🢀
प्राकृतिक खेती को बढ़ावा: 12 जून के महाकुंभ के लिए श्रीगंगानगर में तैयारियां शुरू

श्रीगंगानगर: राजस्थान के ‘अन्न का कटोरा’ कहे जाने वाले श्रीगंगानगर जिले में इन दिनों कृषि क्षेत्र से जुड़ी एक बेहद सकारात्मक और दूरगामी बदलाव लाने वाली हलचल देखने को मिल रही है। राज्य में प्राकृतिक (Natural) और जैविक खेती (Organic Farming) को एक बड़े आंदोलन का रूप देने के लिए आगामी 12 जून को राजधानी जयपुर में एक भव्य राज्य स्तरीय किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन होने जा रहा है। इस विशाल आयोजन को लेकर श्रीगंगानगर के कृषि महकमे से लेकर सुदूर गांवों में रहने वाले किसानों के बीच जबरदस्त उत्साह और ऊर्जा का माहौल है।

स्थानीय किसान संगठनों, कृषि विज्ञान केंद्रों और राज्य सरकार के कृषि विभाग ने जिले के प्रगतिशील और ऊर्जावान किसानों को इस ‘किसान महाकुंभ’ में भेजने के लिए अपनी जमीनी स्तर की तैयारियां पूरी ताकत से शुरू कर दी हैं। इस पूरे अभियान का मुख्य और एकमात्र उद्देश्य जिले के किसानों को पारंपरिक, कैमिकल-मुक्त खेती के आधुनिक व वैज्ञानिक तरीकों से रूबरू करवाना है।

क्यों जरूरी है यह किसान महाकुंभ?

श्रीगंगानगर जिला अपनी अत्यधिक पैदावार के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है, लेकिन पिछले कुछ दशकों में अधिक फसल लेने की होड़ में रासायनिक खादों (Chemical Fertilizers) और घातक कीटनाशकों (Pesticides) का अंधाधुंध इस्तेमाल बढ़ा है। इसके कारण:

  • मिट्टी की प्राकृतिक उपजाऊ क्षमता (Soil Health) लगातार कम हो रही है।

  • भूजल का स्तर और उसकी गुणवत्ता प्रभावित हुई है।

  • फसलों में रसायनों के अंश आने से आम जनता के स्वास्थ्य पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

इसी संकट को भांपते हुए अब ‘बैक टू बेसिक्स’ यानी प्रकृति की ओर लौटने की तैयारी की जा रही है। 12 जून को जयपुर में आयोजित होने वाले इस महाकुंभ में देशभर के जाने-माने कृषि विशेषज्ञ, वैज्ञानिक और सफल जैविक किसान शामिल होंगे। वे राजस्थान भर से आने वाले हजारों किसानों को कम लागत में, बिना किसी केमिकल के, सिर्फ गाय के गोबर, गोमूत्र और प्राकृतिक घटकों से तैयार ‘जीवामृत’ व ‘घनजीवामृत’ जैसी तकनीकों से बंपर पैदावार लेने के गुर सिखाएंगे।

श्रीगंगानगर में ब्लॉक स्तर पर चल रही है तैयारियां

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में श्रीगंगानगर जिले की भागीदारी को ऐतिहासिक बनाने के लिए कृषि विभाग के अधिकारी पूरी तरह सक्रिय हैं। जिला मुख्यालय से लेकर ब्लॉक स्तर (जैसे पदमपुर, रायसिंहनगर, घड़साना, सूरतगढ़ आदि) पर प्रगतिशील किसानों की सूचियां तैयार की जा रही हैं।

कृषि विभाग के स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि उनका ध्यान विशेष रूप से उन युवा किसानों पर है, जो खेती में नए प्रयोग करने से कतराते नहीं हैं। गांवों में चौपालों और किसान गोष्ठियों का आयोजन किया जा रहा है, जहां किसानों को इस महाकुंभ के महत्व के बारे में बताया जा रहा है। किसानों को जयपुर ले जाने, वहां उनके ठहरने और प्रशिक्षण के बाद उन्हें वापस लाने के लिए विशेष बसों और परिवहन की व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

कैमिकल-मुक्त खेती से बदलेगी जिले की तकदीर

स्थानीय प्रगतिशील किसानों का मानना है कि श्रीगंगानगर के लिए प्राकृतिक खेती की ओर कदम बढ़ाना वक्त की सबसे बड़ी मांग है। यदि यहां के किसान बड़े पैमाने पर जैविक उत्पादों जैसे—ऑर्गेनिक गेहूं, किन्नू, सरसों और ग्वार का उत्पादन शुरू कर दें, तो उन्हें न केवल घरेलू बाजारों में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी फसलों के दोगुने-तिगुने दाम मिल सकते हैं।

विशेषज्ञों का मत: “प्राकृतिक खेती से किसानों का इनपुट कॉस्ट (खेती की लागत) लगभग शून्य हो जाता है क्योंकि उन्हें बाजार से महंगे यूरिया या डीएपी खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती। जब लागत कम होगी और उत्पाद की गुणवत्ता बेहतरीन होगी, तो किसान की शुद्ध आय में अपने आप रिकॉर्ड बढ़ोतरी होगी।”

12 जून का यह राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम श्रीगंगानगर के किसानों के लिए एक टर्निंग पॉइंट (मोड़) साबित होने वाला है। यहां से सीखकर लौटने वाले किसान अपने-अपने गांवों में ‘मास्टर ट्रेनर’ की भूमिका निभाएंगे और अन्य साथी किसानों को भी केमिकल-मुक्त खेती अपनाने के लिए प्रेरित करेंगे। उम्मीद की जा रही है कि इस महाकुंभ के बाद श्रीगंगानगर जिला हरित क्रांति के बाद अब ‘प्राकृतिक कृषि क्रांति’ का भी नेतृत्व करेगा।

©️ श्री गंगानगर न्यूज़ ©️