
श्रीगंगानगर। सरहदी जिले श्रीगंगानगर में पंजाब जल संसाधन विभाग द्वारा फिरोजपुर फीडर के पुनर्निर्माण के लिए प्रस्तावित नहरबंदी ने किसानों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। आज, 9 जनवरी को भारी संख्या में किसानों ने सिंचाई विभाग के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया और चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों को नहीं माना गया, तो 12 जनवरी को कलेक्ट्रेट का बड़ा घेराव किया जाएगा।
मुख्य मुद्दा: सिंचाई के समय नहरबंदी का विरोध
पंजाब जल संसाधन विभाग ने फिरोजपुर फीडर की मरम्मत और रिलाइनिंग (पुनर्निर्माण) के लिए जनवरी के मध्य से नहरबंदी का प्रस्ताव रखा है। किसानों का कहना है कि यह समय रबी की फसलों (गेहूं, सरसों और चने) के लिए सबसे महत्वपूर्ण है।
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फसलों को पानी की जरूरत: जनवरी के महीने में फसलों को आखिरी सिंचाई (कोरवाण) की सख्त आवश्यकता होती है। यदि इस समय नहर बंद होती है, तो उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है।
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किसान मजदूर समिति की मांग: ग्रामीण किसान मजदूर समिति (GKS) ने मांग की है कि प्रस्तावित नहरबंदी को 15 जनवरी के बजाय 1 फरवरी या उसके बाद शुरू किया जाए।
किसानों की प्रमुख मांगें और प्रशासन की स्थिति
किसानों ने अपनी मांगों को लेकर जिला प्रशासन और सिंचाई विभाग के अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा है:
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वैकल्पिक व्यवस्था: नहरबंदी शुरू होने से पहले पुरानी बीकानेर कैनाल और हुसैनीवाला हेड के माध्यम से पानी की वैकल्पिक आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
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अतिरिक्त कोटा: बंदी से पहले गंगनहर में उसके निर्धारित हिस्से से अधिक पानी दिया जाए ताकि किसान अपने खेतों की सिंचाई पूरी कर सकें।
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अधिकारियों की अनभिज्ञता: प्रदर्शन के दौरान जब किसानों ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों से नहरबंदी की सटीक तारीख पूछी, तो उन्होंने स्पष्ट जानकारी होने से इनकार किया, जिससे किसानों का गुस्सा और भड़क गया।
647 करोड़ का प्रोजेक्ट और भविष्य की चिंता
सरकार का तर्क है कि इस 647.62 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट से फिरोजपुर फीडर की क्षमता बढ़ेगी और भविष्य में राजस्थान को पाकिस्तान जाने वाले अतिरिक्त पानी का लाभ मिल सकेगा। हालांकि, किसान नेता रणजीत सिंह राजू और अन्य संगठनों का कहना है कि भविष्य के लाभ के लिए वर्तमान की फसलों को कुर्बान नहीं किया जा सकता।
आंदोलन की अगली रूपरेखा
किसानों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि 12 जनवरी तक सरकार ने वैकल्पिक जल व्यवस्था या नहरबंदी की तिथि आगे बढ़ाने का ठोस आश्वासन नहीं दिया, तो पूरे जिले के किसान कलेक्ट्रेट पर महापड़ाव डालेंगे। फिलहाल, कड़ाके की ठंड के बीच भी किसान अपनी मांगों को लेकर धरना स्थलों पर डटे हुए हैं।