में दोपहर के समय चलने वाली गर्म हवाएं शरीर को झुलसा देने वाली होती हैं। वर्तमान में अधिकांश निजी और सरकारी स्कूल दोपहर 1:00 या 2:00 बजे तक संचालित हो रहे हैं। छुट्टी के समय जब बच्चे घर लौटते हैं, तब सूरज अपने पूरे शबाब पर होता है।
डॉक्टरों का कहना है कि छोटे बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता वयस्कों की तुलना में कम होती है, जिससे उन्हें हीट स्ट्रोक (Heat Stroke), डिहाइड्रेशन, सिरदर्द और बुखार जैसी समस्याओं का खतरा अधिक रहता है। अस्पतालों में पिछले दो-तीन दिनों में ऐसे बच्चों की संख्या बढ़ी है जो तेज धूप के कारण बीमार हुए हैं। इसी को आधार बनाकर अभिभावकों ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि स्कूलों का समय बदला जाए।
अभिभावकों और शिक्षक संघों की मांग
जिले के विभिन्न अभिभावक संघों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि स्कूलों का समय सुबह 7:30 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक कर दिया जाए। अभिभावकों का तर्क है कि दोपहर 12 बजे के बाद धूप इतनी तेज हो जाती है कि दोपहिया वाहनों या पैदल घर जाने वाले बच्चों के लिए उसे सहन करना नामुमकिन हो जाता है।
शिक्षक संघों ने भी इस मांग का समर्थन किया है। शिक्षकों का कहना है कि कक्षा के कमरों में टीन शेड या पर्याप्त वेंटिलेशन न होने के कारण दोपहर के समय बच्चे पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते हैं। गर्मी के कारण बच्चों की उपस्थिति में भी गिरावट दर्ज की जा रही है।
मौसम विभाग की डरावनी चेतावनी
प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय मौसम केंद्र द्वारा जारी की गई ताजा चेतावनी है। मौसम विभाग के अनुसार, 24 अप्रैल 2026 से पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव और पाकिस्तान से आने वाली गर्म हवाओं के कारण लू का प्रकोप और अधिक तेज होगा। अगले 4-5 दिनों तक तापमान में $1^\circ\text{C}$ से $2^\circ\text{C}$ की और बढ़ोतरी होने की संभावना है। ऐसे में यदि समय रहते स्कूलों के समय में कटौती नहीं की गई, तो स्थिति गंभीर हो सकती है।
जिला प्रशासन की तैयारी
सूत्रों के अनुसार, जिला कलेक्टर ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ एक आपात बैठक बुलाई है। प्रशासन दो विकल्पों पर विचार कर रहा है:
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समय में बदलाव: सभी सरकारी और निजी स्कूलों को सुबह जल्दी बुलाकर दोपहर 12 बजे तक छुट्टी दे देना।
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छोटे बच्चों के लिए अवकाश: प्राथमिक स्तर (कक्षा 1 से 5) तक के बच्चों के लिए कुछ दिनों का अवकाश घोषित करना या उन्हें केवल सुबह के सत्र में बुलाना।
शिक्षा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “हम बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहे हैं। मौसम विभाग की रिपोर्ट और अभिभावकों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए जल्द ही नए समय सारणी (Time Table) के आदेश जारी किए जा सकते हैं।”
डिजिटल और ऑनलाइन पढ़ाई का विकल्प
कुछ निजी स्कूलों ने इस स्थिति से निपटने के लिए हाइब्रिड मॉडल (Online + Offline) पर भी विचार करना शुरू कर दिया है, ताकि यदि गर्मी और बढ़ती है तो बच्चों की पढ़ाई का नुकसान न हो। हालांकि, ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट की सीमित पहुँच के कारण यह विकल्प केवल शहरी इलाकों तक ही सीमित है।
निष्कर्ष
श्रीगंगानगर की भौगोलिक स्थिति इसे राजस्थान के सबसे गर्म क्षेत्रों में से एक बनाती है। वर्तमान में जो हालात हैं, वे सामान्य नहीं हैं। बच्चों का स्वास्थ्य किसी भी शैक्षणिक सत्र से अधिक महत्वपूर्ण है। उम्मीद है कि जिला प्रशासन 24 अप्रैल की चेतावनी से पहले ही उचित निर्णय लेकर जिले के हजारों नौनिहालों को इस तपती गर्मी से राहत प्रदान करेगा।
तब तक, स्वास्थ्य विभाग ने अभिभावकों को सलाह दी है कि बच्चों को स्कूल भेजते समय उनके साथ पानी की बोतल, ग्लूकोज और सिर ढकने के लिए टोपी या तौलिया जरूर रखें।