
श्रीगंगानगर। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा 1 फरवरी 2026 को पेश किए गए केंद्रीय बजट में कृषि और ग्रामीण विकास के लिए 1,62,671 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। श्रीगंगानगर जैसे सिंचित कृषि प्रधान जिले के लिए इस बजट में तकनीक और विविधीकरण पर जोर दिया गया है, लेकिन स्थानीय किसानों की कुछ पुरानी मांगें अभी भी अधूरी महसूस हो रही हैं।
तकनीकी क्रांति: ‘भारत विस्तार’ और एआई (AI)
बजट की सबसे बड़ी घोषणाओं में से एक ‘भारत विस्तार’ (Bharat Vistar) नामक एक बहुभाषी एआई टूल का लॉन्च है। यह टूल ‘एग्रीस्टैक’ पोर्टल्स और ICAR की तकनीकों को सीधे किसानों के फोन तक पहुँचाएगा। श्रीगंगानगर के शिक्षित और प्रगतिशील किसानों के लिए यह वरदान साबित हो सकता है, जिससे उन्हें कीट प्रबंधन, मौसम की सटीक जानकारी और फसल नियोजन में एआई आधारित सलाह मिलेगी।
सिंचाई और जल प्रबंधन: एक मुख्य चिंता
श्रीगंगानगर की खेती पूरी तरह से गंगनहर, इंदिरा गांधी नहर और भाखड़ा नहर प्रणालियों पर टिकी है। बजट में 500 जलाशयों और अमृत सरोवरों के एकीकृत विकास की बात कही गई है। हालांकि, स्थानीय किसान गंगनहर और फिरोजपुर फीडर के पुनर्निर्माण कार्यों के लिए विशेष पैकेज की उम्मीद कर रहे थे। क्षेत्र के किसान नेताओं का कहना है कि नहरबंदी के दौरान पानी की वैकल्पिक व्यवस्था और पुरानी नहरों की लाइनिंग के लिए अधिक स्पष्ट प्रावधान होने चाहिए थे।
आय बढ़ाने पर जोर: पशुपालन और उच्च मूल्य फसलें
बजट में परंपरागत खेती (गेहूं-सरसों-नरमा) के साथ-साथ आय के अन्य स्रोतों को मजबूत करने का प्रस्ताव है:
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क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी: पशुपालक किसानों के लिए ऋण पर सब्सिडी देने की एक नई योजना शुरू की जाएगी, जिससे श्रीगंगानगर के डेयरी उद्योग को बढ़ावा मिलेगा।
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नारियल और बादाम प्रोत्साहन: हालांकि नारियल तटीय क्षेत्रों के लिए है, लेकिन पहाड़ों और अन्य अनुकूल क्षेत्रों के लिए बादाम व अखरोट की खेती हेतु विशेष सहायता से राजस्थान के शुष्क क्षेत्रों में प्रयोगों की उम्मीद जागी है।
किसानों की मिश्रित प्रतिक्रिया
जहाँ एक तरफ तकनीक और पशुपालन के बजट में वृद्धि का स्वागत हुआ है, वहीं कुछ मोर्चों पर निराशा भी देखी गई। श्रीगंगानगर के किसानों को उम्मीद थी कि:
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पीएम किसान सम्मान निधि: इस योजना की राशि 6,000 से बढ़ाकर 9,000 या 12,000 रुपये की जाएगी, लेकिन इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ।
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MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य): फसलों के लिए एमएसपी की कानूनी गारंटी और लागत के अनुसार मूल्य वृद्धि पर कोई ठोस ऐलान नहीं होने से किसान संगठनों में असंतोष है।
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खाद सब्सिडी: डीएपी और यूरिया की बढ़ती कीमतों को देखते हुए खाद सब्सिडी में बड़ी बढ़ोतरी की मांग अभी भी बरकरार है।
निष्कर्ष: बजट 2026 कृषि को “भविष्य के लिए तैयार” (Future-ready) बनाने की दिशा में एक कदम है, लेकिन श्रीगंगानगर के किसान के लिए असल सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सिंचाई परियोजनाओं के लिए फंड कितनी जल्दी आवंटित होता है।