
श्रीगंगानगर। भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे राजस्थान के संवेदनशील सीमावर्ती जिले श्रीगंगानगर में सुरक्षा व्यवस्था को बेहद कड़ा कर दिया गया है। 18 और 19 जून 2026 (गुरुवार और शुक्रवार) को सीमा सुरक्षा बल (BSF) और स्थानीय जिला पुलिस ने संयुक्त रूप से सीमावर्ती इलाकों में एक अभेद्य सुरक्षा ग्रिड तैयार किया है। पिछले कुछ दिनों में सीमा पार (पाकिस्तान) से ड्रोन के जरिए हेरोइन जैसी नशीली दवाओं और अवैध हथियारों की तस्करी के लगातार प्रयासों को नाकाम करने के बाद, भारतीय सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह से हाई अलर्ट मोड पर हैं।
सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, पश्चिमी सीमा पर घने अंधेरे और भौगोलिक स्थितियों का फायदा उठाकर पाकिस्तानी तस्कर भारतीय सीमा में प्रतिबंधित सामग्री भेजने की फिराक में रहते हैं। इस खतरे से निपटने के लिए इस गुरुवार और शुक्रवार को सीमा से सटे गांवों, कृषि क्षेत्रों और मुख्य रास्तों पर विशेष चेकिंग अभियान चलाया गया और नाइट पेट्रोलिंग (रात की गश्त) को दोगुना कर दिया गया है ताकि किसी भी तरह की देश विरोधी या संदिग्ध गतिविधि पर पलक झपकते ही कड़ा ऐक्शन लिया जा सके।
एंटी-ड्रोन तकनीक और आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल
हाल के समय में पारंपरिक तस्करी के तरीकों की जगह रिमोट-कंट्रोल ड्रोन (UAV) का इस्तेमाल तस्करों के लिए एक नया हथियार बन गया है। इस चुनौती का सामना करने के लिए बीएसएफ ने श्रीगंगानगर सेक्टर में अपनी तकनीकी क्षमताओं को काफी अपग्रेड किया है। सीमा पर अत्याधुनिक एंटी-ड्रोन सिस्टम (Anti-Drone Technology) और ‘ड्रोन हंटर्स’ को तैनात किया गया है, जो आसमान में उड़ने वाली किसी भी संदिग्ध वस्तु को न केवल ट्रैक कर सकते हैं बल्कि उन्हें जाम (Jam) करके मार गिराने में भी सक्षम हैं।
इसके साथ ही, रात के समय सीमा पार की गतिविधियों को स्पष्ट रूप से देखने के लिए सैनिकों को हाई-टेक हैंड-हेल्ड थर्मल इमेजर, नाइट विजन डिवाइसेज और दूरबीनें दी गई हैं। फेंसिंग (कंटीले तारों) के पास संवेदनशील पॉइंट्स पर फ्लड लाइट्स और सर्च लाइट्स के जरिए लगातार रोशनी रखी जा रही है, जिससे घुसपैठ या तस्करी का कोई भी प्रयास नामुमकिन हो सके।
स्थानीय पुलिस के साथ ‘ज्वाइंट ऑपरेशन’ और नाकाबंदी
सुरक्षा को केवल जीरो-लाइन (Zero Line) तक ही सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि सीमा से जुड़े अंदरूनी इलाकों में भी सुरक्षा का घेरा कड़ा है। श्रीगंगानगर जिला पुलिस और बीएसएफ की इंटेलिजेंस विंग मिलकर काम कर रही हैं। गुरुवार रात से ही भारत-पाक सीमा की ओर जाने वाली सभी मुख्य सड़कों, लिंक रोड्स और कच्चे रास्तों पर पुलिस ने कड़े नाके (Checkposts) लगाए हैं।
रात के समय इन रास्तों से गुजरने वाले हर संदिग्ध वाहन की बारीकी से तलाशी ली जा रही है और चालकों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस अधीक्षक कार्यालय के निर्देशानुसार, सीमावर्ती थानों—जैसे गजसिंहपुर, केसरीसिंहपुर, रायसिंहनगर, और श्रीकरणपुर—की पुलिस टीमों को विशेष रूप से सतर्क रहने और अपने-अपने क्षेत्रों में रात्रि गश्त बढ़ाने के आदेश दिए गए हैं।
सीमावर्ती गांवों में ‘विलेज डिफेंस कमेटियों’ को किया सक्रिय
सीमा सुरक्षा में स्थानीय नागरिकों की भूमिका हमेशा से बेहद महत्वपूर्ण रही है। ड्रोन की आवाज और उसकी लैंडिंग लोकेशन का पता लगाने में सीमा के नजदीक रहने वाले ग्रामीण सबसे पहले गवाह बनते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए बीएसएफ और स्थानीय प्रशासन ने सीमावर्ती गांवों में ‘विलेज डिफेंस कमेटियों’ (VDC) और स्थानीय व्हाट्सएप ग्रुप्स को एक बार फिर सक्रिय कर दिया है।
अधिकारियों ने ग्रामीणों और मुख्य रूप से रात के समय खेतों में पानी लगाने वाले किसानों के साथ बैठकें की हैं। उन्हें जागरूक किया गया है कि यदि रात या अलसुबह आसमान में किसी भी तरह की भनभनाहट या ड्रोन जैसी आवाज सुनाई दे, या कोई भी अज्ञात व्यक्ति गांव के आसपास संदिग्ध हालत में घूमता दिखे, तो तुरंत इसकी सूचना नजदीकी बीएसएफ पोस्ट या स्थानीय पुलिस को दें। सजग रहने वाले और सटीक सूचना देने वाले ग्रामीणों को पुरस्कृत करने का भी प्रावधान किया गया है।
युवाओं को नशे के जाल से बचाने की बड़ी कवायद
सुरक्षा बलों का यह सख्त रुख केवल देश की संप्रभुता की रक्षा के लिए ही नहीं, बल्कि पंजाब और राजस्थान के युवाओं को नशे के दलदल से बचाने के लिए भी बेहद जरूरी है। पाकिस्तान की तरफ से आने वाली हेरोइन की खेप का मुख्य निशाना स्थानीय युवा होते हैं। ड्रोन गतिविधियों पर पैनी नजर रखकर और तस्करों के स्थानीय नेटवर्क (Local Receivers) को ध्वस्त करके सुरक्षा बल देश की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने में जुटे हैं। वर्तमान में श्रीगंगानगर सीमा पर स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और मुस्तैद जवान हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार खड़े हैं।