
श्रीगंगानगर। राजस्थान के अन्न कटोरे कहे जाने वाले श्रीगंगानगर जिले में एक बार फिर पानी को लेकर घमासान शुरू हो गया है। पंजाब के जल संसाधन विभाग द्वारा आगामी 21 जनवरी से 35 दिनों की पूर्ण नहरबंदी की घोषणा ने जिले के हजारों किसानों की चिंता बढ़ा दी है। यह नहरबंदी फिरोजपुर फीडर की मरम्मत और सफाई के नाम पर ली जा रही है, लेकिन समय के चुनाव और अधूरी तैयारियों को लेकर किसानों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
रबी की फसलों पर अस्तित्व का संकट
जनवरी और फरवरी का महीना रबी की फसलों, विशेषकर गेहूं, सरसों और चने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। इस समय फसलों को “कोरवा” (अंतिम सिंचाई) की सख्त जरूरत होती है ताकि दानों का भराव सही तरीके से हो सके।
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खतरा: यदि 35 दिनों तक पानी की आपूर्ति पूरी तरह ठप रहती है, तो खड़ी फसलें सूखने की कगार पर पहुँच जाएंगी।
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आर्थिक नुकसान: किसानों का अनुमान है कि यदि समय पर सिंचाई नहीं हुई, तो प्रति एकड़ पैदावार में 30% से 40% की गिरावट आ सकती है, जिससे करोड़ों रुपये का आर्थिक नुकसान होगा।
हुसैनीवाला हेड और सफाई कार्य पर सवाल
किसानों के गुस्से का मुख्य कारण पंजाब प्रशासन की कार्यप्रणाली है। किसानों का आरोप है कि हुसैनीवाला हेड से निकलने वाली पुरानी बीकानेर कैनाल (गंगनहर) की सफाई का काम अभी तक कागजों से बाहर नहीं निकला है।
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देरी: नहरबंदी की तारीख नजदीक आ गई है, लेकिन मौके पर न तो मशीनरी पहुंची है और न ही मजदूरों की तैनाती हुई है।
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कुप्रबंधन: किसानों का कहना है कि जब विभाग सफाई के लिए तैयार ही नहीं था, तो ऐन फसल के समय नहरबंदी की घोषणा क्यों की गई?
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सिल्ट (मिट्टी) की समस्या: नहरों में जमी भारी सिल्ट के कारण पानी टेल (अंतिम छोर) तक नहीं पहुँच पाता। किसान चाहते थे कि यह काम रबी की बुवाई से पहले या फसल कटने के बाद किया जाता।
सिंचाई विभाग और प्रशासनिक उदासीनता
श्रीगंगानगर के किसान संगठनों ने जिला कलेक्टर और सिंचाई विभाग के अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर इस नहरबंदी को स्थगित करने या इसकी अवधि कम करने की मांग की है। किसानों का तर्क है कि पंजाब सरकार और राजस्थान के सिंचाई विभाग के बीच समन्वय की कमी का खामियाजा आम काश्तकार भुगत रहा है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मरम्मत कार्य अनिवार्य है ताकि भविष्य में नहर टूटने जैसी घटनाओं से बचा जा सके, लेकिन किसान इस दलील से संतुष्ट नहीं हैं।
आंदोलन की चेतावनी: सड़कों पर उतरने की तैयारी
किसान नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि 21 जनवरी से पानी रोका गया, तो वे चुप नहीं बैठेंगे।
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महापड़ाव: विभिन्न गांवों में छोटी बैठकें शुरू हो गई हैं और जल्द ही कलेक्ट्रेट पर महापड़ाव डालने की योजना है।
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चक्का जाम: किसानों ने चेतावनी दी है कि वे न केवल श्रीगंगानगर बल्कि पंजाब-राजस्थान सीमा पर भी आवागमन ठप कर देंगे।
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मांग: किसानों की प्रमुख मांग है कि नहरबंदी को फरवरी के अंत तक टाला जाए या फिर “बारीबंदी” (रोटेशन) के आधार पर कम से कम पीने और आंशिक सिंचाई के लिए पानी छोड़ा जाए।
निष्कर्ष
श्रीगंगानगर के लिए नहरें केवल पानी का स्रोत नहीं, बल्कि जीवन रेखा हैं। फिरोजपुर फीडर से आने वाला पानी यहाँ की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। ऐसे में 35 दिनों की लंबी नहरबंदी किसानों के लिए किसी त्रासदी से कम नहीं है। अब सबकी निगाहें राज्य सरकार और पंजाब प्रशासन के बीच होने वाली संभावित वार्ता पर टिकी हैं।