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फिरोजपुर फीडर नहरबंदी विवाद: श्रीगंगानगर के किसानों का कड़ा विरोध और भविष्य का संकट

श्रीगंगानगर, जिसे राजस्थान का ‘धान का कटोरा’ कहा जाता है, एक बार फिर जल संकट और किसानों के आंदोलन की सुगबुगाहट से गूंज रहा है। 6 जनवरी 2026 को पंजाब जल संसाधन विभाग द्वारा फिरोजपुर फीडर के पुनर्निर्माण हेतु प्रस्तावित नहरबंदी के खिलाफ किसानों ने अपने तेवर सख्त कर लिए हैं। किसान मजदूर समिति के नेतृत्व में सैकड़ों किसानों ने जल संसाधन विभाग के कार्यालय के बाहर एकत्र होकर सरकार और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

यह मामला केवल एक निर्माण कार्य का नहीं है, बल्कि सीमावर्ती जिले के हजारों परिवारों की आजीविका और करोड़ों की फसलों के अस्तित्व से जुड़ा है।


विवाद की मुख्य जड़: फिरोजपुर फीडर का पुनर्निर्माण

पंजाब क्षेत्र में स्थित फिरोजपुर फीडर काफी पुरानी हो चुकी है, जिसके कारण पानी का रिसाव और टेल (अंतिम छोर) तक पूरा पानी न पहुंचने की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। पंजाब सरकार इस फीडर के पुनर्निर्माण और लाइनिंग का कार्य करना चाहती है। इसके लिए एक लंबी अवधि की ‘नहरबंदी’ (नहर को बंद करना) प्रस्तावित की गई है।

किसानों की चिंताएँ:

  • फसलों का विनाश: वर्तमान में रबी की फसल (गेहूं, सरसों और जौ) अपने महत्वपूर्ण चरण में है। इस समय फसलों को पानी की सख्त जरूरत होती है। यदि नहरबंदी लंबी खिंचती है, तो खड़ी फसलें सूख जाएंगी।

  • वैकल्पिक व्यवस्था का अभाव: किसानों का मुख्य आरोप है कि प्रशासन ने पानी बंद करने से पहले कोई ठोस वैकल्पिक योजना नहीं बनाई है। पीने के पानी का भंडारण भी सीमित है, जो लंबे समय तक पर्याप्त नहीं होगा।

  • आर्थिक मार: पिछले सीजन में खराब मौसम और कीटों की मार झेल चुके किसानों के लिए यह नहरबंदी आर्थिक रूप से कमर तोड़ने वाली साबित हो सकती है।


6 जनवरी का प्रदर्शन और महापड़ाव की चेतावनी

6 जनवरी को श्रीगंगानगर में हुआ प्रदर्शन किसानों के बढ़ते आक्रोश का प्रतीक है। किसान मजदूर समिति के पदाधिकारियों ने संबोधित करते हुए कहा कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास के नाम पर किसानों की बलि देना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

प्रदर्शन के दौरान निम्नलिखित माँगें प्रमुखता से रखी गईं:

  1. नहरबंदी को रबी की फसल कटने के बाद यानी अप्रैल-मई तक टाला जाए।

  2. यदि पुनर्निर्माण अनिवार्य है, तो इसे टुकड़ों में किया जाए ताकि पानी की आपूर्ति पूरी तरह ठप न हो।

  3. गंग नहर क्षेत्र के किसानों को उनके हिस्से का पूरा पानी सुनिश्चित किया जाए।

महापड़ाव का अल्टीमेटम: किसानों ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 11 जनवरी तक उनकी मांगों पर सकारात्मक विचार नहीं किया गया और प्रस्तावित नहरबंदी को स्थगित नहीं किया गया, तो 12 जनवरी से जिला कलेक्ट्रेट पर अनिश्चितकालीन ‘महापड़ाव’ शुरू किया जाएगा। इसमें पूरे जिले के हजारों किसानों के ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ जुटने की संभावना है।


आगामी संकट और प्रशासन की भूमिका

श्रीगंगानगर के जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के लिए यह स्थिति किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। एक ओर पंजाब सरकार का निर्माण शेड्यूल है, तो दूसरी ओर स्थानीय किसानों का जीवन। यदि समय रहते बीच का रास्ता नहीं निकाला गया, तो यह आंदोलन हिंसक रूप ले सकता है या फिर जिले की कृषि अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुँच सकता है।

निष्कर्ष

फिरोजपुर फीडर का विवाद यह दर्शाता है कि जल प्रबंधन और बुनियादी ढांचे के सुधार के बीच समन्वय का कितना अभाव है। किसान अपने हक की लड़ाई के लिए सड़कों पर हैं और अब सबकी नजरें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।

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